हाल शिक्षा का (1) : बाजार में बदल रहा ज्ञान का मंदिर… सीख रहे हैं या खरीद रहे हैं?

शिक्षा को फिर से उसके मूल उद्देश्य से जोड़ें. स्कूलों को केवल परीक्षा परिणामों का केंद्र न बनाकर, उन्हें विचार, संवाद और सृजन का मंच बनायें. सरकार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा सुलभ,समावेशी और मूल्य आधारित बनी रहे. ‘सेवा’ से ‘उत्पाद’ में बदलती जा रही है शिक्षा उपस्थिति … Continue reading हाल शिक्षा का (1) : बाजार में बदल रहा ज्ञान का मंदिर… सीख रहे हैं या खरीद रहे हैं?