मोबाइल हाथ में, माइक गले में… क्या यही पत्रकारिता है?

चिंता की सबसे बड़ी बात यह भी कि ऐसी पत्रकारिता की आड़ में भयादोहन का ‘समानांतर उद्योग’ खड़ा हो गया है. गांव से लेकर शहर तक ऐसे अनेक ‘स्वयंभू पत्रकार’ मिल जायेंगे, जिनके पास न किसी संस्थान का प्रशिक्षण है, न संपादकीय जवाबदेही और न पत्रकारिता की मौलिक समझ. मोबाइल कैमरा और यूट्यूब चैनल अधिकतर … Continue reading मोबाइल हाथ में, माइक गले में… क्या यही पत्रकारिता है?