सवा साल बन गया काल -3 : मौत-दर-मौत करीब आ गया अंत

कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा दादा हथियार निर्माण में पारंगत था. श्रीलंका के लिट्टे से प्रशिक्षण ले रखा था. तेलंगाना के करीमनगर जिले के सिरसिला मंडल के गोपालरावपल्ली गांव का रहनेवाला कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा दादा भाकपा (माओवादी) की केन्द्रीय समिति का सदस्य था. दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सचिव का भी पद मिला था.

महेश कुमार सिन्हा
09 मार्च 2026
New Delhi: सुरक्षा बलों द्वारा बनायी गयी 15 खूंख्वार नक्सलियों (Naxalites) की ‘टॉप-टेन’ सूची में 14वें स्थान पर रहे थेंटू लक्ष्मी नरसिम्हा चलम उर्फ सुधाकर (Thentu Lakshmi Narasimha Chalam alias Sudhakar) आंध्रप्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के चिंतलपुडी मंडल के प्रागदावरम गांव का था. 1986 में पीपुल्स वार गु्रप (People’s War Group) से जुड़कर उसने नक्सली जीवन (Naxalite Life) की शुरुआत की थी. वह केन्द्रीय समिति (Central Committee) का सदस्य था. संगठन में वैचारिक व राजनीतिक गुरु और तकनीकी रणनीतिकार (Technical Strategist) की उसकी पहचान थी. सेंट्रल कमेटी की तकनीकी टीम का प्रमुख था और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (Dandakaranya Special Zonal Committee) के तहत रिजनल पॉलिटिकल स्कूल चलाता था. उसे आनंद, चांति बालकृष्णा, रामराजू, अरविंद और सोमन्ना के उपनाम से भी जाना जाता था. उसकी पत्नी ककरला गुरु स्मृति उर्फ उमा (Kakrala Guru Smriti alias Uma) भी सक्रिय माओवादी है. दंडकारण्य क्षेत्र में वह राज्य समिति की सदस्य (State Committee Member) है. चर्चित नक्सली मंडूगुला भास्करराव उर्फ माइलारापु अडेल्लू तेलंगाना (Telangana) के आदिलाबाद जिले के अरुमादला गांव का रहने वाला था.
पूरा परिवार नक्सली
तकरीबन चार दशकों तक नक्सली गतिविधियों से जुड़ा रहा गजराला रवि उर्फ उदय तेलंगाना के वारंगल जिले के वेलिसाला गांव का था. भाकपा (माओवादी) की केन्द्रीय समिति और आंध्र-ओडिसा सीमा विशेष क्षेत्रीय समिति का सदस्य था. 15 शीर्ष नक्सलियों की ‘टॉप-टेन’ सूची में वह 12वें स्थान पर था. जानने वाली बात यह कि सिर्फ वही नहीं, उसका पूरा परिवार नक्सली था. पत्नी जमीला, बड़ा भाई आजाद और भाभी अलग- अलग मुठभेड़ में मारे गये. छोटा भाई आयतू ने आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया. गजरला रवि उर्फ उदय (Gajarla Ravi alias Uday) खुद आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले में मुठभेड़ में मारा गया. उसके खिलाफ दर्ज कई गंभीर मामलों में मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू की हत्या के प्रयास का मामला भी शामिल है.
झारखंड में दूसरा बड़ा झटका
नक्सली संगठन के प्रमुख रणनीतिकार मनोज उर्फ मोडम बालाकृष्णा उर्फ बालन्ना (Manoj alias Modem Balakrishna alias Balanna) पर कुल 05 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. वह भी तेलंगाना के वारंगल जिले के धानपुर मंडल के मदीकोंडा गांव का रहनेवाला था. ‘टॉप-टेन’ सूची में उसका 07वां स्थान था. भाकपा (माओवादी) की केन्द्रीय समिति का सदस्य और ओडिसा (Odisa) राज्य प्रभारी था. झारखंड (Jharkhand) के हजारीबाग (Hazaribagh) जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के मंदेरी गांव निवासी सहदेव सोरेन (Sahdeo Soren) माओवादी संगठन में केन्द्रीय समिति का सदस्य था. झारखंड सरकार (Jharkhand Government) ने उस पर 01 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. मूल नाम उसका अनुज सोरेन (Anuj Soren) था. नक्सलियों के बीच सहदेव सोरेन के अलावा प्रवेश और अमलेश के उपनाम से भी जाना जाता था. हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हुई उसकी मौत से झारखंड में नक्सली संगठन को दूसरा बड़ा झटका लगा.
सात करोड़ का इनामी था
छतीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Baster) में नक्सलवाद की नींव रखनेवाले 63 वर्षीय गुडसा उसेंडी उर्फ कट्टा राजचन्द्र रेड्डी उर्फ राजू दादा (Gudsa Usendi alias Katta Rajachandra Reddy alias Raju Dada) के मुठभेड़ में मारे जाने से संगठन में सिहरन समा गयी. राजू दादा की खूंख्वारियत का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि उस पर सात राज्यों ने 07 करोड़ का इनाम घोषित कर रखा था. संगठन में उसे रमेश, विजय, सुनील चौधरी, विकल्प के उपनामों से जाना जाता था. वह तेलंगाना के करीमनगर जिले (Karimnagar District) के कोहेडा मंडल के तिगालागुट्टा पल्ली गांव का रहनेवाला था. केन्द्रीय समिति व केन्द्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो का सदस्य और दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति का सचिव था. ‘टॉप-टेन’ में वह 12वें स्थान पर था और उसकी सक्रियता मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ में थी.
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डालने लग गये हथियार
कट्टा राजचन्द्र रेड्डी उर्फ राजू दादा के साथ काल का ग्रास बना कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा दादा हथियार निर्माण में पारंगत था. श्रीलंका (Srilanka) के लिट्टे से प्रशिक्षण ले रखा था. तेलंगाना के करीमनगर जिले के सिरसिला मंडल के गोपालरावपल्ली गांव का रहनेवाला कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा दादा भाकपा (माओवादी) की केन्द्रीय समिति का सदस्य था. दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सचिव का भी पद मिला था. उसकी पत्नी डीवी सीएम राधक्का (DV CM Radhakka) भी नक्सली थी. हालात ऐसे हो गये हैं कि मुठभेड़ों में शीर्ष माओवादी नेताओं के मारे जाने से मौत करीब देख बड़ी संख्या में नक्सली हथियार डालने लग गये हैं. सामान्य माओवादी ही नहीं, संगठन के बड़े ओहदेदार भी मुख्य धारा में लौटने लगे हैं. (जारी)
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