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आंख में भर लो पानी… राजनीति का दिखा दोरंगा व्यवहार

रामकृपाली सिंह ने सीमित संसाधनों से आरकेएस कंस्ट्रक्शन को खड़ा किया. अपनी सूझ-बूझ, मेहनत की बदौलत कंपनी को अग्रणी निर्माण कंपनियों की कतार में शामिल कर दिया. सिर्फ सड़कें या इमारतें नहीं बनायी, हजारों परिवारों के जीवन में रोजगार, सम्मान और आत्मविश्वास की नींव डाली. इस सफर में उन्होंने बिहार से झारखंड तक, पटना-रांची से दिल्ली तक सामाजिक- राजनीतिक सरोकार के महासेतु का निर्माण किया.

विभेष त्रिवेदी
07 मार्च 2026
Patna : दरभंगा राज (Darbhanga Raj) के त्याग, देशसेवा और सहयोग की इस ऐतिहासिक परंपरा को अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी (Maharani Kamsundari devi) ने भी आजीवन कायम रखा. खुद कष्ट में रहीं, संकटों से घिरी रहीं, लांक्षित होती रहीं, परन्तु कर्तव्यपथ से डिगीं नहीं. पूर्व सांसद और अंतिम महाराजा कामेश्वर सिंह (Maharaja Kameshwar Singh) का निधन 01 अक्तूबर 1962 को हुआ. निःसंतान रानी कामसुंदरी देवी पर दुःख का पहाड़ टूट गया. ऐसे समय में भी उन्होंने देश के लिए जिस त्याग और सेवा भाव का परिचय दिया, उसका दूसरा उदाहरण दुर्लभ है. महाराजा के निधन के महज पंद्रह दिन बाद 20 अक्तूबर 1962 को चीनी सेना ने भारत (India) पर लद्दाख में हमला कर दिया. प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru) ने इसकी कल्पना तक नहीं की थी. आर्थिक रूप से कमजोर भारत तो युद्ध का खर्च उठाने में भी सक्षम नहीं था. सदमे में डूबी महारानी कुछ पल के लिए अपना दुःख भूल गयीं. उन्होंने युद्ध सहायता कोष में 600 किलो सोना दान कर दिया.

महाराजा कामेश्वर सिंह के निधन के बाद, महारानी ने न केवल राजसी गरिमा को बनाये रखा, बल्कि महाराजा कामेश्वर सिंह धार्मिक ट्रस्ट के माध्यम से भारत (India), पाकिस्तान (Pakistan) और बंगलादेश (Bangladesh) में फैले 108 मंदिरों का कुशल प्रबंधन भी किया. उन्होंने दरभंगा राज (Darbhanga Raj) के शाही इतिहास, कला, साहित्य-संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए महाराजा कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन (Maharaja Kameshwar Singh Kalyani Foundation) की स्थापना की. महारानी की देख-रेख में कल्याणी फाउंडेशन मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने, दुर्लभ पांडुलिपियों,11 हजार से अधिक पुस्तकों, 12 हजार से अधिक तस्वीरों के माध्यम से शोध कार्यों को प्रोत्साहित करता रहा है.

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देशभर के उन राजघरानों ने शोक संदेश भेजकर महारानी को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो किसी कारणवश दरभंगा नहीं पहुंच सके. शोक संदेश भेजने वालों में पद्म विभूषण डाॉ महाराजा कर्ण सिंह, डाॉ राजा मानवेन्द्र सिंह, महाराजा ऐश्वर्य चंद्र कटोच, महाराजा शिवेन्द्र पाल, युवराज प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, महाराजा इजीयराज सिंह (कोटा), महाराजा जयेंद्र प्रताप सिंह (बलरामपुर), प्रोॉ राजेन्द्र चोपड़ा (लंदन), महारानी दिया कुमारी (जयपुर), महारानी राधिका रानी गायकवाड़ (बड़ौदा), महाराजा हर्षवर्धन सिंह (डूंगरपुर), महाराजा वनस्वर्धन सिंह (बूंदी), महाराजा कनक वर्धन सिंह देव (ओडिसा), महाराजा कीर्ति वर्धन सिंह और महाराजा उदयभान नारायण सिंह (हजारीबाग) प्रमुख रूप से शामिल हैं.

रामकृपाली सिंह (Ramkripali Singh) ने सीमित संसाधनों से आरकेएस कंस्ट्रक्शन को खड़ा किया. अपनी सूझ-बूझ, मेहनत की बदौलत कंपनी को अग्रणी निर्माण कंपनियों की कतार में शामिल कर दिया. सिर्फ सड़कें या इमारतें नहीं बनायी, हजारों परिवारों के जीवन में रोजगार, सम्मान और आत्मविश्वास की नींव डाली. इस सफर में उन्होंने बिहार से झारखंड (Jharkhand) तक, पटना-रांची (Patna-Ranchi) से दिल्ली तक सामाजिक- राजनीतिक सरोकार के महासेतु का निर्माण किया. यही वजह है कि रामकृपाली सिंह के निधन के बाद उनके पैतृक गांव रामदीरी (Ramdiri) (बेगूसराय, बिहार) में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और श्राद्धकर्म में झारखंड और बिहार के दिग्गज राजनेताओं का तांता लगा रहा. ,

झारखंड के मुख्यमंत्री (Chief Minister) हेमंत सोरेन(Hemant Soren) ने रामकृपाल सिंह के रांची स्थित आवास पर उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और मधु कोड़ा भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. इधर रामदीरी में श्राद्धकर्म के महाआयोजन को ‘अखिल भारतीय गौतम महासम्मेलन’ नाम दिया गया. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) , केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह (Lalan Singh) व गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) , बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी, सुरेन्द्र मेहता, पूर्व विधायक राजकुमार सिंह, बेगूसराय के पूर्व विधायक श्रीकृष्ण सिंह समेत सैकड़ों मंत्री, सांसद, विधायक एवं नेता रामदीरी पहुंचे. महासम्मेलन और महाभोज में देश भर के लाखों सामाजिक- राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हुए. (जारी)

(विभेष त्रिवेदी बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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