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आंख में भर लो पानी : क्यों नहीं बना तीर्थस्थल…मंत्रियों व नेताओं का ?

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान दरभंगा पहुंचे और कल्याणी निवास में महारानी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. शोक-संतप्त परिवार के सदस्यों से मिल कर ढांढस बंधाया. राज्यपाल ने कहा कि दरभंगा राजपरिवार का देश, समाज के उत्थान, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर राजपरिवार का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है.

विभेष त्रिवेदी
08 मार्च 2026
Patna : ऐसा नहीं है कि दरभंगा (Darbhanga) में महारानी कामसुंदरी देवी (Maharani Kamsundari devi) का निधन बड़ी खबर नहीं बना, परन्तु जिस तरह रामकृपाली सिंह (Ramkripali Singh) के निधन के बाद रामदीरी (Ramdiri) गांव राजनीतिक तीर्थस्थल बना रहा, उसके सामने दरभंगा में महारानी का श्राद्धकर्म फीका पड़ गया. भले ही रामकृपाल सिंह किसी राजनीतिक दल के पावर सेंटर नहीं थे. परन्तु, लगभग सभी दलों के दिग्गज नेता उनसे उपकृत होते रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि वह राजनेताओं को दिल खोलकर ‘दान’ देते थे और आगे भी उनके बेटे रंजन कुमार से बड़ी उम्मीदें हैं. हालांकि, महारानी कामसुंदरी देवी और उनके पति महाराजा कामेश्वर सिंह (Maharaja Kameshwar Singh) ने समाज, सरकार और सियासी नेताओं को जितने बड़े पैमाने पर आजीवन दान दिये, उसके सामने अन्य किसी का आर्थिक सहयोग शायद कहीं टिकता नहीं है.

महाराजा कामेश्वर सिंह और महारानी कामसुंदरी देवी की दानशीलता, त्याग और देश के उत्थान में दरभंगा राज (Darbhanga Raj) के योगदान से अगर दूसरे किसी की तुलना की जाये तो इसे सूरज को दीपक दिखाना कहेंगे. इस परिप्रेक्ष्य में सवाल उठना लाजिमी है कि रामदीरी में दरभंगा से बड़ी भीड़ कैसे और क्यों जुटी? रामदीरी की तरह दरभंगा राजनेताओं के लिए तीर्थस्थल क्यों नहीं बना? इसका सीधा जवाब है, जहां पहुंचकर स्वार्थ की सिद्धि होती है, संभावनाओं के द्वार खुलते हैं, वही जाग्रत तीर्थस्थल माना जाता है. जो चेहरे भक्ति भाव से रामदीरी में शीश नवाने पहुंचे, उन्हें आगे भी आरकेएस कंस्ट्रक्शन (RKS Construction) और रंजन कुमार (Ranjan Kumar) से बड़ी उम्मीदें हैं.

बिहार के राज्यपाल (Governor) आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) दरभंगा पहुंचे और कल्याणी निवास में महारानी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. शोक-संतप्त परिवार के सदस्यों से मिल कर ढांढस बंधाया. राज्यपाल ने कहा कि दरभंगा राजपरिवार का देश, समाज के उत्थान, खासकर शिक्षा (Education) के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर राजपरिवार का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है. वह राजपरिवार के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति देने दरभंगा आये हैं. राज्यपाल ने कहा कि वह इस परिवार को छात्र जीवन से जानते हैं. जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) में पढ़ रहे थे, वहां दरभंगा राजपरिवार के सदस्यों की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी देखी. वहां सभी के नाम अंकित हैं.

राज्यपाल ने उम्मीद जतायी कि राजपरिवार के वर्तमान सदस्य विरासत को आगे बढ़ायेंगे. महारानी के पौत्र कुमार कपिलेश्वर सिंह और कुमार राजेश्वर सिंह ने कहा कि राज्यपाल का श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आना राजपरिवार के लिए गौरव और संतोष का विषय है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और क्षेत्रीय विधायक संजय सरावगी (Sanjay Saraogi) ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की. राजपरिवार को शिकायत नहीं है कि मंत्रियों और राजनेताओं को दरभंगा आकर महारानी को श्रद्धांजलि देने की फुर्सत नहीं हुई. पर, कुछ ही दिनों बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी की मां के श्राद्ध में मुख्यमंत्री (Chief Minister) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) , उपपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) समेत कई मंत्री दरभंगा पहुंच गये. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Naveen) भी. बहरहाल, राजपरिवार की ओर से समस्त मिथिलावासियों को श्राद्ध कर्म में सहयोग, स्नेह और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया गया है.

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अब जरा 8 सितंबर 2022 की ओर लौटिये. उस दिन ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन हुआ था. याद कीजिये, भारतीय मीडिया किस तरह दिवंगत फिरंगी महारानी पर दो महीने तक फिदा रहा था. उनका गुणगान करता रहा. ब्रिटेन की महारानी पर भारत में सिर्फ लिखा और दिखाया नहीं गया, पढ़ा गया और दिलचस्पी के साथ देखा भी गया. हम इस बहस में नहीं पड़ना चाहते हैं कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय महान थीं या नहीं? अगर महान थीं तो कितनी? हम सिर्फ याद दिलाना चाहते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत के साथ -साथ वहां की महारानी भी साम्राज्यवादी नीति की पोषक रही हैं. आजादी के बाद भी इंगलैंड भारत को नीचा दिखाने, अपना पिछलग्गू बनाने-दिखाने की साजिशें करता रहा है. भारत का वह सिर्फ विभाजन ही नहीं किया, पाकिस्तान को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से सहयोग व संरक्षण भी देता रहा है. इसके बावजूद हम भारतीयों को ब्रिटिश महारानी में किस तरह के आदर्श दिखे? अगर ब्रिटेन की महारानी में आदर्श दिखायी दिये, तो हम अपनी महारानी और राजाओं के आदर्शों,योगदान को नजरंदाज क्यों करते हैं? क्या मानवता, करुणा, महानता सिर्फ ब्रिटेन की महारानी में ही थी?

हो सकता है कि महारानी कामसुंदरी देवी से भी कुछ चूक, गलतियां हुई हों. जब सरकारें कुछ मामलों में विफल हो सकती हैं, समाज नकारा साबित हो सकता है तो महल के विराने में रहकर कर्तव्य निर्वहन करती रहीं महारानी से भी कुछ चूक, गलतियां हुई होंगी. गलतियों और उपलब्धियों को जानना जरूरी है. दरभंगा राज के ऐतिहासिक योगदान, उपादानों और गलतियों का अध्ययन जरूरी है. हम अपने इतिहास की अनदेखी और अनादर करेंगे तो हमारे मानदंड खोखले होंगे. सिर्फ मिथिला विश्वविद्यालय (Mithila University) में ही नहीं, सभी विश्वविद्यालयों में देश के उत्थान में राजे-रजवाड़ों के योगदान, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका का निष्पक्ष अध्ययन शुरू कराना चाहिये. उम्मीद की जानी चाहिये कि सत्ता पक्ष व विपक्ष के मंत्री, सांसद-विधायक भारतीय राजे-रजवाड़ों को वह सम्मान दिलाने की पहल करेंगे, जिसका वे हकदार थे. (समाप्त)

(विभेष त्रिवेदी बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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