सवा साल बन गया काल : ‘युवा आतंक’… ऐसे खत्म हुई कहानी

2025 में माओवादी संगठन को बड़ा सदमा झारखंड में भी पहुंचा. 21 अप्रैल 2025 को बोकारो के लुगु पहाड़ पर 01 करोड़ के इनामी नक्सली प्रयाग मांझी उर्फ विवेक मांझी उर्फ विवेक दा सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में काल का ग्रास बन गया. झारखंड पुलिस के मुताबिक वह धनबाद जिले के टुंडी थाना क्षेत्र के दलबुढ़ा गांव का रहनेवाला था. भाकपा (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था.

महेश कुमार सिन्हा
08 मार्च 2026
New Delhi : माओवादी संगठन (Maoist organization) के महासचिव (General Secretary) नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू (Nambala Keshavrao alias Basavaraju) की मौत के बाद सुरक्षा बलों (security forces) की निर्णायक कार्रवाई में मुठभेड़ का सिलसिला इस तरह बढ़ा. 05 जून 2025 को छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर (Bijapur) में 01 करोड़ के इनामी थेंटू लक्ष्मी नरसिम्हा चलम उर्फ सुधाकर को मौत के मुंह में झोंक दिया गया. वह केन्द्रीय समिति का सदस्य था. एक दिन बाद 06 जून को मंडूगुला भास्करराव उर्फ माइलारापु अडेल्लू बीजापुर में ही मारा गया. दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव माडवी हिड़मा (Madvi Hidma) के ‘युवा आतंक’ की कहानी 18 नवम्बर 2025 को खत्म हो गयी. आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के मारेदुमिल्ली में नक्सली पत्नी मड़कम राजे उर्फ रजक्का के साथ उसके मारे जाने से नक्सलवाद ‘लकवाग्रस्त’ हो गया. केन्द्रीय समिति के इकलौता आदिवासी युवा सदस्य माडवी हिड़मा की मौत से पहले छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा (Vijay Sharma) ने उसकी मां माडवी पोज्जे से पुवर्ती गांव में मुलाकात की थी.
सर्वनाश का साल
विजय शर्मा के कहने पर माडवी पोज्जे ने पुत्र माडवी हिड़मा को मुख्यधारा में लौट आने का सुझाव दिया था. उस सुझाव पर वह विचार करता, उससे पहले उसे मौत के मुंह में धकेल दिया गया. उसकी मौत के बाद संगठन में कमांडर इन चीफ की जिम्मेवारी बारसे देवा उर्फ सुक्का को मिली. 48 वर्षीय बारसे देवा उर्फ सुक्का उसी पुवर्ती गांव का है जहां का माडवी हिड़मा था. कई जघन्य नक्सली वारदातों में उसकी संलिप्तता थी. माडवी हिड़मा की मौत से वह इस कदर डर गया कि जान बचाने के लिए 03 जनवरी 2026 को उसने तेलंगाना (Telangana) पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. सुरक्षा बलों की इन उपलब्धियों को दृष्टिगत रख यह कहें कि वर्ष 2025 की तरह 2026 भी नक्सली संगठन के लिए ‘सर्वनाश का साल’ साबित हो रहा है, तो वह कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.
2025 में चलपति मारा गया
‘नक्सल मुक्त भारत’ (naxal free india) अभियान के तहत 2025 में सुरक्षा बलों की माओवादियों से मुठभेड़ की शुरुआत 19 जनवरी को हुई. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में जयराम उर्फ चलपति (Jayaram alias Chalapathi) मारा गया. तकरीबन दस हथियारबंद नक्सलियों की सुरक्षा में रहनेवाला 01 करोड़ का इनामी जयराम उर्फ चलपति संगठन की केन्द्रीय समिति का सदस्य था. आत्मरक्षार्थ खुद भी एके-47 रायफल और एसएलआर रखता था. वह आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले के माटेमपल्ली गांव का रहनेवाला था. मूल नाम उसका जयराम रेड्डी था. संगठन में उसे रामचन्द्र रेड्डी अप्पाराव उर्फ रामू के नाम से भी जाना जाता था. उसके जमीन सूंघ लेने के कुछ ही माह बाद 31 मार्च को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के गीदम थाना क्षेत्र में दुर्दांत महिला नक्सली गुम्मडिवेली रेणुका उर्फ बानू उर्फ चाइते उर्फ सरस्वती उर्फ दमयंती मारी गयी. तेलंगाना के वारंगल जिले के कडवेंदी गांव की रहने वाली रेणुका उर्फ बानू दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी की सदस्य थी. सेंट्रल रिजनल ब्यूरो की प्रेस टीम का इंचार्ज भी. उस पर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था. नक्सलियों के बीच वह ‘संपादक’ के रूप में चर्चित थी.
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सदमा झारखंड में भी पहुंचा
उस साल यानी 2025 में माओवादी संगठन को बड़ा सदमा झारखंड (Jharkhand) में भी पहुंचा. 21 अप्रैल 2025 को बोकारो (Bokaro) के लुगु पहाड़ पर 01 करोड़ के इनामी नक्सली प्रयाग मांझी उर्फ विवेक मांझी उर्फ विवेक दा सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में काल का ग्रास बन गया. झारखंड पुलिस के मुताबिक वह धनबाद (Dhanbad) जिले के टुंडी थाना क्षेत्र के दलबुढ़ा गांव का रहनेवाला था. भाकपा (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था. नक्सलियों के बीच फुचना, फुच्चा, नागो मांझी और करण दा के उपनाम से भी जाना जाता था. झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिसा (Odisha) का वह बहुत बड़ा नक्सली चेहरा था. उसकी मौत को भी उग्रवाद निरोधक अभियान की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया.
रीढ़विहीन हो गया संगठन
05 जून को बीजापुर में थेंटू लक्ष्मी नरसिम्हा चलम उर्फ सुधाकर, 06 जून को बीजापुर में ही मंडूगुला भास्करराव उर्फ माइलारापु अडेल्लू, 18 जून को आंध्रप्रदेश में गजरला रवि उर्फ उदय, 12 सितम्बर को गरियाबंद में मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्णा, 14 सितम्बर को झारखंड में सहदेव सोरेन, 22 सितम्बर को अबूझमाड़ के नारायणपुर में गुडसा उसेंडी उर्फ कट्टा राजचन्द्र रेड्डी उर्फ राजू दादा और कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा दादा के आतंक का सदा के लिए अंत हो गया. ये सभी केन्द्रीय समिति के सदस्य थे और संगठन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते थे. हर किसी के सिर पर करोड़-दो करोड़ का इनाम भी घोषित था. एक-एक कर इनके मारे जाने से संगठन लगभग रीढ़विहीन हो गया. (जारी)

(महेश कुमार सिन्हा बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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