Bihar Crime फिर एक अधिकारी की हत्या , सिहर उठी सत्ता! विधायक पर गंभीर आरोप

यह बिहार की कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ी और कड़ी चुनौती है. इस रूप में कि अपराधी इतने बेखौफ कैसे हो गये हैं ? कानून के राज का मतलब सिर्फ यह नहीं कि घटना के बाद पुलिस पहुंच गयी. कुछ की गिरफ्तारी हो गयी. हत्या के बाद गिरफ्तारी और कार्रवाई जरूरी है, पर कानून का राज तब माना जायेगा जब अपराधी कांड करने से पहले पुलिस और कानून से खौफ खाये.
बेखौफ कर दे रहे हैं सरकारी अधिकारी की हत्या
कानून- व्यवस्था पर फिर उठा बड़ा सवाल
जुर्म कबूल कर लिया वाहन चालक ने
पत्नी का आरोप: विधायक ने मांगे थे 50 लाख
विष्णुकांत मिश्र
02 अगस्त 2026
Patna : बिहार (Bihar) में बेलगाम अपराधियों का आतंक इन दिनों इतना बढ़ गया है कि आम लोगों की बात छोड़िये, सरकारी अधिकारियों (Adhikariyon) की भी बेखौफ हत्या कर दे रहे हैं. इधर के दिनों में हुईं ऐसी दो बड़ी घटनाओं से सरकारी महकमे में सिहरन समा गयी है. पहली भयावह वारदात भागलपुर (Bhagalpur) जिले में 28 अप्रैल 2026 को हुई. अपराधियों ने सुलतानगंज (Sultanganj) नगर परिषद के कार्यालय में घुस कर कार्यपालक पदाधिकारी (Executive Officer) कृष्ण भूषण कुमार (Krishna Bhushan Kumar) को गोलियों से भून दिया. हमले में नगर परिषद के सभापति राजकुमार गुड्डू (Rajkumar Guddu) भी घायल हो गये. कुछ दिनों बाद उनकी भी मृत्यु हो गयी. हमले का आरोप नगर परिषद की उपसभापति (Deputy Chairman) नीलम देवी (Neelam Devi) के बाहुबली पति रामधनी यादव (Ramdhani Yadav) पर लगा. घटना के दूसरे दिन पुलिस से मुठभेड़ में वह भी मारा गया.
एक को दफ्तर में, दूसरे को सड़क पर
और अब डेहरी-डालमियानगर (Dehri-Dalmianagar) नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार (Vimal Kumar) की औरंगाबाद (Aurangabad) जिले के बारुण (Barun) इलाके में हत्या कर दी गयी. एक अधिकारी को अपराधियों ने दफ्तर में घुसकर निशाना बनाया, तो दूसरे को सड़क पर मौत दे दी. दोनों वारदातों के तरीके अलग हैं. पर, सवाल एक ही है कि क्या बिहार में अपराधियों को सरकारी अधिकारी की हत्या कर देने में भी कोई डर नहीं रह गया है? सुलतानगंज की घटना से यह भय पसरा कि नगर निकायों के कार्यालय भी अधिकारियों के लिए सुरक्षित नहीं रहे. बारुण की वारदात ने इस सवाल को और भयावह बना दिया कि अधिकारी सड़क पर भी सुरक्षित नहीं रह गये हैं? रात के अंधेरे में सरकारी अधिकारी की सड़क पर हत्या सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, उस व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है, जिसका पहला दायित्व नागरिकों की सुरक्षा है.
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वाहन चालक ने बहाया खून!
डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार शनिवार 01 अगस्त 2026 की रात अपने वाहन से डेहरी से पटना आ रहे थे. रात करीब नौ बजे औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र में पटना सोन नहर रोड (Son Canal Road) पर लख डिहरा (Lakh Dihra) गांव और धनौती पुल (Dhanauti Bridge) के बीच वाहन रोक कर उनकी हत्या कर दी गयी. साथ में सिर्फ वाहन चालक मिथिलेश कुमार (Mithilesh Kumar) था. मगध (Magadha) क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) विकास वैभव (Vikas Vaibhav) ने मीडिया को बताया कि मिथिलेश कुमार ने ही लोहे की रॉड से पीट-पीट कर विमल कुमार की हत्या कर दी. हत्या का कारण कार्यपालक पदाधिकारी से उसका झगड़ा-झंझट होना है. दिवंगत कार्यपालक पदाधिकारी की पत्नी ने भी इसकी तसदीक की है. पुलिस महानिरीक्षक के मुताबिक मिथिलेश कुमार ने जुर्म स्वीकार कर लिया है. गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया गया है. मिथिलेश कुमार रोहतास (Rohtas) जिले के डेहरी थाना क्षेत्र के कऊआ सोनप गांव का रहने वाला है.
सवाल सिर्फ हत्या का नहीं
इस घटना ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. अपराधी की पहचान हो गयी है, हत्या की वजह का भी पता चल गया है. इसके बाद भी यह सवाल तो उठता ही है कि एक अधिकारी रात में अपने वाहन से जा रहा है और कथित रूप से रोककर उसकी हत्या कर दी जाती है तो सड़क की सुरक्षा व्यवस्था कहां थी? पटना के गोला रोड (Gola Road) इलाके में रहने वाले 45 वर्षीय विमल कुमार ने 27 फरवरी 2025 को डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में योगदान दिया था. इससे पहले औरंगाबाद (Aurangabad) और दाऊदनगर (Daudnagar) में भी वह सेवा दे चुके थे. गया (gaya) जिले के शेरघाटी (Sherghati) के मूल निवासी विमल कुमार के परिवार में पत्नी कविता कुमारी (Kavita Kumari) और दो छोटे बच्चे- एक बेटा और एक बेटी हैं.
सवाल शासन के इकबाल का
दिवंगत कार्यपालक पदाधिकारी की पत्नी ने हत्या में डेहरी के लोजपा (रामविलास) (LJP (Ram Vilas)) विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह (Rajiv Ranjan Singh alias Sonu Singh) की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाये हैं. उनसे 50 लाख रुपया मांगने के भी आरोप मढ़े हैं. इन आरोपों की सच्चाई की जांच पुलिस करेगी. बहरहाल, विमल कुमार की हत्या परिवार का दुख है, लेकिन यह बिहार की कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ी और कड़ी चुनौती है. इस रूप में कि अपराधी इतने बेखौफ कैसे हो गये हैं ? कानून के राज का मतलब सिर्फ यह नहीं कि घटना के बाद पुलिस पहुंच गयी. कुछ की गिरफ्तारी हो गयी. हत्या के बाद गिरफ्तारी और कार्रवाई जरूरी है, पर कानून का राज तब माना जायेगा जब अपराधी कांड करने से पहले पुलिस और कानून से खौफ खाये.

विष्णुकांत मिश्र वरिष्ठ पत्रकार हैं.
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