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Major issue : समझिये ‘जेन-जी’ को : बंगलादेश के बाद …नेपाल हलाल ! शातिराना विदेशी चाल ?

अनिल विभाकर
11 अगस्त 2026
यी दिल्ली (New Delhi) में जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से शुरू जेन – जी (Gen-Z ) आंदोलन खत्म हो गया, यह मानना बहुत बड़ी भूल होगी. मेरा मानना है कि यह कुछ समय के लिए सिर्फ स्थगित भर हुआ है. जेन – जी नेता संसद (Parliament) मार्च के दौरान उपद्रव और हिंसा में शामिल आपराधिक लोगों पर कार्रवाई का सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का आदेश मानने को तैयार नहीं . इस आदेश की खुली अवज्ञा करते हुए काकरोच (Cockroach) नेता सड़क पर उतरने की धमकी भी दे रहे हैं. जेन- जी के नाम पर यह आंदोलन इस बार नीट पेपर लीक (NEET paper leak) के बहाने हुआ. जेन – जी नेता आगे किसी अन्य मुद्दे के बहाने फिर से सड़कों पर नहीं उतरेंगे , इसकी कोई गारंटी नहीं. जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरुद्ध कोकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) के बैनर तले धरना- प्रदर्शन और इसकी सफलता के बाद वैश्विक स्तर पर ‘जेन – जी ‘ की खूब चर्चा हो रही है.कुछ लोगों को लगता है कि ‘ जेन – जी ‘ ही अब वह विकल्प है जो भ्रष्ट और जनविरोधी सरकार को सत्ता से बेदखल कर देश में जन कल्याणकारी राज कायम कर सकता है.

अब सवाल है कि यह ‘जेन – जी’ आखिर ऐसी कौन- सी शक्ति है जो अचानक प्रकट हो गयी, जिसने कुछ लोगों के मन में सकारात्मक उम्मीदें जगा दीं ? ‘जेन – जी ‘ शब्दावली लगभग चार साल पहले अमेरिका (America) में गढ़ी गयी जिसका एक खास राजनीतिक मकसद है. इस शब्दावली के अनुसार जिन युवाओं और युवतियों का जन्म वर्ष 1997 से 2012 के बीच हुआ है उन्हें ‘जेन – जी ‘ कहा जाता है. इस आयु वर्ग के लोगों के लिए यह एक नयी शब्दावली है. फटी जीन्स पहन कर कुछ लोगों को जिस तरह विशिष्टता का बोध होता है, युवाओं का यह वर्ग ‘जेन – जी’ की संज्ञा पाकर उसी तरह अचानक विशिष्टता बोध से भर उठा है. फटी जीन्स पहनने वालों को भारतीय समाज का बहुत बड़ा वर्ग अच्छी दृष्टि से नहीं देखता फिर भी पाश्चात्य देशों से आया यह फैशन भारत (India) में चल पड़ा है.

ठीक इसी तरह 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग अपने को ‘जेन – जी’ कहलाने में सुखद वैशिष्ट्य बोध का अनुभव करते हैं. सवाल है कि अमेरिका को आखिर ‘ जेन- जी ‘ शब्द गढ़ने की जरूरत क्यों महसूस हुई ? और इसके पीछे उसका क्या मकसद है ? गंभीरता से चिंतन करें तो इसके पीछे उसकी एक खतरनाक योजना दिखाई देगी , जो चिंतित करने वाली है. दरअसल अमेरिका ‘जेन – जी ‘ का इस्तेमाल कर दुनिया (World) के उन देशों को अस्थिर और विखंडित कर वहां अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है जो उसके इशारे पर नर्तन नहीं करते. ‘जेन – जी ‘ आंदोलन का पहला प्रयोग अमेरिका ने 2024 में बंगलादेश (Bangladesh) में किया. कहने की जरूरत नहीं कि ‘जेन – जी ‘ आन्दोलन के नाम पर बंगलादेश में किस तरह उत्पात और रक्तपात हुए, शेख हसीना (Sheikh Hasina) सरकार का तख्तापलट करने के लिए किस तरह आगजनी और मारकाट हुई. अल्पसंख्यक हिंदुओं पर कैसे – कैसे जुल्म ढाये गये. ‘जेन जी’ ने वहां न सिर्फ शेख हसीना सरकार का तख्तापलट किया बल्कि उनकी हत्या की ऐसी कोशिश की कि जान बचाकर आनन- फानन उन्हें अपने देश से भागना पड़ा. शेख हसीना आज भी भारत की शरण में हैं.

विश्व में ‘जेन- जी ‘ का दूसरा आंदोलन 2025 में नेपाल में हुआ. नेपाल (Nepal) में तो वर्षों से चीन समर्थक सरकारें रहीं. 2025 में भी वहां जो सरकार थी वह चीन (China) समर्थक ही थी. ‘जेन – जी ‘ आंदोलन के नाम पर पूरे नेपाल में जैसी हिंसा, आगजनी और उपद्रव हुए वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं. विशिष्टता बोध से भरे ‘जेन -जी’ ने पूरे नेपाल को एक तरह से तहस-नहस कर दिया.प्रधानमंत्री (Prime Minister) से लेकर कई मंत्रियों की घर में घुसकर पिटाई, हत्या और लूटपाट की गयी. कुछ सत्ताधारियों को तो भूमिगत होकर जान बचानी पड़ी. इस तरह वहां भी ‘जेन जी’ की अराजकता की पराकाष्ठा विश्वभर ने देखी. बंगलादेश की तरह नेपाल में भी कुछ महीने बाद चुनाव हुए और वहां नयी सरकार बनी. ‘जेन जी’ आंदोलन के बाद बंगलादेश में अब तक स्थिति सामान्य नहीं हुई है. नेपाल की नयी बालेन्द्र शाह (Balendra Shah) सरकार से भी वहां की आम जनता खुश नहीं है.

नेपाल फिर से जल उठा है. नेपाल को हिन्दू राष्ट्र (Hindu Nation) घोषित करने की मांग भी उठने लगी है. इस समय वहां मुसलमानों पर राह चलते हमले हो रहे हैं. बहुसंख्यकों की उग्र भीड़ मस्जिदों पर लगातार हमले कर रही है और मुसलमानों को नेपाल छोड़ अन्यत्र जाने का अल्टिमेटम दिया जा रहा है. बंगलादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद अमेरिका से आकर मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) सत्ता पर काबिज हुआ तो वहां हिंसा और उत्पात और बढ़ गया. मोहम्मद यूनुस डेढ़ साल तक सत्ता में रहा. वहां नये सिरे से चुनाव हुए और नयी सरकार बनी. वहां जो सरकार बनी, इस समय वह अमेरिका के इशारे पर काम कर रही है. ‘जेन जी ‘ आंदोलन से पहले नेपाल में चीन समर्थक सरकार थी और बंगलादेश में भारत समर्थक. दोनों देशों में इस समय भारत विरोधी सरकार है. इस तरह नेपाल और बंगलादेश में ‘जेन जी’ आंदोलन का अमेरिकी मकसद पूरा हो गया. (जारी)
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अनिल विभाकर देश के जाने-माने लेखक-पत्रकार एवं कवि हैं.

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