Jharkhand Crime : सुजीत सिन्हा…कहानी खत्म, पत्नी संभालेगी कमान ?

झारखंड पुलिस का मानना है कि मृत अपराधी सरगना सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा का जुड़ाव भी अपराध जगत से है. उसके मुताबिक धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा के गिरोहों के बीच जो गठजोड़ विकसित हुआ था उसमें रिया सिन्हा की बहुत बड़ी भूमिका थी. दोनों गिरोह रंगदारी और संगठित अपराध में एक-दूसरे की मदद कर रहे थे.
संगठित अपराध को कारोबार बना दिया था झारखंड में
60 से अधिक मामले दर्ज थे सुजीत सिन्हा के खिलाफ
दोहरे हत्याकांड में मिली थी आजीवन कारावास की सजा
मुठभेड़ में मारे गये गैंगस्टर अमन साहू से थी जानी दुश्मनी
विष्णुकांत मिश्र
04 अगस्त 2026
Ranchi : झारखंड (Jharkhand) के अपराध जगत का एक ऐसा चेहरा… जिसके नाम से कारोबारी कांपते थे, ठेकेदार खौफ खाते थे और कभी- कभार पुलिस का भी पसीना छूट जाया करता था. वर्षों तक पुलिस उसकी तलाश में जुटी रही. हत्या, रंगदारी और गैंगवार की लंबी फेहरिस्त…60 से ज्यादा संगीन मुकदमें… आखिरकार पुलिस से मुठभेड़ में मारा गया. वह चेहरा किसी और का नहीं, कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा (Sujit Sinha) का था, जिसने संगठित अपराध को कारोबार बना दिया था. सुजीत सिन्हा की मौत झारखंड के जामताड़ा (Jamtara) जिले में पुलिस से मुठभेड़ में हो गयी. पुलिस के अनुसार 02 अगस्त 2026 की रात में उसे साहिबगंज (Sahibganj) मंडल कारा (Divisional Jail) से धनबाद (Dhanbad) जेल ले जाया जा रहा था. उसी क्रम में उसने कथित तौर पर भागने और पुलिसकर्मियों का हथियार छीनने की कोशिश की, मुठभेड़ हुई और मारा गया. हालांकि, सुजीत सिन्हा के परिजनों ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाते हुए मुठभेड़ को फर्जी बताया है. सुजीत सिन्हा की सास उषा देवी ने मुठभेड़ के पीछे गहरी साजिश का आरोप मढ़ा है.
कितनी कुख्याति थी सुजीत सिन्हा की ?
सुजीत सिन्हा की गिनती झारखंड के बड़े शातिर गैंगस्टरों (Gangsters) में होती थी. उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण, आर्म्स एक्ट, आपराधिक साजिश और संगठित अपराध जैसे गंभीर आरोपों को लेकर 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे. उसका अपराध -तंत्र पलामू (Palamu) , गढ़वा (Garhwa), लातेहार (Latehar) , रांची, धनबाद, चतरा (Chatra) और अन्य कई जिलों तक फैला हुआ था. शुरुआत में वह झारखंड राज्य के सबसे बड़े अपराधी सरगना सुशील श्रीवास्तव के गिरोह से जुड़ा था शूटर के रूप में काम करता था. बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा कर लिया और बहुत जल्द आतंक का पर्याय बन गया.
अपराध की शुरुआत दोहरे हत्याकांड से
सुजीत सिन्हा मूल रूप से पलामू जिले के हुसैनाबाद (Hussainabad) थाना क्षेत्र के पथरा गांव का रहने वाला था. पर, पलामू नगर क्षेत्र के श्रीरामपथ इलाके में पला -बढ़ा था. पहली बार वह 2007 में अपराध जगत की सुर्खियों में आया था. पलामू नगर थाना क्षेत्र के कान्दू मोहल्ला में अनिल सिंह और भूषण सिंह नाम के दो भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. पुलिस रिपोर्ट में घटना का मास्टरमाइंड सुजीत सिन्हा ही था. इसी दोहरे हत्याकांड में उसे 2019 में पलामू की अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिली थी. इससे पहले फायरिंग के एक मामले में वह जेल गया था. जेल से निकलने के बाद ही दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था. सुजीत सिन्हा मेदिनीनगर केंद्रीय कारा (Medininagar Central Jail) में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था. 09 अक्तूबर 2025 को सुरक्षा कारणों से साहिबगंज मंडल कारा स्थानांतरित कर दिया गया था.
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कई जिलों में पसरा था आतंक
झारखंड पुलिस के अनुसार सुजीत सिन्हा का गिरोह व्यवसायियों, ठेकेदारों और कारोबारियों से लेवी वसूलने के लिए काफी बदनाम था. कई जिलों में उसका आतंक पसरा था. उसके अपराध -तंत्र की जांच केंद्रीय एजेंसियां भी कर रही थीं. ऐसा बताया जाता है कि एक समय में सुजीत सिन्हा और कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड डॉन (Underworld Don) लारेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) गिरोह से जुड़े गैंगस्टर अमन साहू (Aman Sahu) के बीच करीबी थी. बाद में दोनों के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ गयी और कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन एक – दूसरे के खून के प्यासे हो गये. कुछ वर्ष पूर्व अमन साहू भी इसी तरह पुलिस से मुठभेड़ में मारा गया. उस मुठभेड़ पर भी गंभीर सवाल उठे थे.
पत्नी रिया सिन्हा का जुड़ाव भी अपराध से!
झारखंड पुलिस का मानना है कि मृत अपराधी सरगना सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा (Riya Sinha) का जुड़ाव भी अपराध जगत से है. उसके मुताबिक धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा के गिरोहों के बीच जो गठजोड़ विकसित हुआ था उसमें रिया सिन्हा की बहुत बड़ी भूमिका थी. दोनों गिरोह रंगदारी और संगठित अपराध में एक-दूसरे की मदद कर रहे थे. प्रिंस खान धनबाद के वासेपुर का रहने वाला है, सुजीत सिन्हा पलामू का था. रांची पुलिस ने 2025 में कार्रवाई के दौरान कहा था कि रिया सिन्हा इस गठजोड़ के संचालन में भूमिका निभा रही थी. इस आरोप में उसकी गिरफ्तारी हुई थी. वर्तमान में वह चाईबासा (Chaibasa) जेल में बंद है. उसके खिलाफ करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं. पुलिस ने उस पर हथियार तस्करी, आपराधिक साजिश और संगठित अपराध में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप लगाये थे.
नेटवर्क पूरी तरह खत्म हो गया ?
बहरहाल, करीब दो दशक तक झारखंड में अपराध की दुनिया का खूंखार चेहरा रहा सुजीत सिन्हा अब इतिहास बन चुका है. लेकिन, उसके खात्मे के बाद भी सवाल खड़े हैं—क्या उसके गिरोह का नेटवर्क पूरी तरह खत्म हो गया है ? गिरोह की कमान अब सीधे तौर पर जेल में बंद सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा के हाथ में नहीं आ जायेगी? झारखंड पुलिस के सामने इस गिरोह को लेकर अब यही बड़ी चुनौती है.

विष्णुकांत मिश्र वरिष्ठ पत्रकार हैं.
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