Tattooing गोदना : रोजगार के नये अवसर…करोड़ों डालर का व्यवसाय

तेज़ी से बढ़ता टैटू उद्योग रचनात्मकता, रोजगार और उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है. अब समय आ गया है कि इसकी प्रगति को मजबूत नियमन, वैज्ञानिक सुरक्षा मानकों और उपभोक्ता जागरूकता का भी साथ मिले. कला और सुरक्षा के बीच संतुलन ही इस उद्योग को दीर्घकालिक, विश्वसनीय और समाज के लिए अधिक लाभकारी बना सकता है.
अनेक देशों में लगातार बढ़ रहे टैटू स्टूडियो
बेहतर नियमन व सुरक्षित भविष्य की तलाश
खतरे में पड़ सकती है ग्राहकों की सुरक्षा
पंजीकरण, प्रशिक्षण, प्रमाणन एवं निरीक्षण जरूरी
डॉ विजय गर्ग
06 अगस्त 2026
New Delhi : कभी गोदना यानी टैटू जनजातीय पहचान, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक हुआ करते थे. आज व्यक्तिगत अभिव्यक्ति, कला, फैशन (Fashion) और आत्म-पहचान का माध्यम बन चुके हैं. सोशल मीडिया (Social Media) , फिल्मी हस्तियों (Film personalities), खिलाड़ियों (Players) और बदलती जीवनशैली ने टैटू को एक वैश्विक ट्रेंड बना दिया है. भारत (India) सहित दुनिया (World) के अनेक देशों में टैटू स्टूडियो की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह उद्योग (Industry) करोड़ों डॉलर का व्यवसाय बन चुका है. लेकिन, इस तेजी से बढ़ते उद्योग के साथ एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी जुड़ा है—क्या इसका विकास पर्याप्त नियमों, सुरक्षा मानकों और सरकारी निगरानी के साथ हो रहा है?
नियामक व्यवस्था काफी पीछे
पिछले कुछ वर्षों में टैटू बनवाने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. पहले इसे केवल युवाओं का शौक माना जाता था, लेकिन अब हर आयु वर्ग के लोग टैटू बनवा रहे हैं. कोई अपनी यादों को स्थायी रूप से संजोने के लिए टैटू बनवाता है, तो कोई अपनी कला, विचारधारा या व्यक्तिगत पहचान को व्यक्त करने के लिए. चिकित्सा (Treatment) क्षेत्र में भी कुछ विशेष परिस्थितियों में टैटू का उपयोग किया जाता है. इस बढ़ती मांग ने हजारों टैटू कलाकारों और उद्यमियों के लिए नये रोजगार के अवसर पैदा किये हैं. हालाँकि, उद्योग की इस तेज़ रफ्तार के मुकाबले नियामक व्यवस्था काफी पीछे दिखाई देती है. अनेक स्थानों पर बिना किसी अनिवार्य प्रशिक्षण, लाइसेंस या स्वास्थ्य प्रमाणन के टैटू स्टूडियो संचालित किये जा रहे हैं. इससे सेवाओं की गुणवत्ता में असमानता आती है और ग्राहकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है.
संक्रमण का खतरा
टैटू (Tattoo) बनवाने की प्रक्रिया में त्वचा की ऊपरी परत को सुइयों की सहायता से भेदकर स्याही को भीतर पहुंचाया जाता है. यदि उपकरण पूरी तरह से निष्फल (स्टरलाइज़्ड) न हों या एक ही सुई का पुनः उपयोग किया जाये तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis B) , हेपेटाइटिस-सी (Hepatitis C) जैसी रक्तजनित बीमारियां फैलने की आशंका रहती है. इसके अतिरिक्त कुछ लोगों को टैटू की स्याही से एलर्जी (Allergies) , त्वचा में सूजन, संक्रमण (Infection) या घाव भरने में कठिनाई जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है.
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जागरूकता की कमी
एक अन्य महत्वपूर्ण चिंता टैटू स्याही की गुणवत्ता है. सभी देशों में टैटू इंक के लिए समान गुणवत्ता मानक नहीं हैं. कुछ स्याहियों में ऐसे रसायन या अशुद्धियां हो सकती हैं जिनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर पर्याप्त अध्ययन उपलब्ध नहीं है. चूँकि टैटू जीवनभर शरीर पर बने रहते हैं, इसलिए प्रयुक्त स्याही की गुणवत्ता और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है. उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी भी एक बड़ी समस्या है. कई लोग केवल कम कीमत देखकर टैटू स्टूडियो चुन लेते हैं और यह नहीं पूछते कि उपकरण कैसे साफ किये जाते हैं, सुइयां नयी हैं या नहीं, कलाकार प्रशिक्षित है या नहीं, तथा टैटू के बाद त्वचा की देखभाल कैसे करनी चाहिए. सही जानकारी के अभाव में छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है.
व्यावहारिक दिशा-निर्देश
दूसरी ओर, अधिकांश पेशेवर टैटू कलाकार अपने कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होते हैं. वे स्वच्छता, कला और ग्राहक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हैं. इसलिए एक प्रभावी नियामक व्यवस्था केवल ग्राहकों की सुरक्षा ही नहीं करेगी, बल्कि योग्य और जिम्मेदार कलाकारों को भी उचित पहचान और सम्मान दिलायेगी.सरकारों को इस उद्योग के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक दिशा-निर्देश तैयार करने चाहिए. इनमें टैटू स्टूडियो का अनिवार्य पंजीकरण, कलाकारों का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन, नियमित स्वास्थ्य निरीक्षण, एक बार उपयोग होने वाली सुइयों का प्रयोग, स्वीकृत गुणवत्ता वाली स्याही का उपयोग, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान, आयु सत्यापन, लिखित सहमति तथा टैटू के बाद देखभाल संबंधी स्पष्ट निर्देश शामिल किये जा सकते हैं. ऐसे नियम उद्योग पर अनावश्यक बोझ नहीं डालेंगे, बल्कि उसकी विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बढ़ायेंगे.
पारदर्शिता की आवश्यकता
टैटू आज केवल फैशन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की पहचान, भावनाओं और जीवन की कहानी का हिस्सा हैं. इसलिए इस उद्योग को भी उतनी ही जिम्मेदारी और पारदर्शिता की आवश्यकता है जितनी किसी अन्य स्वास्थ्य-संबंधी सेवा को होती है. तेज़ी से बढ़ता टैटू उद्योग रचनात्मकता, रोजगार और उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है. अब समय आ गया है कि इसकी प्रगति को मजबूत नियमन, वैज्ञानिक सुरक्षा मानकों और उपभोक्ता जागरूकता का भी साथ मिले. कला और सुरक्षा के बीच संतुलन ही इस उद्योग को दीर्घकालिक, विश्वसनीय और समाज के लिए अधिक लाभकारी बना सकता है.

(डा. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्राचार्य हैं. विभिन्न विषयों पर सारगर्भित लेखन भी करते हैं.)
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