चुनाव बहिष्कार : शायद ही बन पायेगी सहमति महागठबंधन में

शिवकुमार राय
28 जुलाई 2025
Patna : इसे सियासी दांव मानें या शिगूफा या फिर एनडीए (NDA) के शब्दों में हताशा, बिहार विधानसभा में नेता, प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण के संभावित फलाफल से इतने आशंकित व विचलित हैं कि 2025 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के बहिष्कार की बात तक करने लगे हैं. उन्हें आशंका है कि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कट जायेंगे. उस स्थिति में चुनाव का कोई मतलब नहीं रह जायेगा. इसको दृष्टिगत रख वह महागठबंधन (Grand Alliance) के अन्य घटक दलों से चुनाव बहिष्कार पर बात करेंगे. सबकी सहमति से निर्णय किया जायेगा.
वक्त बतायेगा
तेजस्वी प्रसाद यादव के चुनाव बहिष्कार की इस समझ पर महागठबंधन के घटक दलों की अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है. पर, राजद (RJD) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे शिवानंद तिवारी (Shivanand Tiwari) ने यह कहते हुए उनकी पीठ जरूर ठोक दी कि चुनाव बहिष्कार महागठबंधन का क्रांतिकारी कदम होगा. संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उसे ऐसा करना चाहिए. बहरहाल, तेजस्वी प्रसाद यादव चुनाव बहिष्कार की बात को आगे बढ़ायेंगे या नहीं, बात यदि बढ़ी तो घटक दलों में सहमति बनेगी या नहीं, यह वक्त बतायेगा . फिलहाल बात उस मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण की जिस पर सिर्फ तेजस्वी प्रसाद यादव और राजद को ही नहीं, तमाम विपक्षी दलों को आपत्ति है. सभी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलित हैं. दिल्ली (Delhi) में कांग्रेस नेता (Congress Leader) राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व में मुट्ठियां लहरा रहे हैं तो पटना में राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के नेतृत्व में.
विपक्ष को है यह आशंका
सामान्य समझ में विपक्षी दलों को आशंका इस बात की है कि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण से लाखों लोग संविधान प्रदत्त वोट के अधिकार से वंचित हो जायेंगे. उनमें अधिकतर महागठबंधन समर्थक सामाजिक समूहों के होंगे. लेकिन,विपक्ष की इस आशंका से अलग मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित निर्वाचन आयोग के आंकड़े कुछ और बयां कर रहे हैं. निर्वाचन आयोग के 25 जुलाई 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि बिहार के कुल 07 करोड़ 89 लाख मतदाताओं में से 91.69 प्रतिशत यानी 07 करोड़ 04 लाख लोगों का पुनरीक्षण हो गया है. इसके तहत 65 लाख से अधिक लोगों का मतदाता सूची से नाम कटना तय माना जा रहा है.

यही है बहिष्कार का आधार
जिन लोगों के नाम मतदाता सूची (voter list) से हट जायेंगे उनमें 22 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है. यह 02.83 प्रतिशत है. 36 लाख से ज्यादा मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह बस गये हैं. 07 लाख मतदाता ऐसे भी मिले हैं जो एक से अधिक जगहों पर पंजीकृत हैं. इन सब के नाम मतदाता सूची से हटाये जायेंगे. इन आंकड़ों में विपक्षी दलों को फर्जीवाड़ा दिखता है. विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी प्रसाद यादव चुनाव बहिष्कार की जो बात कर रहे हैं उसका आधार भी संभवतः यही है. वैसे, राजनीति इसे फिलहाल शिगूफा मान रही है. समझ यह कि चुनाव बहिष्कार पर महागठबंधन के घटक दलों में सहमति तो कायम नहीं ही हो पायेगी, राजद में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जा सकती है. कमोबेश दूसरे घटक दलों को भी ऐसे ही हालात से दो-चार होना पड़ जा सकता है. राजनीति (Politics) के विश्लेषकों का मानना है कि इस आशंका के मद्देनजर जोखिम शायद ही कोई घटक दल उठाना चाहेगा.
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