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छपरा जेल कांड : उठे थे तब सवाल… चुन-चुन कर मारा गया

तर्क यह था कि जब अंधाधुंध गोली चली तो सिर्फ वही लोग कैसे मरे? हालांकि, प्रमंडलीय आयुक्त पंचम लाल ने तब कहा था कि वे सब ‘कैदी विद्रोह’ के अगुवा थे, इसलिए मारे गये. लेकिन, जेल के उस वक्त के अंदरुनी दृश्य पर आधारित जो आरोप उछले थे उसके मुताबिक आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पहले पीट-पीट कर अधमरा किया गया और फिर शरीर में गोलियां झोंक दी गयी. सभी चार के शव वार्ड में ही पड़े मिले.

विष्णुकांत मिश्र
27 फरवरी 2026

Patna: छपरा जेल में पुलिस की कमांडो कार्रवाई को लेकर उस वक्त जो सवाल उठे उनमें एक यह भी था कि चुन-चुन कर सिर्फ उन्हीं सरगनाओं को मारा गया जिनका दूसरे जेल (Jail) में स्थानान्तरण किया जाना था. इसके पीछे तर्क यह था कि जब अंधाधुंध गोली चली तो सिर्फ वही लोग कैसे मरे? हालांकि, प्रमंडलीय आयुक्त (Divisional Commissioner) पंचम लाल (Pancham Lal) ने तब कहा था कि वे सब ‘कैदी विद्रोह’ के अगुवा थे, इसलिए मारे गये. लेकिन, जेल के उस वक्त के अंदरुनी दृश्य पर आधारित जो आरोप उछले थे उसके मुताबिक आत्मसमर्पण (Surrender) के बाद उन्हें पहले पीट-पीट कर अधमरा किया गया और फिर शरीर में गोलियां झोंक दी गयी. सभी चार के शव वार्ड में ही पड़े मिले. उनमें शशिभूषण सिंह 02 अक्तूबर 2001 की घटना का चश्मदीद गवाह था. उस दिन प्रेम कुमार सिंह और गणेश साह की जेल में पिटाई से मौत हुई थी.

इसलिए दिया गया अंजाम

मामला अदालत में भी गया था. तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (DSP) राजकुमार यादव, नगर थाना प्रभारी राणा प्रताप सिंह और सहायक कारापाल शमशेर खां अभियुक्त बनाये गये थे. तब यह कहा गया था कि गवाह खत्म करने के लिए जेल कांड को अंजाम दिया गया. मामले का अदालती निष्पादन किस रूप में हुआ, नहीं मालूम. जेल में 30 मार्च 2002 को हुए हिंसक उपद्रव (Violent Disturbance) के सिलसिले में तत्कालीन काराधीक्षक विपिन कुमार सिंह ने भगवान बाजार थाना (Bhagwan Bazar Thana) में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. 11 कैदियों को नामजद तथा अन्य कई अज्ञात को अभियुक्त बनाया था.

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तीन आरोपित बरी

सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने और जेल की सुरक्षा में तैनात काराकर्मियों एवं पुलिसकर्मियों पर प्राणलेवा हमले का आरोप लगाया था. मीडिया रिपोर्ट (Media Report) के मुताबिक मामला छपरा (Chapra) के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में चला था. लंबी सुनवाई के उपरांत अदालत ने तीन आरोपितों को बरी कर दिया. उनमें छपरा के भगवान बाजार थाना क्षेत्र के दौलतगंज निवासी राजेश तुरहा, सीवान जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के सांठी गांव निवासी ऋषिमुनि सिंह तथा सीवान जिले के ही असांव थाना क्षेत्र के कसीला गांव निवासी जटाशंकर सिंह शामिल थे. शेष अभियुक्तों के मामले का अंतिम निष्पादन किस रूप में हुआ, यह भी नहीं मालूम.

-समाप्त-

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