कुत्तों के लिए ‘काला पानी’ : पांच कुत्तों को मिली उम्रकैद!

तापमान लाइव ब्यूरो
23 दिसम्बर 2025
Kanpur : उत्तरप्रदेश के कानपुर में पांच कुत्तों को उम्रकैद की सजा मिली है! इस खबर से आप जरूर चौंक गये होंगे. खबर चौंकाने वाली है भी. कुत्ता और उम्रकैद! लेकिन, चौंकिये नहीं, कुत्तों को ‘गंभीर अपराधों’ के लिए उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा किसी अदालत ने नहीं दी है, कानपुर नगर निगम ने आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के आतंक से नागरिकों को बचाने के लिए कटकटाहा कुत्तों को आजीवन कारावास देने जैसा बेहद अनोखा और सख्त नियम लागू किया है. उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार के तत्संबंधी आदेशों का अनुपालन करते हुए नगर निगम ने कटकटाहा अवारा कुत्तों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शने की नीति अपना रखी है. इसके तहत शहर के पशु प्रजनन नियंत्रण केन्द्र (एबीसी) को उन कुत्तों के लिए जेल (Jail) की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. इसे आवारा कुत्तों के लिए ‘काला पानी’ (Kala Pani) कहा जा रहा है. महत्वपूर्ण बात यह कि इस नियम के दायरे में सिर्फ आवारा कुत्ते ही नहीं, बेकाबू पालतू कुत्तों (Pet Dogs) को भी रखा गया है.
दायरे में पालतू कुत्ते भी
कानपुर नगर निगम प्रशासन ने ऐसे ‘अपराधी कुत्तों’ के खिलाफ कार्रवाई के लिए मानक भी तय कर रखे हैं. मसलन, कोई कुत्ता पहली बार किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसे दस दिनों तक एबीसी की निगरानी में रखा जाता है. वही कुत्ता दोबारा किसी को काटता है या दो से अधिक लोगों पर हमला (Assault) करता है, तो उसे हमेशा के लिए एबीसी में कैद कर दिया जाता है. जानकारी के अनुसार इस अभियान के तहत अब तक पांच कुत्तों को ‘उम्रकैद’ की सजा दी जा चुकी है. इनमें सिर्फ गली के अवारा कुत्ते ही नहीं, कुछ ऐसे पालतू कुत्ते भी हैं, जिनके मालिकों ने उन्हें काबू में नहीं रखा और वे आमलोगों के लिए प्राणलेवा (Deadly) साबित हुए.
मानवीय दृष्टिकोण
यह सब तो है, पर कानपुर नगर निगम (Municipal Corporation) ने ‘सजायाफ्ता कुत्तों’ के प्रति मानवीय दृष्टिकोण (Humanitarian Perspective) भी अपना रखा है. नगर निगम प्रशासन के मुताबिक मकसद कुत्तों को प्रताड़ित करना नहीं, जनता को सुरक्षित रखना है. ‘सजायाफ्ता कुत्तों’ को पशु प्रजनन नियंत्रण केन्द्र में बेहतर खान-पान और चिकित्सा सुविधा (Medical Facility) दी जा रही है. शहर में कुत्तों की नसबंदी (Sterilization) का अभियान भी चलाया जा रहा है. नगर निगम प्रशासन ने इन कुत्तों की ‘रिहाई या गोद लेने’ के लिए बहुत ही कड़े नियम बना रखे हैं. ऐसे कुत्तों को तभी छोड़ा जायेगा जब कोई व्यक्ति इनकी पूरी जिम्मेवारी लेने को तैयार होगा. ‘गोद लेने’ वाले को एक हलफनामा देना होगा कि कुत्ता दोबारा किसी पर हमला नहीं करेगा. कुत्ते के शरीर में एक माइक्रोचीफ लगायी जायेगी ताकि उसकी हरकतों पर प्रशासन की नजर रहे.

