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छपरा जेल कांड : वकील राय… सरपरस्ती सियासत की

 

जमीन के विवाद को लेकर खूनी संघर्ष में अपराधी बने अक्षयवट सिंह का नाम तब चर्चा में आया था जब उसने नचाप गांव में प्रतिद्वंद्वी मदन सिंह समेत पांच लोगों की सामूहिक हत्या कर दी थी. होमगार्ड की नौकरी करनेवाले शशिभूषण सिंह ने जेल कांड से 15 वर्ष पूर्व कोपा उच्च विद्यालय में मैट्रिक की परीक्षा के दौरान एक व्यक्ति की हत्या कर अपराध की राह बढ़ा था.

विष्णुकांत मिश्र
26 फरवरी 2026

Patna: कुख्यात वकील राय को सारण (Saran) के ही तब के दूसरे एक स्वजातीय राज्यमंत्री का ‘आशीर्वाद’ प्राप्त था. हालांकि, बाद में लोगों ने बताया कि वकील राय के बढ़ते आतंक को देखते हुए उन्होंने ‘आशीर्वाद’ वाला अपना हाथ खींच लिया था. अक्षयवट सिंह को वर्तमान में महत्वपूर्ण पद संभाल रहे एक पूर्व विधान पार्षद, दिवंगत पूर्व बाहुबली सांसद एवं एक बाहुबली विधायक की सरपरस्ती मिली हुई थी. अशोक उपाध्याय तथा शशिभूषण सिंह एक सजायाफ्ता पूर्व सांसद एवं एक पूर्व महिला विधायक (MLA) को अपना नेता बताते थे. सरगनाओं को नेताओं के संरक्षण, सरपरस्ती और आशीर्वाद से संबंधित बातों में सच्चाई नहीं भी हो सकती है, पर उस दौर की इलाकाई चर्चाओं में इसकी जगह जरूर बनी रहती थी. वकील राय का भाई जज राय भी अपराधी था. छपरा शहर के व्यवसायी वर्ग पर दोनों का एक साथ ‘हुकुम’ चलता था.

टास्क फोर्स ने दबोचा

रंगदारी, हत्या आदि से संबंधित दर्जनों मामलों में फरारी के दौरान वकील राय ने बिहार प्रदेश स्वर्णकार संघ के महासचिव कामेश्वर प्रसाद की हत्या कर कोहराम मचा दिया था. दोनों की गिरफ्तारी टास्क फोर्स से ही संभव हुई थी. जेलकांड में सिर्फ वकील राय मारा गया, जज राय बच गया. अब है भी या नहीं, यह नहीं कहा जा सकता. वकील राय के मारे जाने पर छपरा के सोनारपट्टी मुहल्ले में मिठाइयां बंटी थी. इससे जुड़ा एक किस्सा यह भी है कि जेलकांड के कुछ ही दिनों पूर्व अदालत में पेशी के दौरान वकील राय पर बम फेंका गया था. पुलिस (Police) का कहना रहा कि ऐसा उसे छुड़ाने के लिए किया गया था. लेकिन, तब वकील राय ने कहा था कि वह उसकी हत्या की कोशिश थी. हमला दिलिया रहीमपुर पंचायत के तब के मुखिया किशुन बिंद के गिरोह ने किया था.

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चलता था जेल में सिक्का

जमीन के विवाद को लेकर खूनी संघर्ष में अपराधी बने अक्षयवट सिंह का नाम तब चर्चा में आया था जब उसने नचाप गांव में प्रतिद्वंद्वी मदन सिंह समेत पांच लोगों की सामूहिक हत्या कर दी थी. होमगार्ड (Homegard) की नौकरी करनेवाले शशिभूषण सिंह ने जेल कांड से 15 वर्ष पूर्व कोपा उच्च विद्यालय में मैट्रिक की परीक्षा के दौरान एक व्यक्ति की हत्या कर अपराध की राह बढ़ा था. बक्सर (Buxar) जेल में 12 साल रहने के बाद वह पैरवी के बूते छपरा जेल आ गया था. आजीवन कारावास की सजा काट रहे अक्षयवट सिंह का छपरा जेल में सिक्का चलता था. अशोक उपाध्याय सरगनाओं का ‘मास्टरमाइंड’ था. छपरा शहर के गोपेश्वरनगर का रहनेवाला था. शेरपुर गांव का रंजीत कुमार सिंह सड़क लुटेरा गिरोह का सरगना था.

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