अमूल्य धरोहरों की चोरी (अंतिम) : हो गया सब घोर-मट्ठा!
सामाजिक कार्यकर्त्ता पंकज कुमार ने मामले में दरभंगा पुलिस की कथित शिथिलता का जिक्र करते हुए त्वरित कार्रवाई के लिए तब के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह आदि को पत्र लिखा तो राख में दबा मुद्दा फिर से सुलग उठा है. निगरानी विभाग के अपर सचिव रामाशंकर ने 21 जनवरी 2026 को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को नियमानुसार कार्रवाई के लिए मामले को अग्रसारित कर दिया है. इस पहल का फलाफल क्या निकलता है, कुछ निकलता भी है या नहीं, यह देखने-सुनने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा.
- डा. शशिनाथ झा को भी मिला कुलपति का पद
- नहीं हुआ अमल वरीय पुलिस अधीक्षक के आदेश पर
- सभी अधिकारी और कर्मचारी निलंबन मुक्त हो गये
- चोरी में पुरातत्व विशेषज्ञों की संलिप्तता का संदेह
विजय शंकर पांडेय
27 जून 2026
Darbhanga: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की अमूल्य धरोहरों की चोरी के संदर्भ में उस समय मीडिया में जो बातें आयी थीं उसके मुताबिक तात्कालिक कार्रवाई के तहत तत्कालीन कुलपति (Vice-Chancellor) आचार्य किशोर कुणाल (Acharya Kishore Kunal) ने प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों के रख-रखाव से जुड़े विश्वविद्यालय के आठ पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था. कार्रवाई केन्द्रीय पुस्तकालय (Central Library) के विशेष कार्य पदाधिकारी डा. विद्याधर मिश्र, पांडुलिपियों के पर्यवेक्षक व प्राध्यापक डा. शशिनाथ झा, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष भुवन चन्द्र चौधरी, कैटलॉगर त्रिलोकनाथ झा, पांडुलिपि प्रभारी राजकुमार झा, शार्टर राजेन्द्र ठाकुर, पुस्तकालय सहायक सोनेलाल पासवान और कैटलॉगर पवन कुमार चौधरी के खिलाफ हुई. डा. विद्याधर मिश्र समेत तकरीबन आधा दर्जन विश्वविद्यालय कर्मियों से पुलिस ने पूछताछ भी की.
कहीं कुछ हाथ नहीं लगा
इसी क्रम में विश्वविद्यालय कर्मी गोपाल झा और रमाशंकर झा के आवास पर छापामारी हुई, कहीं कुछ हाथ नहीं लगा. बाद में सभी अधिकारी व कर्मचारी निलंबन मुक्त हो गये. पुलिस का मानना था कि चोरी में विश्वविद्यालय कर्मियों, खासकर पुरातत्व विशेषज्ञों (Archaeological experts) की संलिप्तता हो सकती है. उनके सहयोग के बिना महत्वपूर्ण पांडुलिपियां और उसके रखने के स्थान की जानकारी चोरों को हो ही नहीं सकती. संभवतः इसी आधार पर डा. विद्याधर मिश्र, उमाशंकर झा, सोनेलाल पासवान, राजेन्द्र ठाकुर, पवन कुमार चौधरी और भुवन कुमार चौधरी को आरोपित किया गया.
फैसला आने से पहले सेवानिवृत्त
ऐतिहासिक धरोहरों (Historical heritage sites) की चोरी का यह मामला दरभंगा के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में चला. दरभंगा पुलिस ने 30 जनवरी 2004 को उक्त सभी छह आरोपितों के खिलाफ अभियोग-पत्र दाखिल कर दिया. चोरी के 14 वर्षों बाद 2017 में अदालत का फैसला आया. पुलिस द्वारा पेश सबूतों और साक्ष्यों को दोषसिद्ध करने में ‘अपर्याप्त’ मान अदालत ने सभी 06 आरोपितों को बरी कर दिया. तकरीबन 15 माह जेल में बिताने वाले आरोपित उमाशंकर झा अदालत का फैसला आने से दो साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके थे.
दोषमुक्त हुए, कुलपति बन गये
दिलचस्प बात यह कि डा. विद्याधर मिश्र दोषमुक्त हुए नहीं कि उन्हें कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (Kameshwar Singh Darbhanga Sanskrit University) का कार्यकारी कुलपति बना दिया गया. हालांकि, वह इस पद पर कुछ ही माह रह पाये. 02 फरवरी 2017 से 07 मई 2017 तक. सोनेलाल पासवान और राजेन्द्र ठाकुर भी दोषमुक्त हो गये. अन्य दो अभियुक्तों पवन कुमार चौधरी और भुवन कुमार चौधरी सुनवाई काल में दिवंगत हो गये. बाद के दिनों में कुलपति का पद डा. शशिनाथ झा को भी मिला.
हाजीपुर के समीप मिलीं कुछ पांडुलिपियां
इस कथा का चकित कर देने वाला एक हिस्सा यह भी है कि दरभंगा के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में अभियोग-पत्र दाखिल होने के कुछ साल बाद कस्टम विभाग (Customs Department) ने दरभंगा से पटना जा रहे कुछ युवकों के पास से हाजीपुर के समीप कुछ दुलर्भ पांडुलिपियां बरामद की. गहन जांच में यह तथ्य सामने आया कि ऐतिहासिक धरोहरों की चोरी और बिक्री में हाजीपुर (Hajipur) के तत्कालीन कस्टम अधीक्षक संतोष कुमार सिंह, दरभंगा के आशुतोष झा उर्फ पप्पू ठाकुर तथा दो अन्य अज्ञात की संलिप्तता थी. दरभंगा के तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक ने 29 सितंबर 2010 को विस्तृत प्रतिवेदन में पांडुलिपि चोरी प्रकरण की फिर से जांच कर अदालत में पूरक अभियोग-पत्र दाखिल करने का आदेश दिया.
इत्मीनान से घूम रहे हैं
उस आदेश में दोनों नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी तथा दो अज्ञात की पहचान कर कार्रवाई करने का भी निर्देश था. लेकिन, उस पर अमल नहीं हुआ. इस बीच अदालत का फैसला आ गया. बताया जाता है कि आरोपित कस्टम अधीक्षक संतोष कुमार सिंह और आशुतोष झा उर्फ पप्पू ठाकुर जमानत ले इत्मीनान से घूम रहे हैं. अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में मामले का अंतिम निष्पादन हुआ या नहीं और आरोपितों को दोषमुक्त कर दिये जाने के खिलाफ ऊपरी अदालत में कोई अपील दायर हुई या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है.
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फिर से सुलग उठा दबा मुद्दा
इस बीच पांडुलिपियों की चोरी के वक्त से ही मुखर रहे मधुबनी (Madhubani) जिले के चहुटा गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्त्ता पंकज कुमार ने मामले में दरभंगा पुलिस (Darbhanga_Police) की कथित शिथिलता का जिक्र करते हुए त्वरित कार्रवाई के लिए तब के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar), केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) आदि को पत्र लिखा तो राख में दबा मुद्दा फिर से सुलग उठा है. निगरानी विभाग के अपर सचिव रामाशंकर ने 21 जनवरी 2026 को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को नियमानुसार कार्रवाई के लिए मामले को अग्रसारित कर दिया है. इस पहल का फलाफल क्या निकलता है, कुछ निकलता भी है या नहीं, यह देखने-सुनने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा.
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(विजय शंकर पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं.)


