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राजनीति सीतामढ़ी जिला परिषद की… धूल चाट गये धुरंधर!

अध्यक्ष विरोधियों यानी जदयू के धुरंधर नेताओं की ब्यूहरचना सफल होती दिखी, लेकिन पंचायती राज विभाग ने प्रमंडलीय आयुक्त की अनुशंसा को खारिज कर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया. उपाध्यक्ष संझा देवी का वाद निरस्त हो जाने से अध्यक्ष अदिति कुमारी को बड़ी राहत मिल गयी.

– नयी उखड़ पाया अध्यक्ष अदिति कुमारी का खूंटा

– जिला परिषद की योजना के शिलापट्ट पर अध्यक्ष नहीं

– पदमुक्त करने की अनुशंसा की थी आयुक्त ने

– पंचायत राज विभाग ने वाद को ही खारिज कर दिया

एस के मिश्रा
17 जुलाई 2026

Sitamarhi: सीतामढ़ी जिले की राजनीति में कथित रूप से वर्चस्व बना रखे जदयू (JDU) के धुरंधर नेताओं को इधर अचानक से सांप सूंघ गया है. विशेष कर उन नेताओं को जिन्होंने सीतामढ़ी जिला परिषद अध्यक्ष (Zila Parishad Chairperson) अदिति कुमारी (Aditi Kumari) को पदमुक्त कराने की ब्यूहरचना कर रखी थी. कहते हैं कि ऐसे तमाम नेताओं के जोर लगाने के बावजूद अदिति कुमारी का खूंटा उखड़ नहीं पाया, मजबूती से जमा रह गया. जिला परिषद की उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson of the Zila Parishad) संझा देवी (Sanjha Devi) को आगे कर अपनी गोटी लाल करने के फिराक में लगे नेताओं को अप्रत्याशित ढंग से मुंह की खानी पड़ गयी. संझा देवी ‘समाजसेवी’ की पहचान रखने वाले श्रीनारायण सिंह की पत्नी हैं. श्रीनारायण सिंह का गहरा जुड़ाव उन नेताओं से है. जिला परिषद की राजनीति में अप्रत्यक्ष रूप से ये धुरंधर नेता धूल कैसे चाट गये, इसकी काफी दिलचस्प कहानी है.

रिश्ता छत्तीस में बदल गया

यह हर किसी को मालूम है कि दिसम्बर 2021 में आपसी तालमेल (Mutual Coordination) से अदिति कुमारी अध्यक्ष और संझा देवी उपाध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं. बाद में संभवतः जिला परिषद में प्रभुत्व कायम करने के सवाल पर उनका रिश्ता छत्तीस में बदल गया. इस रिश्ते में तल्खी तब और बढ़ गयी जब जिला परिषद की एक योजना के शिलापट्ट में अध्यक्ष अदिति कुमारी का नाम नहीं अंकित किया गया. सिर्फ उपाध्यक्ष संझा देवी का नाम अंकित था. योजना पुपरी (Pupri) के निरीक्षण भवन के जीर्णोद्धार की थी. उद्घाटन क्षेत्रीय जदयू सांसद (MP) देवेशचन्द्र ठाकुर (Devesh Chandra Thakur) ने किया था. विवाद बढ़ गया तब उपाध्यक्ष संझा देवी ने अध्यक्ष अदिति कुमारी के विरुद्ध 22 अक्तूबर 2025 को तिरहुत (मुजफ्फरपुर) के प्रमंडलीय आयुक्त के यहां वाद दायर कर दिया.

पदमुक्त करने का अनुरोध

संझा देवी द्वारा दायर वाद में 29 मार्च 2025 तक जिला परिषद की 15 बैठकें बुलाने के विरुद्ध मात्र छह बैठकें आयोजित करने, स्थायी समिति की सामान्य बैठक (General Meeting) आयोजित नहीं करने के अलावा और कई गंभीर आरोप लगाये गये थे. उन आरोपों के आधार पर उपाध्यक्ष संझा देवी ने प्रमंडलीय आयुक्त से अध्यक्ष अदिति कुमारी को पदमुक्त (Relieved of office) करने का अनुरोध किया था. बताया जाता है कि प्रमंडलीय आयुक्त ने सीतामढ़ी के जिलाधिकारी से आरोपों की जांच करा साक्ष्य-मंतव्य के साथ रिपोर्ट मांगी थी. जिलाधिकारी ने यथा समय रिपोर्ट समर्पित कर दी. कहते हैं कि उस रिपोर्ट से प्रमंडलीय आयुक्त संतुष्ट नहीं हुए.

आरोपमुक्त कर दिया

इस बीच प्रमंडलीय आयुक्त ने उपविकास आयुक्त, जो जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (Chief Executive Officer of the Zila Parishad) होते हैं, पर टिप्पणी कर दी कि जिला परिषद की बैठक (Zila Parishad Meeting) बुलाने का अधिकार अध्यक्ष को है, पर उपविकास आयुक्त को अपने स्तर से भी बैठक के लिए पहल करनी चाहिए थी. उपविकास आयुक्त ने उस टिप्पणी का जवाब दिया. आयुक्त को बताया कि उन्हें 06 जून 2025 को जिला परिषद का प्रभार मिला. उनकी पहल पर ही जिला परिषद की एक सामान्य बैठक हुई थी. उपविकास आयुक्त ने आगे बताया कि 25 जून से 30 सितंबर 2025 तक मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चला और फिर विधानसभा का चुनाव (Assembly Election) आ गया. चुनाव में वह निर्वाची पदाधिकारी भी थे. नवंबर 2025 में चुनाव संपन्न होने के बाद 13 दिसंबर 2025 को जिला परिषद की सामान्य बैठक करायी गयी थी. कहा जाता है कि उपविकास आयुक्त के जवाब से संतुष्ट होकर आयुक्त ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया था.

आयुक्त की अनुशंसा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उपविकास आयुक्त ने प्रमंडलीय आयुक्त को भेजे प्रतिवेदन में कहा था कि उन्होंने जिला परिषद की अध्यक्ष अदिति कुमारी से बैठक बुलाने की चर्चा की थी, पर अध्यक्ष ने बाद में बैठक बुलाने की बात कह उसे टाल दिया. इस बात की तसदीक अध्यक्ष ने भी अपने जवाब में की थी. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रमंडलीय आयुक्त (Divisional Commissioner) का निर्णय आया कि अदिति कुमारी 27 दिसंबर 2021 को जिला परिषद की अध्यक्ष बनी थीं. तब से अब तक 17 के बजाय मात्र 07 बार ही बैठक आयोजित कीं, जबकि हर तीन माह पर बैठक करने की अनिवार्यता है. बिहार पंचायत राज अधिनियम (Bihar Panchayat Raj Act) की धारा 72 (1) के प्रावधान से अवगत रहने के बावजूद जिला परिषद अध्यक्ष ने जान बुझकर इस प्रावधान का उल्लंघन किया. इसे आधार बनाते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने पंचायती राज विभाग (Panchayati Raj Department) से अदिति कुमारी को अध्यक्ष पद से मुक्त करने की अनुशंसा कर दी.

कार्रवाई की आवश्यकता नहीं

यहां तक तो अध्यक्ष विरोधियों यानी जदयू के धुरंधर नेताओं की ब्यूह रचना सफल होती दिखी, लेकिन पंचायती राज विभाग ने प्रमंडलीय आयुक्त की अनुशंसा को खारिज कर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया. उपाध्यक्ष संझा देवी का वाद निरस्त हो जाने से अध्यक्ष अदिति कुमारी को बड़ी राहत मिल गयी. पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार द्वारा 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि अध्यक्ष के विरुद्ध बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 70(5) के तहत कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है. सुनवाई के दौरान अध्यक्ष अदिति कुमारी की ओर से प्रस्तुत अभिलेखों, सीतामढ़ी की जिलाधिकारी एवं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी-सह-उपविकास आयुक्त की रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के परीक्षण के बाद पंचायती राज विभाग ने पाया कि 4 जून 2022 की बैठक में 32 सदस्य उपस्थित थे तथा सर्वसम्मति से समितियों के सदस्यों का चयन किया गया था. ऐसे में अलग से मतदान की आवश्यकता नहीं थी.

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राजनीति में नया मोड़

बैठकों के आयोजन को लेकर विभाग ने पाया कि अध्यक्ष द्वारा विभिन्न अवसरों पर बैठक बुलाने के प्रयास किये गये थे, लेकिन प्रशासनिक कारणों, अधिकारियों के स्थानांतरण, विधानसभा चुनाव तथा सदस्यों के अनुरोध पर कई बैठकें स्थगित हुईं. पंचायती राज विभाग के सचिव ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों से यह प्रमाणित नहीं होता कि अध्यक्ष द्वारा जानबूझ कर अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है. इसलिए उनके विरुद्ध धारा 70(5) के तहत कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है. पंचायत राज विभाग के इस निर्णय से सीतामढ़ी जिला परिषद की राजनीति में नया मोड़ आ गया है.

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