भरत तिवारी प्रकरण : बहुत कुछ कह रही पोस्टमार्टम रिपोर्ट… रहस्य खोलेगा खोखा!

पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि भरत भूषण तिवारी को कुल पांच गोलियां लगी थीं. एनकांउटर के बाद बिलौटी गांव के प्रत्यक्षदर्शी भी ऐसी ही कुछ जानकारी दे रहे थे. खुले तौर पर कह रहे थे कि हथियार डाल देने के बाद उसे घटनास्थल पर ही एक-एक कर तीन गोलियां मारी गयीं. दो गोलियां घायलावस्था में उठा कर ले जाने के क्रम में मारी गयीं. लेकिन, प्रशासन की तरफ से सिर्फ तीन गोलियां लगने की बात कही जा रही थी.
- पांच गोलियां मारी गयी भरत तिवारी को
- जांच निष्पक्षता और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
- फोरेंसिक जांच और बैलिस्टिक मिलान से खुलेगा राज
- बन गया है राजनीति का बहुत बड़ा मुद्दा
विशेष संवाददाता
29 जून 2026
Ara: भोजपुर के बहुचर्चित व बहुविवादित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर (Bharat Bhushan Tiwari Encounter) प्रकरण की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं, इससे पुलिस की करतूतें भी उजागर होती जा रही है. परिवारजनों और प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के बयानों में यह एनकाउंटर (Encounter) फर्जी है. इसकी सत्यतता साबित करने वाले साक्ष्यों व सबूतों (Evidence) की तलाश प्रक्रियाधीन है. इस क्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-Mortem Report) के रूप में एक बड़ा सबूत सामने आया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि भरत भूषण तिवारी को कुल पांच गोलियां लगी थीं. एनकांउटर के बाद बिलौटी (Bilauti) गांव के प्रत्यक्षदर्शी भी ऐसी ही कुछ जानकारी दे रहे थे. खुले तौर पर कह रहे थे कि हथियार डाल देने के बाद उसे घटनास्थल पर ही एक-एक कर तीन गोलियां मारी गयीं. दो गोलियां घायलावस्था में उठा कर ले जाने के क्रम में मारी गयीं. लेकिन, प्रशासन की तरफ से सिर्फ तीन गोलियां लगने की बात कही जा रही थी.
पुलिस के दावे के विपरीत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति अब लगभग साफ हो गयी है. इससे पुलिस के दावे (Police claims) पर तो सवाल खड़े हो ही गये हैं, एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों की परेशानी भी बढ़ जा सकती है. इसलिए कि पुलिस के दावे के विपरीत भरत भूषण तिवारी को पांच गोलियां मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हो गयी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार एक गोली बायीं जांघ के ऊपरी हिस्से में, दूसरी उसी जांघ के मध्य भाग में, तीसरी दायीं जांघ के मध्य भाग में, चौथी उसी जांघ के बाहरी हिस्से और पांचवी बायें पैर के मध्य हिस्से में पीछे की ओर लगी. चार गोलियां शरीर को छेदते हुए बाहर निकल गयीं. एक शरीर के अंदर मिली. उसे सुरक्षित रख लिया गया. मुठभेड़ 17 जून 2026 को शाहपुर थाना (Shahpur Police Station) क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई थी. अत्यधिक रक्तस्राव (Excessive bleeding) के कारण पटना मेडिकल कालेज अस्पताल (PMCH) में इलाज (Treatment) के दौरान भरत भूषण तिवारी की मृत्यु हो गयी.

इसलिए हो रहा विरोध
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद पुलिस द्वारा बताये गये घटनाक्रम पर भी कई नये सवाल खड़े हो गये हैं. मसलन पुलिस भरत भूषण तिवारी से मुठभेड़ (Encounter) की बात कह रही है. यदि वाकई ऐसा हुआ होता तब आत्मरक्षार्थ (For self-defense) या आरोपी को रोकने के उद्देश्य से गोली चलाने और पैरों में गोली लगने से मुठभेड़ के उसके दावे को सही माना जाता. लेकिन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट कुछ और ही कह रही है. इसी तरह मुठभेड़ में एक ही व्यक्ति को कई गोलियां लगी हैं. यह भी जांच का विषय (Subject of investigation) बनता है कि आखिर किस परिस्थिति में लगातार गोलियां चलायी गयीं? पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने उस पर गोली चला दी. जवाब में उसेे भी गोलियां चलानी पड़ गयी. लेकिन, परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कुछ और ही कहना है. उनके मुताबिक भरत भूषण तिवारी ने हथियार डाल दिया था. उसके बाद उसे गोली मारी गयी. यही इस पूरे प्रकरण का मुख्य विवादित बिंदु है. राष्ट्रव्यापी विरोध (Nationwide Protest) भी इसी को लेकर हो रहा है.
पहले गोली किसने चलायी?
वैसे, मामले से जुड़े और भी अनेक सवाल हैं जो जांच की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले गोली किसने चलायी? क्या भरत भूषण तिवारी ने सच में पहले पुलिस पर गोली चलायी थी? क्या पुलिस द्वारा बल प्रयोग परिस्थितियों के अनुरूप था? इसके अलावा घटनास्थल से मिले हथियार और कारतूस की फोरेंसिक साक्ष्य (Forensic Evidence), बैलिस्टिक रिपोर्ट (Ballistic Report) और सीसीटीवी (CCTV), मोबाइल वीडियो (Mobile Vedio) या स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी ठोस साक्ष्य-सबूत (Evidence and Proof) माने जा सकते हैं. इन सबके बावजूद न्यायिक जांच आयोग (Judicial Inquiry Commission) की अंतिम रिपोर्ट से ही सच सामने आयेगा. गौर करने वाली बात है कि एनकाउंटर प्रकरण में तीन पिस्तौलें जब्त हुई हैं. उन्हें फोरेंसिक जांच (Forensic investigation) के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (Forensic Science Laboratory) को भेज दिया गया है. फोरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो जायेगा कि गोलियां किस हथियार से चली थीं. साथ ही पिस्तौलों और खोखों का बैलिस्टिक मिलान भी किया जायेगा. उन पिस्तौलों में दो पुलिस की सरकारी एवं एक भरत भूषण तिवारी का अवैध पिस्तौल है.

स्थिति तब साफ हो जायेगी
ऐसा कहा जाता है कि एनकाउंटर के दौरान शाहपुर (Shahpur) के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार (Rajesh Malakar) ने 9 एमएम की अपनी सरकारी सर्विस पिस्तौल (Service Pistal) से एक राउंड और एसटीएफ (STF) के जवान अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने 9 एमएम की ही अपनी सरकारी सर्विस पिस्तौल से चार राउंड गोलियां चलायी थीं. बताया जाता है कि इसका जिक्र प्राथमिकी में भी है. दूसरी ओर भरत भूषण तिवारी के पास से एक लोडेड अवैध पिस्तौल, दो कारतूस, दो खोखे और एक मैगजीन बरामद हुए हैं. मामले की न्यायिक जांच और पुलिस के अनुसंधान में फोरेंसिक एवं बैलिस्टिक जांच रिपोर्ट काफी मायने रखेगी. पुलिस के अधिकारियों (Police officials) का कहना है कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद एनकाउंटर से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं पर स्थिति पूरी तरह साफ हो जायेगी. रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई की दिशा तय की जा सकती है.
यह भी पढ़ें :
इंतजार करना बेहतर होगा
बहरहाल, यह मामला बिहार (Bihar) में कानून-व्यवस्था (Law and Order) और पुलिस की कथित अवांछित कार्रवाई को लेकर राजनीति का बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है. विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष का एक तबका भी न्यायिक जांच की निष्पक्षता और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है. दूसरी तरफ सरकार धैर्य रखने और न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रही है. बहुत जल्द स्थिति स्पष्ट हो जाने का भरोसा दिला रही है. विश्लेषकों की मानें, तो ऐसे में भावनाओं पर नियंत्रण रख जांच रिपोर्ट का इंतजार करना ही बेहतर होगा.

