महासंत की पुण्य स्मृति : सोनपुर में सजेगी सुरों की महफिल

अवध किशोर शर्मा
17 जुलाई 2026
Sonepur : हरिहर क्षेत्र (Harihar Kshetra) सोनपुर फिर शास्त्रीय संगीत, नृत्य और वाद्य यंत्रों की स्वर-लहरियों से गुंजायमान होगा. ब्रह्मलीन महासंत बाबा रामलखन दास जी महाराज (Baba Ramlakhan Das Ji Maharaj) की 57 वीं पुण्य स्मृति में 07 अगस्त 2026 को ‘लोक सेवा आश्रम सांस्कृतिक एवं कला मंच’ द्वारा 86वें अखिल भारतीय संगीत, वाद्य एवं नृत्य सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जायेगा. यह कार्यक्रम कला प्रेमियों के लिए किसी महापर्व से कम नहीं होगा. मौनी बाबा (Mauni Baba) के नाम से प्रसिद्ध लोक सेवा आश्रम के व्यवस्थापक संत बाबा विष्णुदास उदासीन (Saint Baba Vishnudas Udasin) के मुताबिक कार्यक्रम की शुरुआत संत रामलखन दास को ‘श्रद्धांजलि रागों’ की प्रस्तुति से होगी. इसमें देश-विदेश के दिग्गज कलाकार अपनी कला का जादू बिखेरेंगे.
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पधारेंगे बड़े-बड़े कलाकार
जयपुर (Jaipur) के पंडित रमेश मेवाल (Pandit Ramesh Mewal) और किराना घराने (Kirana Gharanas) के पंडित समीरन विश्वास (Samiran Biswas) कोलकाता (Kolkata) अपनी गायकी से सुरों का समां बांधेंगे. साथ ही डा. स्वर्णमय चक्रबर्ती, देवानन्द ठाकुर और पूर्व जिला जज दिनेश शर्मा भी उप-शास्त्रीय गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे. डा. पंडित अंकित पारीक (जयपुर) तबला और पखावज पर अपनी महारत दिखायेंगे. सुरमणि सुजॉय बोस (Sujoy Bose) अपने सितार से रागों का इंद्रधनुष रचेंगे, वहीं बंगलादेश (Bangladesh) के उस्ताद सुमन कुमार नाथ (Suman Kumar Nath) की बांसुरी गंगा-यमुनी संस्कृति का संदेश देगी. कथक की विश्वस्तरीय प्रस्तुतियों के लिए डा. तरुणा जांगिड़, झिलिक भौमिक, मंजीरा दत्ता, सतामिता कुंर और बंगलादेश से आने वाली नेहा बोस व प्रिया मैती मंच संभालेंगी. पूरे नृत्य का निर्देशन प्रख्यात गुरु पंडित अपूर्व कर करेंगे.
सुंदरकांड पाठ का आयोजन
इस भव्य आयोजन का संचालन डा. अशोक कुमार सिंह ‘गौतम’ (Dr. Ashok Kumar Singh ‘Gautam’) (आकाशवाणी,लखनऊ) करेंगे. उनके साथ आचार्य चन्द्र किशोर पराशर और अजय सिंह मंच प्रबंधन में सहयोग करेंगे. मुख्य सम्मेलन से पूर्व 01अगस्त 2026 को ब्रह्मलीन बाबा रामदास जी उदासीन की 27वीं पुण्य तिथि पर एक दिवसीय सुंदरकांड (Sundarkand) एवं रामायण पाठ (Ramayan Path) का भी आयोजन किया जायेगा. सोनपुर का यह आयोजन राजस्थान (Rajasthan) के घरानों, बंगाल की भाव-भंगिमा और बंगलादेश की बांसुरी के अनूठे मेल से पूर्वांचल के कला जगत में एक नयी ऊर्जा का संचार करेगा.
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