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MUZAFFARPUR : भू-माफियाओं का कहर… ज्यादा बंगाली परिवारों पर टूटा!

100 साल पूर्व की स्थिति यह थी कि शहर की लगभग आधी जमीन बंगाली परिवारों की हुआ करती थी. एक दशक पहले तक मुजफ्फरपुर में 600 से अधिक बंगाली परिवार बसे हुए थे. उनकी संख्या अब 50 से भी कम बच गयी है. भू-माफियाओं के बढ़ते आतंक की वजह से बुद्धिजीवी एवं सभ्य माने जानेवाला बंगाली समाज के लोग भयभीत हो शहर की अपनी सम्पत्ति औने-पौने में बेच पलायन कर गये.

  • पचास से भी कम बच गये बंगाली परिवार
  • औने-पौन में संपत्ति बेच पलायन कर गये
  • काफी चर्चित रहा नवरूणा और रंजना भादुड़ी का मामला
  • सीअीआई ने भी हाथ बांध लिये, रहस्य नहीं खुला

विशेष संवाददाता
25 जून 2026

Muzaffarpur: मुजफ्फरपुर में भू-माफियाओं का सबसे ज्यादा कहर बंगाली परिवारों पर टूटा है. इसको इस रूप में समझा जा सकता है. स्थानीय बुजुर्ग लोग बताते हैं कि 100 साल पूर्व की स्थिति यह थी कि शहर की लगभग आधी जमीन बंगाली परिवारों (Bengali Families) की हुआ करती थी. एक दशक पहले तक मुजफ्फरपुर में 600 से अधिक बंगाली परिवार बसे हुए थे. उनकी संख्या अब 50 से भी कम बच गयी है. भू-माफियाओं (Land mafias) के बढ़ते आतंक की वजह से बुद्धिजीवी एवं सभ्य माने जानेवाला बंगाली समाज (Bengali community) के लोग भयभीत हो शहर की अपनी सम्पत्ति औने-पौने में बेच पलायन कर गये. जानकारों के अनुसार शहर में प्रतिष्ठित मुखर्जी सेमिनरी (Mukherjee Seminary) नामक शिक्षण संस्थान देनेवाले इस परिवार के उत्तराधिकारी आलोक मुखर्जी को भू-माफियाओं की करतूतों से तंग आकर ही इस शहर को छोड़ना पड़ गया.

तीन बार हुई बमबारी

ऐसे ही हालात दीवान रोड (Diwan Road) निवासी अरुण मुखर्जी के समक्ष पैदा हो गये थे. उस कालखंड में डेढ़ वर्ष के अन्दर उनके घर के सामने तीन बार बमबारी हुई. सामान्य समझ में ऐसा इसलिए कि भयभीत हो वह जमीन व मकान बेचकर चले जायें. लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. मामले को पुलिस के समक्ष ले गये. तब उन्हें सुरक्षा गार्ड मिला. फिर उस भू-खंड पर ‘बिक्री के लिए नहीं’ तख्ती टांग दी. इसके बावजूद भू-माफिया की कारस्तानियों की बाबत वह मुंह खोलने से परहेज बरतते रहे. मोतीझील (Motijheel) निवासी एक बंगाली परिवार के इकलौते युवा वारिस की कुछ वर्ष पूर्व सिर्फ इस वजह से गोली मारकर हत्या कर दी कि उसने अपनी जमीन बेचने से इनकार कर दियाथा.

बहुचर्चित नवरुणा कांड

शहर के बहुचर्चित नवरुणा कांड (Navruna Case) और रंजना भादुड़ी (Ranjana Bhaduri) के सेवक राजेन्द्र राय (Rajendra Rai) की हत्या को भी भूमि विवाद से जोड़कर देखा गया. मुजफ्फरपुर के संत जेवियर्स स्कूल (St. Xavier’s School) की बारह वर्षीया छात्रा नवरुणा 16 सितम्बर 2012 की मध्य रात्रि में गायब हो गयी. लगभग 14 साल बीत जाने के बावजूद अब तक न तो उसकी बरामदगी हो पायी है और न लाश ही मिली है. इस मामले में पुलिस की जो भूमिका दिखी, उससे इस संदेह को मजबूति मिली कि मामले से जुड़े भू-माफियाओं के साथ किसी न किसी रूप से उसकी सांठ-गांठ थी. जहां तक राज्य सरकार की बात है तो वह भी इसके प्रति ज्यादा गंभीर नहीं दिखी. इतना कुछ होने के बावजूद मामले को अपराध अनुसंधान विभाग (Criminal Investigation Department) को सौंप इत्मीनान में आ गयी.

सीबीआई भी विफल रही

पुलिस नवरुणा (Navaruna) के घर के सामने के नाले से मिले एक नरकंकाल (Human skeleton) को उसी का साबित करने का उपक्रम भर करती रही. मामला नवरुणा के पिता का डीएनए टेस्ट (DNA Test) कराने के सवाल पर लंबे समय तक अटका रहा. नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती (Atulya Chakraborty) को बिहार की पुलिस पर भरोसा नहीं था. वह मामले की सीबीआई जांच (CBI investigation) कराने की मांग उठाते हुए इस बात पर अड़ गये कि डीएनए टेस्ट के लिए खून का कतरा सीबीआई को दे सकते हैं, बिहार पुलिस को नहीं. उच्च न्यायालय (High Court) अपनी निगरानी में ऐसा कराये तो वह उसके लिए तैयार हैं. उनकी जिद पर नवम्बर 2013 में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया. 2014 में उसने जांच शुरू की. छह साल तक हाथ-पांव चलाने के बाद भी निष्कर्ष सिफर रहा. अंततः 2020 में सीबीआई ने जांच बंद कर दी.

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गाज अन्य शहरों में भी गिर रही

उल्लेख्य है कि शहर के जवाहरलाल रोड (Jawaharlal Road) के चक्रवर्ती लेन में अतुल्य चक्रवर्ती की छह कट्ठा कीमती जमीन है. उस जमीन पर शहर के कई भू-माफियाओं की नजर जमी रही है. कहते हैं कि अतुल्य चक्रवर्ती ने मनोज ठाकुर से जमीन का सौदा कर लिया था और उससे 21 लाख रुपये अग्रिम भी ले चुके थे. इसी खुन्नस में दूसरे भू-माफियाओं ने उस कांड को अंजाम दे दिया. इसमें सच क्या है, सीबीआई भी इसका खुलासा नहीं कर पायी. गौर करनेवाली बात यह भी है कि बंगाली परिवारों पर ऐसी गाज सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही नहीं गिर रही है. जसीडीह, सिमुलतला, भागलपुर, पटना, मुंगेर, पूर्णिया आदि शहरों में भी उन्हें ऐसे ही हालात से रू-ब-रू होने पड़ रहे हैं.

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