Cricket : विदेशी भूमि पर बिखर गयी फिर टीम इंडिया… आखिर क्यों?

इंगलैंड और आयरलैंड दौरे की सबसे बड़ी निराशाजनक बात यह रही कि टीम इंडिया स्थिर और भरोसेमंद अंतिम एकादश तय नहीं कर पायी. लगातार बदलावों से खिलाड़ियों का मनोबल तो टूटा ही, टीम की लय भी बिगड़ गयी. कुछ मुकाबलों में ऐसा दिखा कि टीम सर्वश्रेष्ठ संयोजन की तलाश में ही भटकती रह गयी. संभवतः इन्हीं सब कारणों से शीर्ष क्रम के कई बल्लेबाज अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके. तेज गेंदबाजी और स्विंग के सामने तकनीकी कमजोरियां खुलकर सामने आ गयीं.
हार क्रिकेट की तैयारी, रणनीति व दीर्घकालिक सोच की भी
पूरी बल्लेबाजी इकाई बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर पायी
गेंदबाजी प्रभावी नहीं, क्षेत्ररक्षण भी कमजोर
सर्वश्रेष्ठ संयोजन की तलाश में भटक गयी टीम
तापमान लाइव ब्यूरो
21 जुलाई 2026
New Delhi : भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) में प्रतिभा की कमी कभी नहीं रही है. दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट ढांचे, सबसे समृद्ध बोर्ड और आईपीएल (IPL) जैसी प्रतिस्पर्धाएं लीग के आयोजन के बावजूद जब टीम इंडिया (Team India) इंगलैंड (England) और आयरलैंड (Ireland) के दौरे पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाती, तो सवाल केवल खिलाड़ियों पर नहीं उठते. यह हार भारतीय क्रिकेट की तैयारी, रणनीति और दीर्घकालिक सोच की भी पड़ताल करती है. यह सच है कि इंगलैंड और आयरलैंड की परिस्थितियां भारतीय उपमहाद्वीप से बिल्कुल अलग हैं. वहां नयी गेंद लंबे समय तक स्विंग करती है, पिचों पर सीम मूवमेंट रहता है और मौसम भी बल्लेबाजों के लिए चुनौती बढ़ा देता है. ऐसे में केवल आक्रामक बल्लेबाजी नहीं, बल्कि धैर्य, मजबूत तकनीक और परिस्थितियों के अनुरूप खेल की जरूरत होती है.
हर मामले में फिसड्डी
भारतीय बल्लेबाज (Indian batsman) कई मौकों पर इस कसौटी पर खरा नहीं उतरे. बल्लेबाजी की सबसे बड़ी समस्या निरंतरता न होना रही. शीर्ष क्रम के जल्दी आउट होने के बाद मध्यक्रम पर जरूरत से ज्यादा दबाव आ गया. कुछ व्यक्तिगत पारियों को छोड़ दें तो पूरी बल्लेबाजी इकाई बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल नहीं हुई. टेस्ट हो या सीमित ओवरों का प्रारूप, विदेशी परिस्थितियों में साझेदारियां ही जीत की नींव रखती हैं. टीम इंडिया यही आधार मजबूत नहीं कर पायी. परेशानी वाली बात यह भी रही कि गेंदबाजी भी प्रभावी नहीं रही. नयी गेंद से शुरुआती सफलता के बाद विपक्ष पर दबाव बनाये रखने में कमी दिखाई दी. बीच के ओवरों में विकेट नहीं मिलने और अतिरिक्त रन लुटाने से मैच का रुख बदलता रहा. क्षेत्ररक्षण में छूटे कैच और साधारण गलतियों से विरोधी टीमों को जीवनदान मिलता रहा.
असर पड़ना लाजिमी है
टीम चयन और रणनीति पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है. विदेशी दौरों पर केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से काम नहीं चलता, परिस्थितियों के अनुरूप संतुलित टीम और स्पष्ट भूमिका तय करनी पड़ती है. बल्लेबाजी क्रम, गेंदबाजी संयोजन या अंतिम एकादश को लेकर लगातार प्रयोग होते रहे, तो उसका असर प्रदर्शन पर पड़ना लजिमी है. इस दौरे में मिली घोर निराशा से टीम इंडिया को यह सीख लेनी होगी कि विदेशों (Foreign countries) में सफलता केवल घरेलू रिकार्ड के दम पर नहीं मिलती. इसके लिए लंबे तैयारी शिविर, अभ्यास मैच, स्विंग गेंदबाजी के खिलाफ विशेष प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों में अधिक अवसर देना आवश्यक है. हार खेल का हिस्सा होती है, लेकिन हर हार एक संदेश भी देती है. अकल्पनीय दुर्गति से भरा इंगलैंड और आयरलैंड का यह दौरा भारतीय क्रिकेट को बता गया है कि विश्व क्रिकेट में शीर्ष पर बने रहने के लिए केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि तैयारी, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और मानसिक दृढ़ता का कोई विकल्प नहीं है. यदि इन कमियों को समय रहते दूर नहीं किया गया तो विदेशी धरती पर सफलता का इंतजार और लंबा हो सकता है.
कहां चूक हुई चयन में?
इंगलैंड और आयरलैंड दौरे की सबसे बड़ी निराशाजनक बात यह रही कि टीम इंडिया स्थिर और भरोसेमंद अंतिम एकादश तय नहीं कर पायी. लगातार बदलावों से खिलाड़ियों का मनोबल तो टूटा ही, टीम की लय भी बिगड़ गयी. कुछ मुकाबलों में ऐसा दिखा कि टीम सर्वश्रेष्ठ संयोजन की तलाश में ही भटकती रह गयी. संभवतः इन्हीं सब कारणों से शीर्ष क्रम के कई बल्लेबाज अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके. तेज गेंदबाजी और स्विंग के सामने तकनीकी कमजोरियां खुलकर सामने आ गयीं. मध्यक्रम भी दबाव में मैच को संभालने में सफल नहीं रहा. गेंदबाज भी नयी गेंद के मौकों को लंबे समय तक भुनाने में विफल रहे. डेथ ओवरों में खूब रन लुटाये. क्षेत्ररक्षण में छूटे कैच ने स्थिति को और दयनीय बना दिया.
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आत्मविश्वास प्रभावित हुआ
कुछ खिलाड़ियों ने कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष का जज्बा दिखाया. कप्तान शुभमन गिल (Captain Shubman Gill) ने कई मौकों पर जिम्मेदारी निभायी, जबकि रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने इंगलैंड के खिलाफ अंतिम वनडे में शतक लगाकर साबित किया कि बड़े मैचों में उनका अनुभव अब भी टीम की ताकत है. कुछ युवा खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. लेकिन, उन्हें निरंतर अवसर नहीं मिले. इस दौरे का सबसे विवादित पहलू अंतिम एकादश का चयन रहा. इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में भी कुलदीप यादव (Kuldeep Yadav) को एक भी वनडे में मौका नहीं दिया गया. यह लगातार चर्चा का विषय बना. पूर्व क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने भी कहा कि बार-बार बाहर बैठाये जाने से खिलाड़ी का आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है. कप्तान शुभमन गिल को इस फैसले का बचाव करना पड़ गया.
खिलाड़ियों की उपेक्षा
टी-20 श्रृंखला में भी लगातार प्रयोग हुए. संजू सैमसन, वैभव सूर्यवंशी और अन्य खिलाड़ियों को लेकर टीम प्रबंधन (Team management) ने कई बदलाव किये, लेकिन इन प्रयोगों से स्थिरता नहीं आयी. विशेषज्ञों का मानना है कि जब टीम संयोजन लगातार बदलता है, तो खिलाड़ियों की भूमिका भी स्पष्ट नहीं रह जाती. इस दौरे के बाद सबसे अधिक चर्चा कुलदीप यादव को लेकर हुई, जिन्हें पूरे वनडे दौरे में मौका नहीं मिला. टी-20 में भी कुछ युवा खिलाड़ियों को सीमित अवसर मिले या बीच शृंखला में बाहर कर दिया गया.
जरूरत से ज्यादा प्रयोग
इससे यह बहस तेज हुई कि क्या चयन प्रदर्शन के आधार पर हो रहा है या टीम प्रबंधन जरूरत से ज्यादा प्रयोग कर रहा है. इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि टीम इंडिया का इंगलैंड और आयरलैंड दौरा खिलाड़ियों की विफलता की कहानी भर नहीं है. यह चयन नीति, टीम प्रबंधन की रणनीति और परिस्थितियों के अनुरूप अंतिम एकादश तय करने में हुई चूक का निंदनीय दस्तावेज भी है. यदि विश्व कप जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करना है, तो प्रतिभा के साथ-साथ चयन में स्पष्टता, खिलाड़ियों पर भरोसा और स्थिर टीम संयोजन भी उतना ही जरूरी होगा
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