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Sawan Special : सुरों की फुहार … रिमझिम गिरे सावन, टिप टिप बरसा पानी…

तापमान लाइव ब्यूरो
22 जुलाई 2026
Mumbai : सावन (Sawan) में बरसात (Barsaat) की पहली बूंद गिरते ही छत पर रखी मटकी की तरह मन भी टप-टप करने लग जाता है और कान बरसात के गीत ढूंढने लग जाते हैं. हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) ने बरसात को सिर्फ मौसम नहीं, एक जज्बा बना दिया है. कभी रोमांस की चाशनी, कभी जुदाई का दर्द, तो कभी मस्ती की अठखेलियां- हर रंग बारिश के साथ पर्दे पर उतरा है. पहले थोड़ा अतीत में चलते हैं.1950 के दशक में जब फिल्म ‘बरसात’ आयी, तो शीर्षक गीत ‘बरसात में हमसे मिले तुम…’ ने लोगों के दिलों में पहली फुहार गिरायी. राज कपूर (Raj Kapoor) और नरगिस (Nargis) छाते के नीचे भीगे और लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज ने साबित कर दिया कि बारिश सिर्फ भीगने का नहीं, महसूस करने का नाम है.

कुछ समय बाद ‘श्री 420’ का ‘प्यार हुआ इकरार हुआ…’ आया. मुंबई की सड़कों पर छाता लिए नरगिस व राजकपूर की वो रात आज भी हर जोड़े का सपना है. शंकर जयकिशन (Shankar-Jaikishan) के संगीत और शैलेन्द्र (Shailendra) के बोल ने बारिश को मोहब्बत (Love) की पहली दस्तक बना दिया. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) और मौसमी चटर्जी (Moushumi Chatterjee) पर फिल्माया ‘रिमझिम गिरे सावन…’ आज भी बरसात की पहचान है. आर.डी. बर्मन (R.D. Burman) की धुन और किशोर कुमार (Kishore Kumar) एवं लता मंगेसकर (Lata Mangeshkar) की जुगलबंदी ने इस गीत को अमर कर दिया.

मुंबई की बारिश में टैक्सी के भीतर बैठे दो अजनबी जब भीगते हैं, तो लगता है पूरा शहर गा रहा है. इसी दौर में ‘घर’ (Ghar) फिल्म का ‘आज कल पांव जमीं पर नहीं पड़ते…’ आया. रेखा (Rekha) और विनोद मेहरा (Vinod Mehra) की नोक-झोंक, गुलजार के बोल और बूंदों की ताल-सब कुछ इतना सच्चा कि आज भी पहली बारिश में लोग यही गुनगुनाते हैं. ‘मिस्टर इंडिया’ (Mr. India) का ‘काटे नहीं कटते ये दिन ये रात..’ याद है! श्रीदेवी (Sridevi) नीली साड़ी में, बारिश की बूंदें और मोगैम्बो का खौफ- कान्ट्रास्ट का ऐसा संगम फिर नहीं बना. सरोज खान (Saroj Khan) की कोरियोग्राफी ने बता दिया कि बारिश में नृत्य सिर्फ रोमांस नहीं, सशक्त अभिव्यक्ति भी है.

नब्बे का दशक आया तो बारिश और भी रंगीन हो गयी. ‘मोहरा’ (Mohra) का ‘टिप टिप बरसा पानी…’ रवीना टंडन (Raveena Tandon) की पीली साड़ी और अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के साथ बारिश में भीगने का पर्याय बन गया. उदितनारायण (Udit Narayan) और अलका याग्निक (Alka Yagnik) की आवाज, विजू शाह (Viju Shah) का संगीत. हर डिस्को में यह गाना बजता, तो लोग नाचने पर मजबूर हो जाते. ‘1942 ए लव स्टोरी’ (1942: A Love Story) का ‘रिमझिम रिमझिम…’ हो या ‘ताल’ का ‘रमता जोगी…’, ए.आर. रहमान ने बारिश को नया साउंड दिया. ‘ताल’ का टाइटल ट्रैक तो झील, जंगल और बारिश को एक साथ पिरो देता है. ‘दिल तो पागल है’ का ‘कोई लड़की है…’ बारिश में छुपा मस्ती भरा इकरार है. माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit), करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor) और शाहरुख खान (Shahrukh Khan) तीनों भीगते हैं, नाचते हैं और दर्शक मुस्कुराते हैं. श्यामक डावर की कोरियोग्राफी ने छाते को भी डांस प्रॉप बना दिया.

‘लगान’ (Lagan) का ‘घन घनन…’ सूखे खेतों पर पहली बारिश की दुआ है. ए.आर. रहमान ने लोक गीत (Folk song) और शास्त्रीय गायन (Classical singing) को मिलाकर ऐसा गीत रचा कि किसान हो या शहर वाला, सबकी आंखें भर आयीं. ‘गुरु’ का ‘बरसो रे…’ ऐश्वर्या राय (Aishwarya Rai) की मस्ती और गांव की मिट्टी की सोंधी खुशबू एक साथ लेकर आता है. ‘जब वी मेट’ का ‘ये इश्क हाय…’ बर्फ और बारिश के बीच करीना कपूर (Kareena Kapoor) की शरारत है. ‘अशोका’ का ‘रात का नशा…’ भले रात की बात करे, पर बैकग्राउंड में गिरती बारिश सीन को नशा देती है. ‘रन’ का ‘चले जैसे हवाएं…’ हो या ‘वेक अप सिड’ का ‘इकतारा…’, नये दौर ने बारिश को सुकून का नाम दे दिया. भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी में ये गाने दो पल का ठहराव बन गये.

बरसात के गीत सिर्फ अभिनेता-अभिनेत्री के भीगने तक सीमित नहीं. ‘प्यासा’ (Pyasa) का ‘आज सजन मोहे अंग लगा ले…’ बारिश में विरह का दर्द है. ‘सुजाता’ का ‘बचपन के दिन भी क्या दिन थे…’ बारिश में भीगते बचपन की याद दिलाता है. ‘तुम्हारी सुलु’ का ‘बन जा तू मेरी रानी…’ बारिश में भीगते हुए प्रपोज करने का नया तरीका है. ‘काई पो चे’ का ‘मीठी बोलियां…’ दोस्ती और बारिश को एक साथ लाता है. संगीतकारों ने बारिश को हमेशा अलग तरह से सुना. नौशाद ने ‘मुगल-ए-आज़म’ (Mughal-e-Azam) में ‘प्रेम जोगन बन के…’ में बूंदों को तबले की थाप बनाया. आर.डी. बर्मन ने ‘अमर प्रेम’ में ‘रैना बीती जाये…’ में बारिश को इंतजार का साथी बनाया. इलैयाराजा ने ‘सदमा’ में ‘ऐ जिंदगी गले लगा ले…’ में बारिश को जिंदगी का दूसरा मौका बना दिया.

आज जब ओटीटी का दौर है, तब भी ‘लूडो’ का ‘अब तोहरे बिन जिया ना जाये…’ हो या ‘शेरशाह’ का ‘रातां लम्बियां …’ का अनप्लग्ड वर्जन-बारिश बैकग्राउंड में जरूर होती है. मानसून सिर्फ मौसम नहीं, मन की अवस्था है. हिंदी सिनेमा ने हमें हर मूड का गीत दिया है. कभी छत पर चाय के साथ ‘रिमझिम गिरे सावन…’ सुनिये, कभी लान्ग ड्राइव पर ‘बरसो रे…’ बजाइये, तो कभी खिड़की से बाहर देखते हुए ‘घनन घनन…’ पर आंख बंद कीजिये. क्योंकि फिल्मों ने सिखाया है- बारिश में भीगना जरूरी नहीं, महसूस करना जरूरी है. तो इस सावन भी बादल गरजेंगे, बूंदें गिरेंगी और किशोर कुमार से अभिजीत तक, लता मंगेसकर से श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) तक- सब आपके कानों में रिमझिम कर जायेंगे.

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