Bihar Politics सीतामढ़ी- शिवहर : राजद झटका खाया, कमल मुस्कुराया!

अर्जुन राय और रितु जायसवाल दोनों का भाजपा में आना भाजपा के लिए अवसर भी है और संगठनात्मक परीक्षा भी. भाजपा इनके जनाधार को अपने जनाधार में समाहित कर लेती है तो लाभ बहुत बड़ा होगा. दोनों को केवल चेहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया, तो सीमित लाभ ही मिल सकता है.
रितु जायसवाल के बाद अर्जुन राय भी हो गये भाजपाई
दोनों थे संसदीय चुनाव के दूसरे स्थान वाले मजबूत चेहरे
सीतामढ़ी-शिवहर में मिल सकती है भाजपा को मजबूती
पूर्व लोक अभियोजक विमल शुक्ला भी हो गये भाजपा के
मदनमोहन ठाकुर
31 जुलाई 2026
Sitamarhi : हाल के दिनों में सीतामढ़ी – शिवहर (Sitamarhi – Sheohar) की राजनीति में काफी उलटफेर हुआ है. वैसे तो राजनीति (Politics) में कभी भी कुछ भी हो सकता है. इसके बावजूद इसे आश्चर्यजनक उलटफेर कहा जा सकता है. उलटफेर यह हुआ है कि 2024 के संसदीय चुनाव (parliamentary elections) में सीतामढ़ी से राजद (RJD) के उम्मीदवार रहे अर्जुन राय (Arjun Rai) और शिवहर (Sheohar) से राजद की उम्मीदवार रहीं रितु जायसवाल (Ritu Jaiswal) का अलग – अलग तारीख में भाजपा (BJP) से जुड़ाव हो गया है. अर्जुन राय (Arjun Rai) 27 जुलाई 2026 को भाजपा में शामिल हुए, रितु जायसवाल मई 2026 में ही भाजपा की हो चुकी थीं. यह जुड़ाव महज दो नेताओं का दल-बदल नहीं है, बल्कि इसके कई मायने हैं. संसदीय चुनाव में राजद के उम्मीदवार के तौर पर दोनों ने भाजपा के सहयोगी दल जदयू (JDU) के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दी थी. मामूली अंतर से मात खाये थे.
प्रभावित करने वाला घटनाक्रम
सीतामढ़ी में अर्जुन राय को 04 लाख 64 हजार 363 मत मिले थे. इसके बाद भी जदयू के देवेश चंद्र ठाकुर (Devesh Chandra Thakur) से 51 हजार 356 मतों से पिछड़ गये थे. शिवहर में रितु जायसवाल को 04 लाख 47 हजार 469 मत मिले और वह जदयू की ही लवली आनंद (Lovely Anand) से 29 हजार 243 मत पीछे रह गयी थीं. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों राजद के ऐसे उम्मीदवार थे जिन्हें जनता ने पूरी तरह खारिज नहीं किया था. वे दूसरे स्थान वाले मजबूत चेहरे थे. ऐसे में भाजपा से उनके जुड़ने को सीतामढ़ी-शिवहर के राजनीतिक समीकरण को गहराई तक प्रभावित करने वाला घटनाक्रम माना जा सकता है.
भाजपा को मिला चुनावी चेहरा
पूर्व सांसद अर्जुन राय का मामला थोड़ा अलग है. वह राजद का उम्मीदवार बनने से पहले जदयू में थे. भाजपा में शामिल होने से पहले राजद नेतृत्व और तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल विचार से दूर चली गयी है. भाजपा में उनका प्रवेश सीतामढ़ी के उस हिस्से में उसकी पहुंच बढ़ा सकता है जहां उसका प्रभाव अभी मुख्यतः एनडीए (NDA) के घटक दलों के माध्यम से है. अर्जुन राय का प्रभाव सीतामढ़ी संसदीय क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है. माना जाता है कि मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले के औराई (Aurai) विधानसभा क्षेत्र में भी उनका ठोस राजनीतिक आधार है.

ये सब भी शामिल हुए
अर्जुन राय के भाजपा में आने से औराई तथा सीतामढ़ी संसदीय क्षेत्र में पार्टी को मजबूती मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसको इस रूप में भी समझा जा सकता है कि उस दिन अर्जुन राय के साथ सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिलों के सात जिला पार्षद, सात प्रखंड प्रमुख और नौ पूर्व प्रखंड उप प्रमुखों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की. भाजपा को मजबूती कभी कांग्रेस और फिर जदयू से जुड़े रहे सीतामढ़ी के पूर्व लोक अभियोजक (Public Prosecutor) विमल शुक्ला (Vimal Shukla) के जुड़ने से भी मिली. प्रदेश भाजपा कार्यालय में 28 जुलाई 2026 को आयोजित मिलन समारोह में विमल शुक्ला के साथ युवा नेता चंदन कुमार ठाकुर (Chandan Kumar Thakur) भी भाजपा में शामिल हो गये.
यह पहचान भी है रितु जायसवाल की
शिवहर संसदीय क्षेत्र में रितु जायसवाल का असर और ज्यादा गहरा है. रितु जायसवाल की ताकत पार्टी संगठन से ज्यादा व्यक्तिगत जनसंपर्क और स्थानीय पहचान रही है. 2024 में शिवहर संसदीय क्षेत्र की मामूली हार की तरह 2020 के विधानसभा चुनाव में सीतामढ़ी जिले के परिहार में राजद उम्मीदवार के ही रूप में 02 हजार 669 मतों से हार गयी थीं. 2025 में परिहार से राजद की उम्मीदवारी नहीं मिली. रितु जायसवाल निर्दलीय चुनाव लड़ गयीं. कामयाबी जीत के रूप में नहीं, राजद प्रत्याशी स्मिता गुप्ता को तीसरे स्थान पर पहुंचा देने के रूप में मिली. जीत भाजपा की गायत्री देवी की हुई. रितु जायसवाल प्रखर महिला नेता हैं. भाजपा उनकी इस काबिलियत का राजनीतिक फायदा उठा सकती है.
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अवसर भी है और परीक्षा भी.
बहरहाल, अर्जुन राय और रितु जायसवाल दोनों का भाजपा में आना भाजपा के लिए अवसर भी है और संगठनात्मक परीक्षा भी. भाजपा इनके जनाधार को अपने जनाधार में समाहित कर लेती है तो लाभ बहुत बड़ा होगा. दोनों को केवल चेहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया, तो सीमित लाभ ही मिल सकता है. वैसे, इसका दूसरा पहलू भी है. इस रूप में आयातित नेताओं को भाजपा में बहुत महत्व दिया गया, तो पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हो सकता है. चुनावों में इसका नुकसान उठाना पड़ जा सकता है.

मदनमोहन ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार हैं
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