महागठबंधन : बढ़ रहा सीटों को लेकर झमेला

विकास कुमार
31 जुलाई 2025
PATNA : गैरमौजूदगी का कारण जो रहा हो, महागठबंधन की समन्वय समिति की बुधवार की बैठक में वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी (VIP Chif Mukesh Sahni) के शामिल नहीं होने से उनके भविष्य की राजनीति की बाबत अनेक तरह के कयास लगाये जाने लगे हैं. देर सवेर महागठबंधन (Mahagathbandhan) से अलग हो जाने की आशंका को भी मजबूती मिल रही है. वैसे भी राजनीति महसूस कर रही है कि सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन में असहज स्थिति बनी हुई है. इसके कई कारण बताये जा रहे हैं.
दावेदारी पहाड़ जैसी
राजनीति में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति को मालूम है कि 2020 में महागठबंधन में मात्र पांच घटक थे. अभी उनकी अघोषित संख्या आठ हो गयी है. मुश्किल इस बढ़ी संख्या से नहीं, कुछ दलों की बेहिसाब दावेदारी से खड़ी हो गयी है. राजनीति देख-सुन रही है कि एक-दो को छोड़ सबकी दावेदारी पहाड़ जैसी है जबकि हैसियत उनकी छटांक भर भी नहीं है. ऐसे में खिचखिच स्वाभाविक है. उनकी बड़ी महत्वाकांक्षाओं के कारण कलह का विस्तार भी होता दिख रहा है. वर्तमान में महागठबंधन में राजद (RJD), कांग्रेस (Congress), भाकपा-माले (CPI-ML), भाकपा (CPI), माकपा और वीआईपी (CPI(M) and VIP) अधिकृत घटक हैं. रालोजपा और झामुमो (RLJP and JMM) को सहयोगी दल माना जा रहा है.
दबाव बनाने की चाल
विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों दलों के जुड़ाव से महागठबंधन में सीट बंटवारे का मुद्दा कुछ ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है. कांग्रेस 2020 की तरह इस चुनाव में भी 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारने पर अड़ी हुई है. 2020 में 70 में से सिर्फ 19 पर उसकी जीत हुई थी. वीआईपी की मांग 60 सीटों की है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ऐलानिया तौर पर कह रहे हैं कि वीआईपी 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी ही. आगे क्या होगा यह अभी नहीं कहा जा सकता, फिलहाल उनके इस ऐलान से महागठबंधन में नया झमेला तो खड़ा हो ही गया है.
शह मिल रही राजद की
वैसे, राजनीतिक हलकों में वीआईपी की 60 सीटों की दावेदारी को कांग्रेस पर दबाव बनाने की चाल के तौर पर भी देखा जा रहा है. बताया जाता है कि राजद की रणनीति कांग्रेस को 50 सीटों के आसपास समेट देने की है. महागठबंधन में विधायक संख्या बल के आधार पर कांग्रेस के बाद भाकपा-माले बड़ी पार्टी है. उसकी दावेदारी 45 सीटों की है. बताया जाता है कि भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य (Dipankar Bhattacharya) ने सीटों की सूची महागठबंधन के संयोजक तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) को सौंप दी है. उसकी इतनी बड़ी दावेदारी का आधार 2020 का बेहतरीन स्ट्राइक रेट है. 2020 में 19 सीटों पर उम्मीदवार उतार उसने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी.

भाकपा को आपत्ति
लेकिन, चर्चा यह भी है कि सीटों के मामले में कांग्रेस को औकात में रखने के लिए उसकी दावेदारी को भी राजद की शह मिली हुई है. सच क्या है यह नहीं कहा जा सकता. भाकपा-माले की दावेदारी पर दूसरे दलों को छोड़िये, भाकपा को ही आपत्ति है. बिहार में वामदलों में संभवतः वह खुद को सबसे बड़ी पार्टी मानती है. बिहार भाकपा के सचिव रामनरेश पांडेय (Ramnaresh Pandey) के इस कथन से तो ऐसा ही झलकता है. उनके मुताबिक 2020 में भाकपा-माले को 19 सीटें मिली थीं तो भाकपा को उससे एक अधिक यानी 20 मिलनी चाहिये थी. भाकपा के महासचिव डी राजा (D. Raja) ने इस बार महागठबंधन को 24 सीटों की सूची सौंपी है. 2020 में भाकपा और माकपा के हिस्से में क्रमशः छह और चार सीटें थीं. जीत दो-दो पर हुई थी.

रालोजपा का कोई दावा नहीं
इन सबसे अलग रालोजपा की कोई दावेदारी नहीं है. रालोजपा सुप्रीमो पशुपति कुमार पारस (Pashupati Kumar Paras) का कहना है कि जो मिल जायेगा पार्टी उसे स्वीकार कर लेगी. मुख्य लक्ष्य महागठबंधन की सरकार बनाना है. उधर झामुमो ने 12 सीटों का दावा पेश कर रखा है. महागठबंधन के मुख्य घटक राजद (RJD) की बात करें तो 2020 में उसके 144 उम्मीदवार थे. 75 पर जीत हुई थी. इस बार घटक दलों के दावों के अनुरूप सीटें बांट दी गयीं तब राजद (RJD) के हिस्से में कांग्रेस और वीआईपी से भी कम सिर्फ 48 सीटें रह जायेंगी. लेकिन, वैसा होगा नहीं. राजद के सूत्रों की मानें तो बंटवारे को लेकर जो फार्मूला विचाराधीन है उसके मुताबिक राजद को 141 कांग्रेस को 55, भाकपा-माले को 20, भाकपा को 06, माकपा को 04, वीआईपी को 12, रालोजपा को 03 और झामुमो को 02 सीटें मिल सकती हैं. महागठबंधन की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों की समझ है कि थोड़ा बहुत उलटफेर के साथ सीटों का बंटवारा इसी हिसाब से हो सकता है.
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