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बेगूसराय : लग न जाये ग्रहण उम्मीदवारी पर

विनोद कर्ण
22 सितम्बर 2025

Begusarai : बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में तूफान पूर्व वाली शांति छायी हुई है. सरसरी तौर पर सियासी हलचलें कुछ जरूर दिख रही हैं, पर राजनीति में रुचि रखने वाले लोग महसूस कर रहे हैं कि एनडीए (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) दोनों के अंदर ऐसा कुछ जरूर खदबदा रहा है, जो आने वाले दिनों में तूफान खड़ा कर दे सकता है. उस तूफान से एनडीए या महागठबंधन को नफा-नुकसान हो या न हो, जन सुराज पार्टी (Jan Suraj Party) उसका इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रही है. विशेष कर भाजपा में आशंकित जलजला का इंतजार. बेगूसराय की राजनीति पर गहरी नजर रखने वालों की मानें, तो जन सुराज पार्टी इसी जलजला से उम्मीदवार रूपी मोती निकाल लेने के जुगाड़ में है.

चर्चा है कि जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी की घोषणा भाजपा (BJP) के उम्मीदवार चयन के बाद की जा सकती है. तर्क यह कि भाजपा में दावेदारों की लंबी कतार है. उम्मीदवारी किसी एक को मिलेगी. बचे दावेदारों में से जन सुराज पार्टी स्वच्छ छवि वाले उस नेता को अपनी उम्मीदवारी दे देगी जिसकी आम मतदाताओं में गहरी पैठ होगी. ऐसे दो-तीन नेताओं के नाम खासे चर्चा में हैं. एनडीए में बेगूसराय की सीट भाजपा के ही हिस्से में रहेगी. विधायक कुंदन कुमार (MLA Kundan Kumar) की उम्मीदवारी का दुहराव होगा ही, आश्वस्त वह खुद भी नहीं हैं. वैसे, वह बेगूसराय के भाजपा सांसद केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) के खासमखास हैं. इसलिए निराश नहीं हैं. उन्हें यह अच्छी तरह मालूम है कि गिरिराज सिंह की सहमति से ही इस क्षेत्र के उम्मीदवार का चयन होना है. उनकी हैसियत पर उन्हें पूरा भरोसा है. संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै…

लेकिन, बेगूसराय से भाजपा की उम्मीदवारी की चाहत रखने वाले अन्य नेताओं की समझ में न संकट टलने वाला है और न पीड़ा मिटने वाली है. भाजपा कार्यकर्ताओं में उफना रहे असंतोष के सामने गिरिराज सिंह के प्रभाव के भी निस्तेज हो जाने का खतरा बराबर का बना हुआ है. गिरिराज सिंह भी संभवतः इस हकीकत को समझ रहे होंगे कि ज्यादा जोर लगाने पर यह सीट भाजपा के हाथ से फिसल जा सकती है. कलंक उनके माथे लग जा सकता है. ऐसे में वह तटस्थ रहना ज्यादा पसंद करेंगे. भाजपा नेतृत्व को विधायक कुंदन कुमार के खिलाफ कार्यकर्ताओं में गहराये असंतोष का अहसास तकरीबन आठ माह पूर्व ही हो गया था. 09 फरवरी 2025 को भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े (Vinod Tawde) बेगूसराय आये थे.

उस दिन प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ उन्होंने बैठक की थी. उस बैठक में कार्यकर्ताओं ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा था जिसमें विधायक कुंदन कुमार के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं में ही नहीं, आम मतदाताओं में गहराये गुस्से का पूरा ब्योरा था. ज्ञापन में विधायक के क्षेत्र में समय नहीं देने, पटना (Patna) में विधायक आवास न ले सरकार से मकान भाड़ा उठाने, इससे पटना में रुकने वाले कार्यकर्ताओं को असुविधा होने, बेगूसराय आवास पर किसी से नहीं मिलने व ऐच्छिक अनुशंसित राशि से योजना का कार्य अपने खासमखास से कराने के आरोप थे. हालांकि, असंतोष के उस विस्फोट के बाद कुंदन कुमार के चाल-ढाल में कुछ सुधार दिख रहा है, पर सामान्य धारणा में अहंकार पूर्व की तरह ही छाया हुआ है.

कार्यकर्ताओं में नाराजगी 07 सितंबर 2025 को आयोजित बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र के एनडीए कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में भी दिखाई दी. लोगों ने देखा कि सम्मेलन में कार्यकर्ताओं से अधिक जीविका दीदियां थीं. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा का विषय बना रहा. इसी बीच 16 सितम्बर 2025 को केन्द्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) का बेगूसराय आगमन हुआ. अमित शाह भाजपा कार्यकर्ताओं में एकजुटता का मंत्र तो फूंक गये, पर वह कितना प्रभावी होगा, यह कहना कठिन है. वैसे, सिर्फ भाजपा में ही नहीं, कांग्रेस (Congress) में भी उलटफेर की संभावना बड़ा आकार लिये हुए है.

विश्लेषकों की समझ है कि 2015 में विधायक निर्वाचित हुईं और 2020 में 04 हजार 554 मतों से पिछड़ गयीं अमिता भूषण (Amita Bhushan) की कांग्रेस की उम्मीदवारी पर इस बार ग्रहण लग जाये तो वह अचरज की कोई बात नहीं होगी. यह आशंका 2020 में निर्दलीय (independent) प्रत्याशी के तौर पर 18 हजार 002 मत बटोर लेने वाले राजेश कुमार उर्फ राजेश मुखिया (Rajesh Kumar alias Rajesh Mukhiya) के कांग्रेस में शामिल हो जाने से पैदा हुई है. कभी जदयू (JDU) में रहे राजेश कुमार उर्फ राजेश मुखिया ने 21 सितंबर 2025 को बेगूसराय के खातोपुर में आयोजित अतिपिछड़ा सम्मेलन में कांग्रेस की सदस्यता ली. इस सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम (Rajesh Ram) , कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान (Shakeel Ahmed Khan) आदि शामिल हुए. पूर्व विधायक अमिता भूषण की भी बुलंद मौजूदगी रही.

कहते हैं कि कांग्रेस में राजेश कुमार उर्फ राजेश मुखिया की उम्मीदवारी की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है. कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष तर्क रखा जा रहा है कि राजेश कुमार उर्फ राजेश मुखिया निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 18 हजार 002 मत ला सकते हैं तो महागठबंधन के कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर आसानी से चुनाव जीत ले सकते हैं. राजेश कुमार उर्फ राजेश मुखिया को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से क्या आश्वासन मिला है, यह नहीं मालूम. वैसे, कुछ न कुछ तो ऐसा जरूर कहा गया होगा तभी तो वह कांग्रेस में शामिल हुए हैं. जो हो, महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में रहेगी. फिलहाल यही माना जा सकता है कि उम्मीदवारी पूर्व विधायक अमिता भूषण को मिलेगी. आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा.