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बिहार प्रदेश भाजपा : गणित बैठाते रह गये सवर्ण

विजय कुमार सिन्हा ही थे, जिन्होंने केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष संजय सरावगी की काबिलियत, मेहनत को कारगर ढंग से पेश किया. विजय-संजय की जुगलबंदी बहुत ही पुरानी है. दोनों सुशील कुमार मोदी की पाठशाला से दीक्षा लेकर निकले थे. संजय सरावगी दरभंगा नगर मंडल के अध्यक्ष होते थे और विजय कुमार सिन्हा पटना में लोकनायक मंडल के अध्यक्ष थे. इस रिश्ते में हमेशा गर्मी बनी रही.

अक्षय आकाश
06 जनवरी 2026

Patna : नवनियुक्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष (State BJP President) संजय सरावगी (Sanjay Saraogi) को पता है कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) को छोड़ बिहार के अधिकतर वरीय भाजपा (BJP) नेता इस बार किसी सवर्ण को अध्यक्ष बनवाने के पैरोकार थे. मंगल पाण्डेय (Mangal Panday) के बाद किसी सवर्ण को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया गया. पूर्व मंत्री नीतीश मिश्र (Nitish Mishra) और बैकुंठपुर (Baikunthpur) के विधायक एवं पूर्व प्रदेश महामंत्री मिथिलेश तिवारी का नाम सबसे आगे चल रहा था. राजपूत (Rajput) लॉबी दबी जुबान से सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (Janardan Singh Sigriwal) का नाम ले रही थी. परन्तु. नीतीश मंत्रिमंडल में चार राजपूत मंत्री और विधान परिषद (Legislative Council) में सभापति के आसन पर अवधेश नारायण सिंह (Awadhesh Narayan Singh) के होते, किसी राजपूत को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपने की बात पर विचार ही नहीं किया गया. जाले (Jale) के विधायक एवं पूर्व मंत्री जीवेश कुमार मिश्र (Jeevesh Kumar Mishra) के नाम पर भी मंथन चला.

सम्राट चौधरी की थी यह इच्छा

अंदर-अंदर नवादा (Navada) के भाजपा सांसद विवेक ठाकुर (Vivek Thakur) के समर्थक भी सपना देख रहे थे. दलित समाज से जनक राम और शिवेश राम का नाम चर्चा में था. सम्राट चौधरी दरभंगा (Darbhanga) के सांसद गोपालजी ठाकुर (Gopalji Thakur) को अध्यक्ष बनवाना चाहते थे. कहा ऐसा भी गया कि डा. दिलीप जायसवाल (Dr. Dilip Jaiswal) और डा. संजय जायसवाल (Dr. Sanjay Jaiswal) जैसे नेता अध्यक्ष पद पर किसी वैश्य को देखना नहीं चाहते थे. ऐसा नहीं है कि बिहार भाजपा में संजय सरावगी के चाहने वाले नहीं हैं या वह अकेले पड़ जायेंगे. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय समेत सभी शीर्ष नेताओं ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया है.

जुगलबंदी बहुत पुरानी है

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा तो उन्हें बधाई देने पैदल ही चल पड़े. कहते हैं कि वह विजय कुमार सिन्हा ही थे, जिन्होंने केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष संजय सरावगी की काबिलियत, मेहनत को कारगर ढंग से पेश किया. विजय-संजय की जुगलबंदी बहुत ही पुरानी है. दोनों सुशील कुमार मोदी की पाठशाला से दीक्षा लेकर निकले थे. संजय सरावगी दरभंगा नगर मंडल के अध्यक्ष होते थे और विजय कुमार सिन्हा पटना में लोकनायक मंडल के अध्यक्ष थे. इस रिश्ते में हमेशा गर्मी बनी रही.

भुलाया नहीं जा सकता

विजय कुमार सिन्हा जब बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गये थे, दोनों के बीच का रिश्ता प्रगाढ़ हुआ था. बिहार विधानसभा के इतिहास में वर्ष 2022 के उस वाकया को भुलाया नहीं जा सकता है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा अध्यक्ष पर उबल पड़े थे. उस विवाद में संजय सरावगी अहम किरदार थे. लखीसराय (Lakhisarai) क्षेत्र में 9 लोगों की हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया था. विजय कुमार सिन्हा के क्षेत्र का सवाल संजय सरावगी ने ही उठाया था. अनुमान लगाया जा सकता है कि दोनों के बीच कितनी प्रगाढ़ता थी.

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नहीं कर पायेगा कोई हस्तक्षेप

विजय कुमार सिन्हा ने कहा था-ये मेरे क्षेत्र का मामला है. जब भी इलाके में जाता हूं, लोग सवाल पूछते हैं कि थाना प्रभारी और डीएसपी की बात नहीं कह पा रहे हैं. मुख्यमंत्री उबल पड़े. विजय कुमार सिन्हा की ओर इशारा करते हुए कहा कि संविधान का खुलेआम उल्लंघन हो रहा. विजय कुमार सिन्हा ने भी तंज कसा, आप ही बोलिये, जैसे आप कहेंगे, वैसे ही चलेगी. इसका मतलब यह नहीं है कि विजय कुमार सिन्हा जैसा कहेंगे, संजय सरावगी वैसा ही करेंगे. दोनों में से किसी की ऐसी फितरत नहीं है. दोनों सुलझे हुए नेता हैं. प्रदेश भाजपा के कार्यकलापों में कोई नेता चाहकर भी ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा.

(अक्षय आकाश प्रतिभाशाली युवा पत्रकार हैं)

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