बिहार प्रदेश भाजपा : नजर अब प्रदेश कमेटी पर

कहा जा सकता है कि प्रदेश भाजपा में अब भी सम्राट चौधरी का ही दबदबा है. भाजपाइयों का ही मानना है कि सम्राट चौधरी के माध्यम से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह भी पटना में अपने मोहरे सजाते रहे हैं. कहा तो यह भी गया कि सुशील कुमार मोदी की कोर कमेटी के राधामोहन सिंह ने सम्राट चौधरी को समझाया कि सामने की बाधाएं दूर करने के लिए नित्यानंद राय की घेराबंदी करनी ही पड़ेगी.

अक्षय आकाश
07 जनवरी 2026
PATNA: ऐसा माना जा रहा है कि खरमास (Kharmas) यानी 14 जनवरी के बाद जब बिहार मंत्रिमंडल (Bihar Cabinet) का विस्तार हो जायेगा, प्रदेश भाजपा (BJP) की नयी कमेटी भी गठित कर दी जायेगी. निवर्तमान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष (State BJP President) डा. दिलीप जायसवाल (Dr. Dilip Jaiswal) ने पुरानी कमेटी में मामूली फेरबदल किया था. कहा जा सकता है कि प्रदेश भाजपा में अब भी सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) का ही दबदबा है. भाजपाइयों का ही मानना है कि सम्राट चौधरी के माध्यम से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह (Radha Mohan Singh) भी पटना में अपने मोहरे सजाते रहे हैं. कहा तो यह भी गया कि सुशील कुमार मोदी की कोर कमेटी के राधामोहन सिंह ने सम्राट चौधरी को समझाया कि सामने की बाधाएं दूर करने के लिए नित्यानंद राय की घेराबंदी करनी ही पड़ेगी.
लाये जा सकते हैं नये चेहरे
विधानसभा का चुनाव (Assembly Elections) संपन्न हो चुका है. अब संगठन को दुरुस्त करने का समय आ गया है. कई चेहरे ऐसे हैं, जिन्हें प्रदेश भाजपा कमेटी से हटाया जाना तय माना जा रहा है. प्रमोद चंद्रवंशी (Pramod Chandravanshi) राज्य सरकार में मंत्री बनाये गये हैं. प्रदेश कमेटी (State Committee) में अब पदाधिकारी नहीं रहेंगे. पूर्व प्रदेश महामंत्री और उपाध्यक्ष बेबी कुमारी (Baby Kumari) अब लोजपा (रामविलास) की विधायक हैं. प्रदेश कमेटी में उनकी जगह शिवेश राम (Shives Ram) या जनक राम (Janak Ram) को लाया जा सकता है. संजय गुप्ता (Sanjay Gupta) विधायक बने हैं. संजय गुप्ता और रत्नेश कुशवाहा (Ratnesh Kushwaha) की जगह नये चेहरे लाये जा सकते हैं. मिथिलेश तिवारी (Mithilesh Tiwari) पूर्व में भी प्रदेश कमेटी में रहे हैं. उनकी वापसी हो सकती है.
देखना दिलचस्प होगा
भाजपा नेतृत्व प्रदेश कमेटी में 50 प्रतिशत युवा और ऊर्जावान चेहरे को लाना चाहता है. मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के युवा भाजपा विधायक (BJP MLA) रंजन कुमार (Ranjan Kumar) का नाम खासे चर्चा में है. पहले भी यहां से अजय निषाद (Ajay Nishad), बेबी कुमारी (Baby Kumari) और राजेश वर्मा (Rajesh Verma) एक साथ पदाधिकारी बनते रहे हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि संजय सरावगी (Sanjay Sarawgi) भी सम्राट चौधरी और डा. सीपी ठाकुर (Dr. CP Thakur) की तरह मंच-मोर्चा संगठनों में अपनी पसंद को थोपते हैं या अध्यक्ष को आजादी देते हैं. जब तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डा. सीपी ठाकुर ने मंच-मोर्चा संगठनों के अध्यक्षों की नियुक्ति की थी तो उनके साथ-साथ एक-एक महामंत्री और उपाध्यक्ष की भी नियुक्ति कर डाली थी. डा. सीपी ठाकुर ने भूमिहारों को तरजीह दी थी.
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नया समीकरण बनाया
उन दिनों हृदयनाथ दीक्षित (Hridaynath Dixit) प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री थे. भाजपा नेतृत्व ने डा.सीपी ठाकुर की कमेटी और उनके द्वारा नियुक्त पदाधिकारियों की सूची पर मुहर लगा दी थी. आगे चलकर राधामोहन सिंह ने सम्राट चौधरी के कान में डा. सीपी ठाकुर वाला मंत्र डाला. सम्राट चौधरी ने भी मंच-मोर्चा संगठनों में अध्यक्ष की नियुक्ति करते हुए एक-एक महामंत्री-उपाध्यक्ष की भी नियुक्ति कर डाली. मंच-मोर्चा अध्यक्षों को अपने लिए ठीक-ठाक कमेटी बनाने में बड़ी परेशानी हुई. सम्राट चौधरी ने भी संगठन में कुशवाहा समाज को खुलकर तरजीह दी, परन्तु उन्होंने भूमिहारों को भी पर्याप्त जगह देते हुए एक नया समीकरण बनाया. प्रदेश भाजपा की कमेटी की घोषणा में अध्यक्ष का बहुत कम चलता है, परन्तु मंच-मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा में ही स्पष्ट हो जायेगा कि संजय सरावगी को कितनी आजादी दी गयी है.
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