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सीमांचल और भाजपा : बिदक जायेगा तब… ब्राह्मण समाज!

सीमांचल का ब्राह्मण समाज कटिहार निवासी भाजपा नेता टनटन ठाकुर को पार्टी में समुचित मान-सम्मान नहीं मिलने को लेकर खासे गंभीर है. 38 वर्षीय टनटन ठाकुर सीमांचल में ब्राह्मण समाज के उभरते युवा नेता हैं. बड़ी बात यह कि पीढ़ियों से भाजपा के साथ जुड़े हैं. पार्टी में इनकी सक्रियता और समर्पण को इस रूप में सहजता से समझा जा सकता है कि हाल-फिलहाल भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये नितिन नवीन के साथ उस समय भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री थे जब वह (नितिन नवीन) बिहार प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे.

अशोक कुमार
08 जनवरी 2026

Purnia: बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) के हालिया संपन्न चुनाव (Election) के दौरान सोशल मीडिया (Social Media) की सुर्खियों में रही भावुकता भरी एक तस्वीर पर ध्यान हर किसी का गया होगा. तमाम संवेदनशील (Sensitive) नजरें उस पर जमी होंगी. भावुकता की वजह जानने की जिज्ञासा भी जगी होगी. तस्वीर भाजपा के सीमांचल के कफन ओढ़े रोते-बिलखते धाकड़ नेता अजय कुमार झा की थी. साथ में उनकी व्यथा की व्याख्या करतीं पत्नी संजू झा (Sanju Jha) भी थीं. व्यथा अररिया (Araria) निवासी उस अजय कुमार झा की जिन्होंने ‘सीमांचल के गांधी’ का खिताब धारण कर रखे मरहूम पूर्व मंत्री तस्लीम उद्दीन (Tasleem Uddin) के सियासी साम्राज्य को चीर भाजपा (BJP) का जनाधार बढ़ाने के अभियान में अहम भूमिका निभायी थी. उस अभियान से भाजपा के चुनावी मंसूबों को बुलंदी मिली थी.

जीवन समर्पित था

शुरुआत में अजय कुमार झा (Ajay Kumar Jha) के योगदान को पार्टी में खूब महत्व मिला. अररिया विधानसभा क्षेत्र (Araria Assembly Constituency) के 2009 के उपचुनाव में उन्हें भाजपा की उम्मीदवारी मिली. अच्छी संख्या में मत लाने के बावजूद दुर्भाग्यवश उनकी हार हो गयी. राजनीति में ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि हार-दर-हार के बाद भी नेताओं को भाजपा की उम्मीदवारी मिलती रही है. पर, अजय कुमार झा को सिर्फ एक हार के बाद ही हाशिये पर डाल दिया गया. न फिर कभी उम्मीदवारी मिली और न दलीय संगठन में ऐसा कोई महत्वपूर्ण पद जिससे उनका और उनके समर्थकों का मनोबल ऊंचा रहता. भाजपा में महत्वहीन बना दिये गये अजय कुमार झा ने इधर-उधर भविष्य संवारने की कोशिश की. कहीं कोई संभावना नहीं बनी तब खुद का जीवन फिर से भाजपा को समर्पित कर दिया.

उम्मीदवारी नहीं मिली

भाजपा नेतृत्व ने फरवरी 2025 में प्रदेश कार्यसमिति (State Working Committee) का सदस्य बनाने के अलावा प्रायः उन्हें उपेक्षित ही रखा. तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. दिलीप जायसवाल (Dr. Dilip Jaiswal) के सौजन्य से प्रदेश कार्यसमिति की सदस्यता मिली तो अजय कुमार झा की अच्छे दिन आने की उम्मीदें हरी हो गयीं. 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फारबिसगंज (Forbesganj), नरपतगंज (Narpatganj) और जोकीहाट (Jokihat) से भाजपा की उम्मीदवारी की दावेदारी ठोक दी. दावेदारी उनकी खारिज हो गयी. कफन बांध अजय कुमार झा ने नरपतगंज में ताल ठोकने के लिए निर्दलीय (Independent) नामांकन (Nomination) कराया तो तकनीकी कारणों से वह रद्द हो गया. हालांकि, अजय कुमार झा का कहना रहा कि नामांकन उनका रद्द नहीं हुआ, साजिशन रद्द करा दिया गया.

गलत संदेश गया

नामांकन में क्या हुआ क्या नहीं, यह एक अलग मुद्दा है. उम्मीदवारी के लिए पार्टी में अजय कुमार झा के साथ जो कुछ हुआ उससे सीमांचल के ब्राह्मण (Brahmin) समाज में भाजपा के प्रति गलत संदेश गया. पार्टी नेतृत्व के करीब-करीब ऐसे ही रुखे व्यवहार से पूर्णिया के कर्मठ व मुखर भाजपा नेता अनंत भारती (Anant Bharti) को भी दो-चार होना पड़ा है. पूर्णिया नगर निगम (Purnia Municipal Corporation) के महापौर (Mayor) पद के पिछले चुनाव में अनंत भारती भाजपा समर्थित उम्मीदवार बनना चाहते थे. भाजपा नेतृत्व ने निष्ठा और समर्पण आधारित उनकी उम्मीदों पर सौ घड़ा पानी उड़ेल दिया. निर्दलीय चुनाव लड़ गये अनंत भारती का दिल ऐसा टूटा कि लाख कोशिशों के बाद भी वह भाजपा में पहले जैसी सकारात्मक सक्रियता में लौट नहीं पा रहे हैं.

क्षोभ भर गया समाज में

विश्लेषकों की समझ में ये दो ऐसे उदाहरण हैं जिनसे सीमांचल के भाजपा समर्थक समूहों में शामिल ब्राह्मण समाज में कंठ तक क्षोभ भर गया है. इसके बाद भी इस समाज ने 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवारों का संपूर्ण साथ दिया. परिणाम संतोषजनक निकला. विश्लेषकों की मानें, तो ब्राह्मण समाज का अभी भले भाजपा से मोह भंग नहीं हुआ है, पर पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की उपेक्षा का क्रम ऐसा ही बना रहा तो देर-सबेर मोह भंग भी हो जा सकता है.

खासे गंभीर है समाज

बहरहाल, सीमांचल का ब्राह्मण समाज कटिहार (Katihar) निवासी भाजपा नेता टनटन ठाकुर (Tantan Thakur) को पार्टी में समुचित मान-सम्मान नहीं मिलने को लेकर खासे गंभीर है. 38 वर्षीय टनटन ठाकुर सीमांचल में ब्राह्मण समाज के उभरते युवा नेता हैं. बड़ी बात यह कि पीढ़ियों से भाजपा के साथ जुड़े हैं. पार्टी में इनकी सक्रियता और समर्पण को इस रूप में सहजता से समझा जा सकता है कि हाल-फिलहाल भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये नितिन नवीन (Nitin Naveen) के साथ उस समय भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री थे जब वह (नितिन नवीन) बिहार प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे. हालांकि, बाद के दिनों में टनटन ठाकुर को दो बार प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया. डा. दिलीप जायसवाल के प्रदेश अध्यक्षीय काल में और उसके पहले डा. संजय जायसवाल (Dr. Sanjay Jaiswal) के अध्यक्षीय काल में.

चाहिये सम्मानजनक पद

वर्तमान में टनटन ठाकुर प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य तो हैं ही, पूर्णिया विश्वविद्यालय (Purnia University) में राज्यपाल द्वारा मनोनीत सीनेट सदस्य (Senate Member) भी हैं. उनकी पहचान सिर्फ कटिहार या सीमांचल तक ही सीमित नहीं है, विभिन्न प्रदेशों जैसे पश्चिम बंगाल (West Bengal), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh), हरियाणा (Haryana), दिल्ली (Delhi), झारखंड (Jharkhand) से लेकर बिहार (Bihar) में उन्हें चुनाव प्रभारी भी बनाया जाता रहा है. इस रूप में सफल कर्तव्य निर्वहन के कारण देश स्तर के ढेर सारे भाजपा नेताओं से भी उनका संबंध-संपर्क बन गया है. चुनाव में उम्मीदवारी की बात अपनी जगह है, भाजपा संगठन में समुचित स्थान-सम्मान नहीं मिलने से क्षुब्ध-असंतुष्ट ब्राह्मण समाज पार्टी के प्रति संपूर्ण समर्पित नेता टनटन ठाकुर को भाजपा के नये राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय सांगठनिक ढांचे में ऐसे किसी पद की अपेक्षा रखता है जिससे भाजपा का समर्थक होने और कहने में उसे गर्व महसूस हो.

संघ से रहा है जुड़ाव

यहां गौर करने वाली बात है कि टनटन ठाकुर के पिता दिनेश मोहन ठाकुर (Dinesh Mohan Thakur) भी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं. कटिहार में भाजपा के जनाधार विस्तार में उनकी भी बड़ी भूमिका रही है. टनटन ठाकुर भी संघ की पृष्ठभूमि से हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) एवं भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) में तकरीबन एक दशक तक विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए भाजपा में आये हैं. ऐसा माना जाता है कि सीमांचल (Seemanchal), कोशी अंचल (Koshi Region) और मिथिलांचल (Mithilanchal) के युवा वर्ग में भी इनकी अच्छी पकड़ है. उच्च शिक्षा (Higher Education) प्राप्त टनटन ठाकुर सीमांचल में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के हित में आंदोलन करते रहे हैं. भाजपा में गुटबंदी से दूर रहते हैं. इसलिए सीमांचल के कुछ बड़े भाजपा नेता उनकी राजनीतिक प्रगति में अवरोध डालने का कुचक्र रचते रहते हैं.


(अशोक कुमार सीमांचल के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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