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चौंकिये नहीं… जीत छिपी है! इस हार में…

विशेष प्रतिनिधि
09 जनवरी 2026

Patna : जीतने के लिए एनडीए (NDA) की जितनी चर्चा नहीं हो रही है, उससे अधिक चर्चा तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) की हार की हो रही है. जिसे देखो, वही उपदेश दे रहा है. विपक्ष की हार के लिए उन्हें कसूरवार ठहरा रहा है. कभी वार्ड का चुनाव नहीं जीतने वाला आदमी भी तेजस्वी प्रसाद यादव को उपदेश दिये जा रहा है. कोई आदमी उनकी जगह पर खड़ा होकर नहीं सोच रहा है. खासकर परिवार के मोर्चे पर जो लड़ाई लड़नी पड़ी है, उस पर गौर कीजिये तो पता चलेगा कि तेजस्वी प्रसाद यादव ने यह मोर्चा बहुत ढंग से जीत लिया है. आगे उन्हें अब राजनीतिक विरोधियों से ही लड़ना पड़ेगा.

दूसरी बार कम महत्व

याद कीजिये. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नेतृत्व में आज से दस साल पहले महागठबंधन (Mahagathbandhan) की सरकार बनी थी तो क्या सब हुआ था. भाई तेजप्रताप यादव (Tejpratap Yadav) के पास स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) था. डाक्टर दीदी मीसा भारती (Misa Bharti) भी उनसे जुड़ गयी थीं. साथ में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद (RJD Supremo Lalu Prasad) के एक पूर्व आप्त सचिव भोला यादव (Bhola Yadav) भी जुड़ गये थे. कुछ ही महीनों में पूरे विभाग में कोहराम मच गया था. ठेका-पट्टा से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग (Transfar-Posting) तक में एक जैसा माहौल था. दूसरी तरफ निर्माण विभाग (Construction Department) की जिम्मेवारी संभाल रहे तेजस्वी प्रसाद यादव बेहद सतर्क ढंग से कदम रख रहे थे. यह उसी अनुभव का परिणाम था कि दूसरी बार जब सरकार बनी, भाई तेजप्रताप यादव को कम महत्व वाला विभाग दिया गया.

पिताजी की मर्जी

हालिया संपन्न विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में भी बहनों और बहनोइयों की उम्मीदवारी वाली लिस्ट कुछ अधिक ही लंबी हो गयी थी. तेजस्वी प्रसाद यादव को परिवार वाले मोर्चे पर अपने पिता से भी लड़ना पड़ा. पांच साल पहले के चुनाव में पिता का हस्तक्षेप (Interference) न्यूनतम स्तर पर था. अधिक उम्मीदवारी तेजस्वी प्रसाद यादव की मर्जी से ही बांटे गये थे. परिणाम आया तो तेजस्वी प्रसाद यादव मामूली अंतर से सरकार बनाने से पीछे रह गये थे. इस बार ऐसा नहीं हो सका. दो दर्जन से अधिक सीटों पर पिताजी की मर्जी से उम्मीदवार दिये गये. दानापुर (Danapur), रामगढ़ (Ramgarh), बेलागंज (Belaganj) ऐसी ही सीटें थी. रामचन्द्र पूर्वे (Ramchandra Purvey) की पतोहू स्मिता पूर्वे (Smita Purvey) को टिकट देने के पक्ष में तेजस्वी प्रसाद यादव नहीं थे.

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मिला यह लाभ

अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री (Chif Minister) घोषित करने के नाम पर जितनी बदबू फैली, उसमें भी तेजस्वी प्रसाद यादव का योगदान नहीं था. उनकी साफ समझ थी कि महागठबंधन में आधे से अधिक विधायक उनके दल के होंगे. वह बहुमत (Majority) के आधार पर नेता चुन लिये जायेंगे. लेकिन, पिता चाह रहे थे कि मुख्यमंत्री पद के मामले में ठोक ठठाकर निर्णय ले लिया जाये. कोई पूछेगा कि तेजस्वी प्रसाद यादव को क्या लाभ मिला. इसमें कोई दो राय नहीं कि भविष्य में राजद ही मुख्य विपक्षी दल रहेगा. अगली बार वह पारिवारिक बाधाओं से बहुत हद तक मुक्त रहेंगे. यह मामूली उपलब्धि नहीं है.

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