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सब कुछ नगद नारायण : राजनीति में हो, दम भर कमाओ!

विशेष प्रतिनिधि
07 जनवरी 2026

PATNA : अब राजनीति (Politics) में इस जिज्ञासा का कोई मतलब नहीं रह गया है कि कौन मंत्री कमाता है, खूब कमाता है और कौन एकदम से नहीं कमाता है? जनता भी चुनाव (Election) के दिनों में नगद नारायण पर पहले की तुलना में अधिक जोर दे रही है. इसलिए नेताओं के पास भी तर्क है कि न कमायें तो चुनाव कहां से लड़ें? यह देखा भी गया है कि ईमानदारी से काम करने वाले विधायक (MLA) दोबारा सदन का मुंह नहीं देख पाते हैं. पार्टियां भी कमजोर लोगों को टिकट देने से बचती हैं.

ताजा-ताजा फल मिला

कुल मिला कर बात यहां आकर ठहर गयी है कि राजनीति में हो तो दम भर कमाओ. अगर आगे बढ़ना हो तो प्राप्त धन का व्यय यथोचित स्थान पर करो. नहीं बढ़ना है तो धन का निवेश कारखाना (Factory) और कालेज (College) के निर्माण में करो. बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में दोनों तरह के नेता हैं. कमाते हैं और बांटते भी हैं. इसी के आधार पर उन्हें फल भी मिलता है. अभी हाल में ही एक बड़ी पार्टी में इसी आधार पर ताजा-ताजा फल मिला है. जिन्हें फल मिला है, उन्हें नयी सरकार बनी, उस समय भी दो-दो मालदार विभाग मिले थे. इससे पहले भी कभी उन्हें कमजोर विभाग नहीं मिला था.

बना दिया बड़ा आदमी

हालिया संपन्न विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में पार्टी में राष्ट्रीय स्तर (National level) का फल पाये नेता ने दोनों हाथ से खर्च किया. पार्टी का जिस उम्मीदवार को जितनी भी रकम देने का निर्देश मिला, बिना देर किये पहुंचा दिया. सब कुछ इतना सिस्टम से चला कि किसी को भनक नहीं लगी. पार्टी के अघोषित सुप्रीमो तक ने उनके प्रबंधन को सराहा. अपने अंदाज में कह भी दिया था कि तुम्हें बड़ा आदमी बनायेंगे. उन्होंने अपने वचन का पालन किया. आज की तारीख में उन्हें पार्टी में सबसे बड़ा आदमी बना दिया. वह उस पार्टी के सर्वेसर्वा (Party’s Supreme Leader) होने जा रहे हैं, जिसकी सरकार चल रही है.

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हर की कमाई पर नजर

अब उनका हाल भी देख लीजिये, जिन्होंने कमाई तो खूब की, लेकिन माल दबाकर बैठ गये. कारखाना और कालेज में धन का निवेश किया. ऐसे विधायक जो पिछली सरकार में मंत्री (Minister) थे और इस बार विधायक बना कर छोड़ दिये गये, इसी प्रवृति वाले नेता हैं. उन्हें उम्मीद थी कि जाति के नाम पर कैबिनेट (Cabinet) में जगह मिल जायेगी. ऐसा नहीं हो पाया. यह मानकर चलिये कि केन्द्र सरकार (Central Government) की एजेंसियां हर मंत्री की कमाई (Earnings) पर नजर रख रही है. छोटे-छोटे टेंडर में की गयी रिश्वतखोरी (Rishvatakhore) का भी हिसाब रखा जा रहा है. बड़ी पार्टी में राष्ट्रीय स्तर का फल पाये नेता की तरक्की (Progress) का संदेश भी यही है कि खाओ और खिलाओ, राजा बनोगे. अकेले दबाकर खाओगे तो खाने लायक नहीं रह जाओगे.

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