महागठबंधन की महा हार… अध्यक्षों पर गिर सकती है गाज

विशेष प्रतिनिधि
09 जनवरी 2026
Patna: महागठबंधन की हार की समीक्षा फुटकर तरीके से हो रही है. सबसे बड़े दल की समीक्षा (Review) में उन चार लोगों को जिम्मेवार ठहरा दिया गया, जो तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) के करीबी हैं. बिना किसी का नाम लिये कहा गया कि चार एस के कारण हार हुई . चार एस का मतलब संजय यादव (Sanjay Yadav), विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह (Mlc Sunil Kumar Singh), इंजीनियर सुनील सिंह (Er. Sunil Singh) और शक्ति सिंह यादव (Shakti Singh Yadav) निकाला गया. लंबे कुरता वाले प्रदेश अध्यक्ष जी ने मौन रहकर इसकी स्वीकृति दी कि बात तो सही ही है. हम सब लोग जी जान से पार्टी की सरकार बनाने के अभियान में जुटे थे. इन्हीं चारों ने काम खराब कर दिया. सच क्या है?
इच्छा पूरी नहीं हुई
अध्यक्षजी अत्यंत पिछड़ा वर्ग के वोटों की गारंटी के साथ ठेका लेकर पदासीन हुए थे. पूरे जिले के अतिपिछड़ों का हिसाब करने की जरूरत नहीं है. अध्यक्षजी के अपने गांव-पंचायत में मिले वोटों का हिसाब कर लिया जाये, तो पता चलेगा कि बेचारे अपने घर का वोट भी महागठबंधन (Mahagathbandhan) उम्मीदवार (Candidate) को नहीं दिला पाये. वह खुद उम्मीदवार बनने की इच्छा रखते थे. यह इच्छा पूरी नहीं हुई. बेमन से चुनाव प्रचार कर रहे थे. इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है.
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कितने जिम्मेेवार
महागठबंधन में सबसे पुरानी पार्टी (Oldest Party) के प्रदेश अध्यक्ष (State President) का हाल और बुरा हुआ. चुनाव मैदान में गये तो चारो खाने चित होकर ही वापस आये. उन्होंने एक सुरक्षित सीट पर अपने खास को उम्मीदवार बनाया. उम्मीदवार ने दिल से खर्च किया. जमानत तक नहीं बच पायी. दो हजार से भी कम वोट उनके खाते में जमा हो पाये. घटक के तीसरे दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव मैदान में गये. लड़े. मगर, बीच रास्ते में ही हौसला पस्त हो गया. क्योंकि उन्हें पता चल गया था कि परिणाम निकला तो जमानत जब्त कराने के अलावा कोई उपलब्धि नहीं रहेगी. इन सबका हिसाब लिया जाये, तो पता चलेगा कि असली में हार के कितने जिम्मेेवार हैं.
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