सवा साल बन गया काल- 6 : विचारधारा तब भी बनी रहेगी बड़ी चुनौती

नक्सली संगठन के बड़े नेताओं का बड़ी तेजी से सफाया, हथियार डालने वाले उग्रवादियों की बढ़ती संख्या और संगठन से नये लड़ाकों का न के बराबर जुड़ाव से केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित 31 मार्च 2026 की समय सीमा तक नक्सली भले खत्म हो जा सकते हैं, माओवाद या नक्सलवाद और उसकी विचारधारा पूरी तरह खत्म हो जायेगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता.

महेश कुमार सिन्हा
16 मार्च 2026
New Delhi: रामधेर मज्जी… दुर्दांत नक्सली. उग्रवाद प्रभावित तीन राज्यों-मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के जंगलों में कभी आतंक का पर्याय था. 01 करोड़ रुपये का इनाम उसके सिर पर भी था. इस क्षेत्र में नक्सली संगठन (Naxalite Organization) की सशक्त संरचना का उसे मजबूत स्तंभ माना जाता था. वक्त ऐसा बदला कि कानून को लहूलुहान करने-कराने वाला यह शख्स कानून के समक्ष घुटना टेकने को मजबूर हो गया. हथियार डाल संविधान को शिरोधार्य कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ गया. रामधेर मज्जी (Ramdher Majji) मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन का प्रभारी था. उसके आत्मसमर्पण को उग्रवाद निरोध अभियान की बड़ी कामयाबी मान इस क्षेत्र में नक्सली हिंसा (Naxalite Violence) के अध्याय को खत्म समझा जा रहा है. रामधेर मज्जी छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर जिले के बेदरे थाना क्षेत्र के मल्लेमड्डी गांव का रहने वाला है. यह गांव राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में है.
रणनीति का अंतिम शब्द
रामधेर मज्जी को नक्सली संगठन (Naxalite organization) में रणनीति का अंतिम शब्द माना जाता था. उसकी पत्नी ललिता उर्फ अनिता (Lalita alias Anita) भी नक्सली थी. कहते हैं कि वही उसका सबसे बड़ा रणनीतिक सहारा थी, अंगरक्षक भी थी. वैसे, रामधेर मज्जी (
Ramdher Majji) के साथ एके-47, इंसास और एसएलआर जैसे घातक हथियारों से लैस 07 गुरिल्ला नक्सली हमेशा तैनात रहते थे. जंगल में किसी भी मिटिंग, मूवमेंट या ऑपरेशन के दौरान वह इस गुरिल्ला दस्ते (Guerilla Squad) के बिना एक कदम भी नहीं बढ़ता था. संगठन में उसे अमरजीत और उसकी पत्नी ललिता को अनिता दी के नाम से जाना जाता था. 08 दिसम्बर 2025 को छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के राजनांदगांव में कानून के समक्ष हथियार डाल मुख्य धारा में आ गया.
यह भी है एक बड़ा नाम
लाल गलियारे से निकल समाज की मुख्य धारा से जुड़ने वाले शीर्ष माओवादियों (Top Maoists) में रूपेश उर्फ सतीश उर्फ आसन्ना उर्फ विकल्प (Satish alias Asana alias Vikalp) भी एक बड़ा नाम है. शांति, प्रगति और सम्मानजनक जीवन की ललक लिये 17 अक्तूबर 2025 को 210 नक्सलियों के साथ उसने बीजापुर में आत्मसमर्पण कर दिया. संगठन की केन्द्रीय समिति का वह सदस्य था. तेलंगाना के मुगुलू निवासी रूपेश उर्फ सतीश का मूल नाम तक्कुल्लामल्ली वासुदेव राव (Takkullamalli Vasudeva Rao) है. हथियार डालने वाले माओवादियों में एक बड़ा चेहरा अनंत उर्फ विकास नागपुरे (Anant alias Vikas Nagpure) का भी है. अनंत नक्सली संगठन का प्रवक्ता था और उसी ने सरकार से माओवादियों के आत्मसमर्पण के लिए 01 जनवरी 2026 तक का समय मांगा था. छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों को इस आशय का पत्र लिखा था. उस पत्र का कोई जवाब आता, उससे पहले 08 दिसम्बर 2025 को उसने भी महाराष्ट्र के गोदिया में आत्मसमर्पण कर दिया.
नक्सली भले खत्म हो जाये…
बहरहाल, नक्सली संगठन के बड़े नेताओं का बड़ी तेजी से सफाया, हथियार डालने वाले उग्रवादियों की बढ़ती संख्या और संगठन से नये लड़ाकों का न के बराबर जुड़ाव से केन्द्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister ) अमित शाह (Amit Shah) द्वारा घोषित 31 मार्च 2026 की समय सीमा तक नक्सली भले खत्म हो जा सकते हैं, माओवाद या नक्सलवाद और उसकी विचारधारा पूरी तरह खत्म हो जायेगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता. सरकार के उग्रवाद निरोधक अभियान (Counter-Insurgency Operations) में ‘हथियार डालो नहीं तो गोली खाओ’ की रणनीति तो है ही, आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से संबंधित ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के साथ विकास के ठोस कार्यक्रम भी हैं, जो सरजमीं पर नजर आ रहे हैं. यह स्पष्ट दिख रहा है कि सरकार की नीति और रणनीति ने वामपंथी उग्रवाद (Leftist Extremism) की कमर तोड़कर रख दी है.
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बहुत बड़ी चुनौती है यह
इसके बाद भी सरकार को परिवर्तित स्वरूप में कायम उन सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में जमीनी बदलाव के लिए कारगर पहल करनी होगी जिनकी कोख से नक्सलवाद निकला और देश के लगभग एक तिहाई हिस्से में विस्तृत हो गया. उग्रवाद प्रभावित आदिवासी अंचलों में उनके संसाधनों- जल, जंगल और जमीन (Water, Forests and Land) की रक्षा का सवाल भी बहुत बड़ा आकार लिये हुए है. बदले हालात में भी यह बहुत बड़ी चुनौती है. इससे सरकार कैसे निपटती है, माओवाद या नक्सलवाद का समूल खात्मा बहुत कुछ उस पर भी निर्भर करेगा. (समाप्त)


