सरकार और संगठन : बदलाव को मिल गया अंतिम रूप!
सरकार यानी केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के कयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अलग-अलग तारीख में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. संभव है, मुलाकात की वजह कुछ दूसरी रही हो, पर राजनीति ने उसे मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल के नजरिये से ही देखा. जो हो, राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में ऐसी बड़ी तेज चर्चा है कि फेरबदल में आठ से दस नये चेहरे केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किये जा सकते हैं.
- राजनाथ सिंह के आवास पर हुई थी उच्च स्तरीय बैठक
- कुछ बड़े मंत्रियों की भी हो सकती है विदाई
- बदलेंगे उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के भी राज्यपाल
- दो राज्यों में होगी नये मुख्यमंत्रियों की ताजपोशी
विशेष संवाददाता
27 जून 2026
New Delhi: कुछ राज्यों में सांसदों-विधायकों को तोड़-जोड़ कर विपक्ष में हड़कंप मचा देने के बाद भाजपा (BJP) नेतृत्व ने सरकार और संगठन (Government and Organization) को मजबूत बनाने की रणनीति को भी लगभग अंतिम रूप दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में रक्षा मंत्री (Defence Minister) राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के आवास पर मध्य जून में हुई उच्चस्तरीय बैठक (High-level Meeting) में इसे प्रारूपित किया गया था. बैठक में केन्द्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री (Minister of Road Transport and Highways) नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) के अलावा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री (Union Health Minister) जेपी नड्डा (JP Nadda) आदि भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के विदेश यात्रा से लौटने के बाद इस पर अमल होने की संभावना जतायी जा रही थी. लेकिन, नरेन्द्र मोदी विदेश यात्रा से लौटने के बाद अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता चले गये.
शामिल होंगे दस नये चेहरे
प्रधानमंत्री के कोलकाता से दिल्ली लौटने के उपरांत बदलाव की बात आगे बढ़ने की बात कही गयी थी. बात आगे बढ़ी भी. सरकार यानी केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल (Union Cabinet Reshuffle) के कयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अलग-अलग तारीख में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) से मुलाकात की. संभव है, मुलाकात की वजह कुछ दूसरी रही हो, पर राजनीति ने उसे मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल के नजरिये से ही देखा. जो हो, राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में ऐसी बड़ी तेज चर्चा है कि फेरबदल में आठ से दस नये चेहरे केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किये जा सकते हैं. संख्या उससे भी ज्यादा हो सकती है. कुछ मंत्रियों की विदाई भी संभावित है. चार के नाम सार्वजनिक हो चुके हैं. दो-चार बड़े चेहरों को भी बाहर किया जा सकता है.
बदलेंगे पांच राज्यपाल
सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार करीब पांच राज्यों में राज्यपाल (Governor) बदले जाने वाले हैं. उनमें उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) और मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के भी राज्यपाल है. कभी गुजरात (Gujarat) की मुख्यमंत्री रहीं आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं. वह 29 जुलाई 2019 से ही इस पद पर जमी हैं. वहां से मुक्त हो जाने के बाद उनका कहीं समायोजन होगा या ‘मार्गदर्शक मंडल’ में जगह उपलब्ध करा दी जायेगी, यह अभी नहीं कहा जा सकता. मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल (Mangubhai Patel) का पांच वर्षीय कार्यकाल इसी माह पूरा होनेवाला है. आनंदीबेन पटेल और मंगूभाई पटेल दोनों गुजरात के रहनेवाले हैं.
दो मुख्यमंत्रियों की विदाई!
चर्चा है कि जिन कुछ केन्द्रीय मंत्रियों की छंटनी होनी है उनमें से दो को राज्यपाल बनाया जा सकता है. महत्वपूर्ण खबर यह भी है कि भाजपा शासित दो राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन भी संभावित है. यानी उन राज्यों के वर्तमान मुख्यमंत्रियों की विदाई और नये की ताजपोशी होनी है. उच्चस्तरीय बैठक में इस पर निर्णय लगभग हो चुका है. बस प्रधानमंत्री की स्वीकृति शेष है. निकट भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन हो जाये, तो वह चौंकने-चौंकने वाली बात नहीं होगी. ऐसे राज्यों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, पर राजनीति के विश्लेषकों के अनुमान में राजस्थान (Rajsthan)और हरियाणा (Hariyana) हैं.
चर्चा राजस्थान व हरियाणा की
भाजपा शासित राजस्थान में भजनलाल (Bhajanlal) शर्मा मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं. नवम्बर 2028 में वहां विधानसभा के चुनाव होने हैं. भजनलाल शर्मा की उपलब्धियां चुनावी कसौटी पर खरा उतरती हैं या नहीं, मुद्दा यह नहीं है. जानकारों के मुताबिक नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) के लिए जो तर्क गढ़ा गया है उसमें ब्राह्मण बिरादरी के भजनलाल शर्मा को राजस्थान के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों (Social and political equations) के मद्देनजर ‘उपयुक्त नहीं समझा जा रहा है. सत्ता विरोधी रुझान भी एक कारक है. राजस्थान के बाद दूसरे राज्य के रूप में हरियाणा का नाम लिया जा रहा है. नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) वहां के मुख्यमंत्री हैं. हरियाणा विधानसभा का चुनाव 2029 में होना है. विश्लेषकों की मानें तो उस राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा चुनाव से नहीं, कुछ और से जुड़ा है.
यह भी पढ़ें:
पांच अध्यक्ष, पांच महासचिव बनेंगे
वैसे, कहा जाता है कि नायब सिंह सैनी के कार्यकलाप से भाजपा नेतृत्व संतुष्ट नहीं है. क्या होगा क्या नहीं, बस दो-चार दिनों में ही यह स्पष्ट हो जा सकता है. इसके अलावा नये अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Navin) की नयी कमेटी के रूप में भाजपा संगठन में भी बदलाव होना है. पांच नये उपाध्यक्ष (Vice President) और पांच महासचिव (Secretary General) बनाये जानेवाले हैं. ऐसा माना जा रहा है कि सरकार और संगठन में संभावित बदलाव में युवा चेहरों को भी अवसर उपलब्ध कराया जा सकता है.


