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विवादों में उलझा पूर्णिया नगर निगम : भुगत रहे शहर के लोग!

पूर्णिया नगर निगम में महापौर विभा कुमारी और उपमहापौर पल्लवी गुप्ता के बीच का विवाद अब केवल व्यक्तिगत मतभेद भर नहीं रह गया है. यह नगर निगम की राजनीति और प्रशासनिक कामकाज को भी प्रभावित करता दिख रहा है. दोनों 2022 में निर्वाचित हुई थीं. शुरू में उनमें सामंजस्य था. लेकिन, पिछले कुछ महीनों से टकराव की स्थिति बनी हुई है.

  • ‘भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा है पूर्णिया नगर निगम’
  • नगर निगम की सत्ता पर कुछ चुनिंदे लोगों का है कब्जा
  • योजनाओं एवं निर्णयों पर उठ रहे गंभीर सवाल
  • नगर आयुक्त से भी होते रहता है विवाद

अशोक कुमार
30 जून 2026

Purnia: पूर्णिया की मुख्य धारा की राजनीति में इन दिनों मुद्दों का अकाल है. जनता से जुड़े कुछ मुद्दे हैं भी तो जाने-अनजाने राजनीतिबाजों ने उन्हें नजरंदाज कर रखा है. इस कारण सियासत में सुस्ती दिख रही है. लेकिन, इस सन्नाटे के बीच पूर्णिया नगर निगम (Purnia Municipal Corporation) की राजनीति कुछ सरगर्म अवश्य है. वैसे तो अन्य स्थानीय निकायों की तरह सियासी उठापटक इसकी भी नियति है, पर चुनाव (Election) नजदीक रहने की वजह से नगर निगम की राजनीति करने वाले बाना कुछ अधिक भांज रहे हैं. योजनाओं के आवंटन में पक्षपात, वित्तीय अनियमितता, विकास के कार्यों में भ्रष्टाचार और नागरिक सुविधाओं के मामले में शिथिलता-निष्क्रियता के लगभग स्थायी हो गये मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला बना रखे हैं. सशक्त स्थायी समिति का चुनाव भी राजनीतिक खींचतान का बड़ा मुद्दा रहा है.

सशक्त स्थायी समिति का चुनाव

विपक्षी निगम पार्षदों (Municipal Councillors) ने नगर निगम की सत्ता पर कुछ चुनिंदा लोगों का कब्जा रहने की बात उठा रखी है. आधार यह कि सात सदस्यीय सशक्त स्थायी समिति (Empowered Standing Committee) के हालिया संपन्न चुनाव में नया कुछ नहीं हुआ. सभी निवर्तमान सदस्य काबिज रह गये. इस पर महापौर (Mayor) विभा कुमारी (Vibha Kumari) का कहना रहा कि कुछ लोग पर्दे के पीछे से (Behind the Scenes) पूर्णिया नगर निगम का भाग्य विधाता बनने का प्रयास कर रहे थे, उनके मंसूबे सफल नहीं हुए. इशारा उनका संभवतः उपमहापौर (Deputy Mayor) पल्लवी गुप्ता (Pallavi Gupta) के पति अरविन्द कुमार उर्फ भोला साह (Arvind Kumar alias Bhola Sah) की तरफ था. उपमहापौर पल्लवी गुप्ता ने इसका जवाब अपने ढंग से दे दिया. महापौर और उपमहापौर के विवाद में वित्तीय अनियमितता के आरोप भी सार्वजनिक हुए हैं.

हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

महापौर विरोधी (Anti Mayor) निगम पार्षदों तथा उपमहापौर समर्थक (Deputy Mayor’s Supporters) गुट की ओर से वित्तीय प्रबंधन, विकास योजनाओं के खर्च, बजट आवंटन और सशक्त स्थायी समिति के निर्णयों पर गंभीर सवाल उठाये गये हैं. विभिन्न मदों में हुए खर्च का विस्तृत हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की गयी है. स्थायी समिति के चुनाव में ‘पैसों का खेल’ और नगर निगम की वित्तीय कार्यप्रणाली (Financial Operations) में पारदर्शिता के अभाव की बात भी कही जा रही है. हालांकि, महापौर का गुट इन आरोपों का कड़ा प्रतिवाद करता है. उस गुट के मुताबिक बजट और विकास योजनाओं (Budget and Development Plans) के कार्यान्वयन से जुड़े निर्णय नगर निगम की वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत लिये गये हैं. नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट विधिवत पारित हुआ है. इस आधार पर महापौर समर्थकों का कहना है कि विरोधी निगम पार्षदों के आरोपों में कोई दम नहीं है.

नहीं मिलती समुचित भागीदारी

उपमहापौर पल्लवी गुप्ता के पक्ष के निगम पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी और बैठकों में समुचित भागीदारी उन्हें नहीं दी जाती, जबकि महापौर समर्थक निगम पार्षदों का कहना रहा कि सभी निर्णय नियमानुसार निगम बोर्ड (Corporation Board) और संबंधित समितियों के माध्यम से लिये जाते हैं. बजट, विकास योजनाओं की प्राथमिकता और प्रशासनिक समन्वय जैसे मुद्दों पर भी दोनो पक्षों के बीच मतभेद है. अधिकारों और नगर निगम प्रशासन (Municipal Corporation Administration) की कार्यशैली को लेकर अलग-अलग गुट का नेतृत्व कर रहीं पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी और उपमहापौर पल्लवी गुप्ता में भी खूब बयानबाजी हो रही है. सामान्य समझ में नेपथ्य से दोनों को उनके राजनीतिज्ञ पति की शह मिल रही है.

अक्सर होते रहता है विवाद

महापौर विभा कुमारी के पति जितेन्द्र कुमार (यादव) लम्बे समय तक जदयू (JDU) से जुड़े रहे हैं. फिलहाल जुड़ाव कांग्रेस (Congress) से है. 2025 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में उन्हें पूर्णिया से कांग्रेस की उम्मीदवारी (Congress candidacy from Purnia) भी मिली थी. हार का मुंह देखना पड़ गया था. उपमहापौर पल्लवी गुप्ता के पति अरविन्द कुमार उर्फ भोला साह भाजपा (BJP) की राजनीति करते हैं. वह भी चुनाव लड़ने-लड़ाने का तानाबाना बुनते रहते हैं. महापौर विभा देवी और उनके पक्षधर निगम पार्षदों का नगर आयुक्त से भी अधिकारों और निर्णयों को लेकर अक्सर विवाद होते रहता है. बहरहाल, पूर्णिया नगर निगम का 2026-27 का लगभग 466 करोड़ रुपये का बजट पारित हुआ है. उस दौरान विपक्षी निगम पार्षदों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने यह सवाल उठाया कि पिछले बजटों की राशि का कितना सदुपयोग हुआ और किन योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचा. इस सवाल का उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला.

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पप्पू यादव की तल्ख टिप्पणी

इन सबसे खिन्न क्षेत्रीय सांसद (MP) राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (Rajesh Ranjan alias Pappu Yadav) ने खुले तौर पर तल्ख टिप्पणी की है कि पूर्णिया नगर निगम भ्रष्टाचार (Corruption) में आकंठ डूबा हुआ है. उनके मुताबिक सड़क का निर्माण हो या नाले का या फिर शहर की साफ- सफाई व जल निकासी का कार्य, सभी में वित्तीय अनियमितताएं हो रही हैं. उन्होंने इसकी जांच की जरूरत बतायी है. हालात ऐसे हैं कि पूर्णिया नगर निगम में महापौर विभा कुमारी और उपमहापौर पल्लवी गुप्ता के बीच का विवाद अब केवल व्यक्तिगत मतभेद (Individual Differences) भर नहीं रह गया है. यह नगर निगम की राजनीति (Municipal Corporation Politics) और प्रशासनिक कामकाज को भी प्रभावित करता दिख रहा है. दोनों 2022 में निर्वाचित हुई थीं. शुरू में उनमें सामंजस्य था. लेकिन, पिछले कुछ महीनों से टकराव की स्थिति बनी हुई है.


(अशोक कुमार सीमांचल के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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