जन सुराज और प्रशांत किशोर : बांकीपुर उपचुनाव… संजीवनी की तलाश!

आखिर प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पर ही अपनी राजनीति को केन्द्रित क्यों कर रखा है? दरअसल बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाला उपचुनाव बिहार में 2025 के चुनाव के बाद पहला उपचुनाव होगा. कब होगा, यह वक्त के गर्भ में है. उपचुनाव जब हो, राजनीतिक दृष्टिकोण से बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण हो गया है. इसलिए कि इस क्षेत्र से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन निर्वाचित होते रहे हैं.
- 30 सितम्बर से पहले हो जायेगा उपचुनाव
- फिलहाल बांकीपुर पर केन्द्रित है जन सुराज की राजनीति
- 2025 के चुनाव के बाद होगा यह पहला उपचुनाव
- विपक्ष के लिए काफी दुरुह दिखती है बांकीपुर की राह
विशेष संवाददाता
30 जून 2026
PATNA: पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र (Bankipur Assembly Constituency) में उपचुनाव होना है. 30 मार्च 2026 से यह सीट रिक्त है. नियम कहता है कि छह माह के अंदर उपचुनाव (By-Election) हो जाना चाहिये. नियम का अनुपालन हुआ तब 30 सितम्बर 2026 से पहले वहां उपचुनाव हो जायेगा. उपचुनाव जब हो, चुनावी रणनीतिकार की राष्ट्रीय पहचान रखने वाले ‘जन सुराज’ (Jan Suraj) के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) की नजरें इस पर जमी हैं. 2025 के विधानसभा चुनाव की हाहाकारी हार के मिट नहीं रहे सदमे से उबरने के लिए वह इस क्षेत्र पर काबिज होने की कवायद में लगे हुए हैं. समझ यह कि सिर्फ इस एक क्षेत्र में भी उनकी जीत हो जाती है तो वह बिहार विधानसभा (Bihar Legislative Assembly) की सभी 243 क्षेत्रों में जीत से कहीं अधिक बड़ी होगी. महत्व काफी अधिक होगा.
हो गया है काफी महत्वपूर्ण
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में घूम-घूमकर वह अपनी इस समझ को आम लोगों से साझा कर रहे हैं. बता रहे हैं कि इस एक जीत से न सरकार की सेहत प्रभावित होगी और न विपक्ष बलिष्ठ हो जायेगा. पर, इससे व्यवस्था में बदलाव की बुनियाद जरूर पड़ जायेगी. उनकी यह तकरीर तार्किक है या नहीं, इसकी चर्चा बाद में. फिलहाल बात इस सवाल पर कि आखिर प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को लेकर ही ऐसा क्यों कह रहे हैं? अपनी राजनीति को उन्होंने इसी पर केन्द्रित क्यों कर रखा है? दरअसल बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाला उपचुनाव बिहार में 2025 के चुनाव के बाद पहला उपचुनाव होगा. कब होगा, यह वक्त के गर्भ में है. उपचुनाव जब हो, राजनीतिक दृष्टिकोण से बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण हो गया है.
तो फिर क्या कहना!
इसलिए कि इस क्षेत्र से भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) नितिन नवीन (Nitin Navin) निर्वाचित होते रहे हैं. 2025 में उनकी लगातार पांचवीं जीत हुई थी. पार्टी का सर्वाेच्च पद (Highest Position) मिलने के बाद वह बिहार से ही राज्यसभा का सदस्य (Member of the Rajya Sabha) बने हैं. नियम के अनुसार 30 मार्च 2026 को उन्होंने विधानसभा की सदस्यता (Membership of the Legislative Assembly) त्याग दी. उपचुनाव वहां इसी वजह से होना है. उपचुनाव जब हो, प्रशांत किशोर बांकीपुर में एक अदद जीत के लिए अभी से ही जोर लगाये हुए हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के क्षेत्र में जीत हो गयी तो फिर क्या कहना ! जन सुराज की उस जीत से व्यवस्था में बदलाव की बुनियाद भले नहीं पड़े, भाजपा की हार (BJP’s Defeat) से राजनीति की दिशा तो बहुत हद तक बदल जायेगी ही. लेकिन, इस विधानसभा क्षेत्र के चुनावी इतिहास से जो राह निकलती है वह प्रशांत किशोर के लिए ही नहीं, तमाम गैर भाजपाई दलों (Non-Bjp Parties) के लिए भी दुरुह दिखती है.
कई धाकड़ नेताओं का क्षेत्र रहा
अतीत पर नजर डालें, तो बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पहले पटना पश्चिम (Patna West) के नाम से जाना जाता था. पटना पश्चिम क्षेत्र 1957 में अस्तित्व में आया था. 2008 के परिसीमन में यह बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र हो गया. पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के प्रथम चुनाव में रामसरन साव (1957- कांग्रेस) की जीत हुई थी. उसके बाद के दो चुनावों में क्रमशः दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कृष्णवल्लभ सहाय (1962- कांग्रेस) और महामाया प्रसाद सिन्हा (1967- जनक्रांति दल) निर्वाचित हुए थे. 1967 और 1972 में ‘गेंहू की बाली और हंसिया’ छाप वाला लाल झंडा लहरा उठा था. 1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के धाकड़ नेता ए के सेन और 1972 में सुनील मुखर्जी विजयी हुए थे. 1977 की ‘जयप्रकाश लहर’ में जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर ठाकुर प्रसाद (Thakur Prasad) काबिज हो गये जो तब के जनसंघ (Jansangh) के बड़े नेता थे. ठाकुर प्रसाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravishankar Prasad) के पिता थे.
जमा दिया भाजपा का सिक्का
1980 में बाजी कांग्रेस (Congress) के रणजीत सिन्हा के हाथ लग गयी.1985 और 1990 में बाहुबली छवि के डा. रामानंद यादव (Dr. Ramanand Yadav) का सिक्का चला. दोनों ही चुनावों में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर कामयाबी हासिल की. बाद में जुड़ाव लालू प्रसाद (Lalu Prasad) से हो गया तब 1995 में जनता दल (Janta Dal) के उम्मीदवार के तौर पर वह चुनाव हार गये. डा. रामानंद यादव अभी फतुहा (Fatuha) से राजद (RJD) के विधायक हैं. 1995 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा (Naveen Kishore Prasad Sinha) ने पटना पश्चिम में भाजपा का सिक्का ऐसा जमा दिया कि लाख कोशिशों के बाद भी विपक्ष उसे शिकस्त नहीं दे पा रहा है. इस क्षेत्र में गैर भाजपाई दल 31 वर्षों से भाजपा को पछाड़ने के लिए प्रयासरत हैं, कभी मात नहीं दे पाये हैं. नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की 1995, 2000 और 2005 के दोनों यानी लगातार चार चुनावों में जीत हुई.
विरासत को विस्तार दिया
अक्तूबर 2005 के चुनाव के कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया. 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हुआ. भाजपा की उम्मीदवारी उनके इकलौते पुत्र नितिन नवीन को मिली. शानदार जीत हासिल करते हुए उन्होंने विरासत को बखूबी विस्तार दिया. उपचुनाव के बाद पटना पश्चिम का नाम बदल गया. बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र हो गया. नितिन नवीन ने 2010, 2015, 2020 और 2025 के चुनावों में लगातार धमाकेदार जीत दर्ज की. इस दृष्टि से यह माना जा सकता है कि नितिन नवीन का पुश्तैनी विधानसभा क्षेत्र बांकीपुर भाजपा का अभेद्य गढ़ (BJP’s Impregnable Stronghold) बना हुआ है. विश्लेषकों की समझ में यहां उसे पछाड़ना असंभव नहीं, तो कठिन अवश्य है.
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जनसुराज की जीत हुई तब…
ऐसा भी नहीं कि इतिहास बदलता नहीं है. बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का भी बदल सकता है. प्रशांत किशोर प्रयत्न करते हैं, तो उन्हें क्षेत्र के राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों (Political and Social Equations) की गूढ़ता को समझ कर ही रणनीति बनानी होगी. तब भी कामयाबी मिल ही जायेगी, यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता. वैसे, वह क्या करते हैं, क्या नहीं यह उनका निजी मामला है. खुदा न खास्ता बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा हार गयी और जीत जन सुराज की हुई तो और कुछ नहीं सही, 2029 के संसदीय चुनाव के लिए बाजार सजाने का मजबूत आधार तो उसे मिल ही जायेगा.

