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जामुन : हैं बड़े-बड़े औषधीय गुण

जामुन में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज की मात्रा बहुत कम होती है. शुक्रोज के नहीं के बराबर रहने के कारण मधुमेह पीड़ितों के लिए यह आदर्श फल माना जाता है. इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है. पुरानी और गंभीर बीमारियों से रक्षा करने, पाचन क्रिया को सुधारने और कब्ज, आंतों के विकार, जी मिचलाना, दस्त और पेचिश जैसी पेट से संबंधित समस्याओं को कम करने में यह कारगर होता है.

– महाभारत के आरण्यक पर्व में है जामुन का वर्णन
– शरीर को शीतलता प्रदान करने वाला फल है जामुन
– त्वचा और बालों के लिए भी बेहद उपयोगी है
– हीम्योग्लोबिन के स्तर में सुधार लाता है.

तापमान लाइव ब्यूरो
15 जुलाई 2026

New Delhi: आयुर्वेद शास्त्र के मुताबिक औषधीय (Medicinal ) गुणों से परिपूर्ण जामुन (Jamun) को सनातन धर्म में ‘दैवीय फल’ (Divine fruit) की मान्यता मिली हुई है. जामुन खाने से मधुमेह (Diabetes) नियंत्रित रहता है. त्वचा चमकदार दिखती है और पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है. महत्वपूर्ण बात यह भी कि सिर्फ जामुन फल ही नहीं उसकी गुठली और उसके पेड़ का हर हिस्सा उपयोगी होता है. इस पेड़ की छाल पाचन-तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करती है. यह कृमिनाशक होती है और आंतों को मजबूती प्रदान करती है. बृहत्संहिता, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और महाभारत (Mahabharat) के आरण्यक पर्व में जामुन के पेड़ का उल्लेख है. रामायण (Ramayan) में भी इसका जिक्र है. ऐसा माना जाता है कि भगावन राम, लक्ष्मण और माता सीता ने वनवास के दौरान काफी मात्रा में जामुन खाये थे. इस आधार पर इसे देवाताओं का फल भी कहा जाता है.

हर हिस्सा उपयोगी है

जामुन शरीर को शीतलता प्रदान करनेवाला फल है. मधुमेह नियंत्रित रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. जामुन से वाइन और सिरका (Wine and Vinegar) भी बनाया जाता है. कहते हैं कि इसका सिरका बहुत पौष्टिक होता है. इसमें गैस से निजात दिलानेवाले गुण भी मौजूद रहते हैं. आर्युवेद (Ayurveda) में अतिसार की समस्या में इसकी पत्तियां और छाल बहुत गुणकारी मानी गयी है. इसकी गुठली का चूर्ण बार-बार पेशाब आने की समस्या में काफी उपयोगी होता है. चूंकि जामुन के पेड़ की लकड़ी पानी खूब सहन करती है. इस कारण निर्माण कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है. जामुन की छाल का उपयोग चमड़ा रंगने में भी होता है.

उनके लिए है आदर्श फल

जामुन में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज (Glucose and Fructose) की मात्रा बहुत कम होती है. शुक्रोज (Sucrose) के नहीं के बराबर रहने के कारण मधुमेह पीड़ितों के लिए यह आदर्श फल माना जाता है. इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है. पुरानी और गंभीर बीमारियों से रक्षा करने, पाचन क्रिया को सुधारने और कब्ज, आंतों के विकार, जी मिचलाना, दस्त और पेचिश जैसी पेट से संबंधित समस्याओं को कम करने में यह कारगर होता है.

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विटामिन-सी का बड़ा स्रोत

जामुन विटामिन-सी का बहुत बड़ा स्रोत भी है. इसमें मौजूद विटामिन-सी या एस्कॉर्बिक एसिड के एंटीऑक्सीडेंट गुण घावों को जल्दी भरने में मदद करते हैं. साथ ही दांतों, हड्डियों और कार्टिलेज को मजबूत बनाते हैं. विटामिन-सी के कारण यह त्वचा और बालों के लिए भी बेहद उपयोगी माना जाता है. इसमें आयरन की अच्छी मात्रा होती है. एनीमिया (Anemia) पीड़ित व्यक्तियों को जामुन खाने की विशेष सलाह दी जाती है. इसमें मौजूद आयरन रक्त को शुद्ध करने, लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने और हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) के स्तर में सुधार लाने में मदद करता है.

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