Shankh : शंख विदेशों में भी है संग्रहणीय

तापमान लाइव ब्यूरो
29 जुलाई 2026
New Delhi : शंखों के संग्रह का शौक बहुत पुराना है. आदिम युग से ही लोग इसका संग्रह करते रहे हैं. फ्रांस (France) की क्रो- मेगनन गुफाएं (Cro-Magnon caves) इसके प्रमाण हैं. जिससे विभिन्न किस्मों के सैकड़ों शंख (shankh) प्राप्त हुए हैं, फ्रांस की ये गुफाएं पचीस हजार साल पुरानी है. इसी तरह रोम (Rome) के पाम्पेई नगरी (paampei nagari) की खुदाई से भी शंखों का अद्वितीय और अभूतपूर्व संग्रह प्राप्त हुआ है. भारत (India) में शंख को धार्मिक महत्व प्राप्त है, इसलिए इसे घर-धर में पवित्र वस्तु के तौर पर रखा जाता है. लेकिन, विदेशों (Foreign countries) में यह अपनी विशिष्ट बनावट और आकर्षक कलात्मकता के कारण संग्रहणीय बन गया है. इसके संग्रह से न केवल ख्याति और सम्मान अर्जित होता है, बल्कि धनार्जन का भी माध्यम बन सकता है.
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होता था पहले व्यापार
ईसा के कोई एक हजार साल पहले शंखों का व्यापार (Business) भी हुआ करता था. शंखों के व्यापारी अफ्रीका (Africa) से इंगलैंड (England) तक इसका व्यापार किया करते थे. फ्रांस की क्रो-मेगनन गुफाओं में प्राप्त होने वाले शंख हिन्द महासागर (Hind Mahasagar) में पाये जाने वाले शंखों से मेल खाते हैं. इससे लगता है कि वे यहीं से ले जाये गये थे. शंख वस्तुतः समुद्र (Samudra) में पाये जानेवाले एक प्राणी का खोल होता है. जो अत्यंत सख्त होता है. अपनी कलात्मकता के लिए यह मनुष्यों में अधिक लोकप्रिय रहा है.
(यह आस्था और विश्वास की बात है. मानना और न मानना आप पर निर्भर है.)
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