तापमान लाइव | Tapmanlive

न्यूज़ पोर्टल | Hindi News Portal

Lokarpan : ‘चिकन नेक के संरक्षक’… सीमावर्ती क्षेत्र की चुनौतियों का जीवंत दस्तावेज

तापमान लाइव ब्यूरो
03 अक्तूबर 2026
Kishanganj : भारत (India) की सुख्यात आध्यात्मिक गुरु, राष्ट्रवादी विचारक, समाज सुधारक और ओजस्वी वक्ता साध्वी ऋतम्भरा (Sadhvi Ritambhara), जिन्हें लोग आदर से ‘दीदी मां’ कहते हैं, का हाल में ठाकुरगंज (Thakurganj) आगमन हुआ. नब्बे के दशक के श्रीराम जन्मभूमि (Shri Ram Janmabhoomi) आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाली ‘ममतामयी मां’ साध्वी ऋतम्भरा को किशनगंज (Kishanganj) जिले के इस अतिसंवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में खुद के बीच देख सनातनी समाज भावविभोर हो उठा. देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित साध्वी ऋतम्भरा का चरण कमल पहली बार ठाकुरगंज में पड़ा था. लोगों ने शुद्ध हृदय से श्रद्धा व सम्मान के साथ उनका वंदन- अभिनंदन किया. परम शक्ति पीठ सेवा प्रकल्प एवं वात्सल्य सेवा केन्द्र के तत्वावधान में स्थानीय गांधी मैदान में आयोजित दिव्य दर्शन एवं आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी ऋतम्भरा ने राष्ट्रभक्ति, सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता एवं सद्भाव का संदेश दिया.

इसी भव्य आध्यात्मिक समागम में उन्होंने नेपाल (Nepal) और बंगलादेश (Bangladesh) से संबद्ध भारत के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र, जिसे ‘चिकन नेक’ (Chicken’s Neck) कहा जाता है, की परिस्थितियों और सुरक्षात्मक पहलुओं पर आधारित ‘चिकन नेक के संरक्षक’ पुस्तक का लोकार्पण किया. वैसे तो यह पुस्तक समाजवादी व समाजसेवी की बड़ी पहचान रखने वाले सूरजापुरी विकास मोर्चा (Surjapuri Vikas Morcha) के संस्थापक ताराचंद धानुका (Tarachand Dhanuka) के संघर्षमय और प्रेरणादायी जीवन, उनके संकल्पों तथा देश के सबसे संवेदनशील हिस्से से जुड़े अनुभवों पर आधारित उनकी जीवनी है, पर इसमें ‘चिकन नेक’ सामरिक दृष्टिकोण से भारत के लिए क्यों और कितना महत्वपूर्ण है, उस पर भी गहन दृष्टि डाली गयी है.

यह इस सीमावर्ती क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और रणनीतिक चुनौतियों को समझने और देश की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखने में स्थानीय लोगों की भूमिका को रेखांकित करती है. ‘चिकन नेक’ उस गलियारे को कहा जाता है जो किशनगंज से आगे देश के पूर्वाेत्तर हिस्से को शेष भारत से जोड़ने का ‘इकलौता जमीनी मार्ग’ है. इसे ‘सिलीगुड़ी कारिडोर’ (Siliguri Corridor) के नाम से भी जाना जाता है. तकरीबन 60 किलोमीटर लंबा और 22 किलोमीटर चौड़ा यह इलाका पूर्वाेत्तर भारत के लिए ‘जीवनरेखा’ है. इसके आसपास लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चार देशों- भूटान, नेपाल, बंगलादेश और चीन की सीमाएं हैं. ऐसे में ‘चिकन नेक’ में कोई गंभीर समस्या उत्पन्न होती है, तो उससे भारत का पूर्वाेत्तर भाग से जमीनी संपर्क तो टूट ही जा सकता है, सामरिक सुरक्षा भी सीधे तौर पर प्रभावित हो जा सकती है. इस दृष्टि से राष्ट्रीय अखंडता के लिए यह कितना महत्व रखता है, इसे बड़ी सहजता से समझा जा सकता है.

‘चिकन नेक के संरक्षक’ पुस्तक हिन्दी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषा में प्रकाशित है. पुस्तक की रचयिता नुपूर ढींगरा (Nupur Dhingra) हैं. अंग्रेजी संस्करण के लेखक संजय लुनिया (Sanjay Lunia) हैं. ठाकुरगंज के आध्यात्मिक समागम में पुस्तक का लोकार्पण करती हुईं साध्वी ऋतंभरा ने समाज के समक्ष कई महत्वपूर्ण विचार रखे. उन्होंने ‘चिकन नेक के संरक्षक’ पुस्तक की भूरि-भूरि प्रशंसा की. इसे सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों को समझने वाला जीवंत दस्तावेज बताया. ताराचंद धानुका के राष्ट्रप्रेम और सामाजिक एकता के प्रयासों की भी उन्होंने खूब सराहना की. कहा कि एक व्यक्ति जब निश्चय करता है, संकल्पवान होता है तो दुनिया की कोई ताकत उसे रोक नहीं पाती है. ताराचंद धानुका का जीवन ऐसी ही प्रेरणाओं से भरा है. साध्वी ऋतम्भरा ने ताराचंद धानुका के पुत्र विधायक (MLA) गोपाल कुमार अग्रवाल (Gopal Kumar Agarwal) को इसी परम्परा का संवाहक बताया.

साध्वी ऋतम्भरा ने सीमावर्ती क्षेत्र (Border area) के लोगों को इस पुस्तक को पढ़ने और वहां की परिस्थितियों को गहराई से समझने का सुझाव दिया. उन्होंने संदेश दिया कि यदि समृद्धि, सफलता और सद्भावना में से किसी एक को चुनना हो, तो हमेशा सद्भावना को चुनना चाहिए. सद्भावना मजबूत होने से समृद्धि अपने आप आती है. ‘दीदी मां’ ने जोर देकर कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें सनातन धर्म और राष्ट्रभक्ति का संस्कार बोना भी बेहद आवश्यक है. साध्वी ऋतंभरा ने समाज से ‘केकड़ा प्रवृत्ति’ यानी एक-दूसरे को पीछे खींचने की आदत को त्यागकर राष्ट्र की सुरक्षा और सामाजिक समरसता के लिए एकजुट होने का आह्नान किया. अपनी इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक यात्रा के दौरान साध्वी ऋतंभरा ने पवित्र सावन माह की दूसरी सोमवारी पर ठाकुरगंज के प्रसिद्ध हरगौरी मंदिर (Hargauri Temple) में भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की और जलाभिषेक किया.

Tapmanlive