नालंदा जिला कांग्रेस : यह भी एक बड़ा कारण रहा ‘हल्ला बोल’ का

अरुण कुमार मयंक
22 जून 2025
Biharsharif : विधानसभा चुनाव पर इसका असर क्या पड़ेगा यह वक्त बतायेगा, बुधवार को नेताओं-कार्यकर्ताओं के एक तबके ने ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम के तहत जिला कांग्रेस कार्यालय (Congress Office) राजेन्द्र आश्रम में जिस ढंग से उधम मचाया उससे यह स्थापित हो गया कि नालंदा में कांग्रेस सीधे तौर पर दो गुटों में बंट गयी है. एक गुट जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश प्रसाद अकेला के समर्थकों का है तो दूसरा पूर्व जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार के समर्थकों का. ऐसा कहा जाता है कि राजेन्द्र आश्रम (Rajendra Ashram) में उधम मचाने वाले दिलीप कुमार के समर्थक थे.
दो मुद्दे थे ‘हल्ला बोल’ के
बात अब ‘हल्ला बोल’ की. प्रखंड कांग्रेस अध्यक्षों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के दो मुद्दे थे. एक जेल में बंद नीट पेपर लीक (Neet Paper Leak) मामले के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया (Sanjeev Mukhiya) के गांव-घर के रिश्ते में भतीजा को 06 जून 2025 को राजगीर के कार्यक्रम में कांग्रेस के अघोषित सुप्रीमो राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मिलवाना और समर्पित कांग्रेसियों को मिलने नहीं देना. दूसरा नालंदा जिला कांग्रेस की नयी कमेटी में पूर्व की कमेटी के पदधारियों को जगह नहीं देना. ‘हल्ला बोल’ के आयोजकों का आरोप रहा कि संजीव मुखिया के भतीजा को पैसे लेकर राहुल गांधी से मिलवाया गया.
निकाल दिया पार्टी से
आम कांग्रेसजनों को दूर-दूर रखा गया. दूसरी तरफ जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश प्रसाद अकेला ने इस आरोप को यह कह खारिज कर दिया कि इसमें जिला कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं थी. जानकारों के मुताबिक सब कुछ ऊपर से तय होता है. आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह है, राजेन्द्र आश्रम में उधम मचाने के मामले में जिला कांग्रेस ने अनुशासनिक कार्रवाई की है. ‘हल्ला बोल’ में शामिल तमाम प्रखंड काग्रेस अध्यक्षों को पार्टी से निकाल दिया है. दिलीप कुमार, रवि ज्योति कुमार और जितेन्द्र प्रसाद सिंह उर्फ जीतू महतो समेत कई नेताओं के खिलाफ समुचित कार्रवाई के लिए प्रदेश कांग्रेस से अनुशंसा की है. इस अनुशंसा के आलोक में कार्रवाई तय मानी जा रही है. मतलब कि दिलीप कुमार, रवि ज्योति कुमार और जितेन्द्र प्रसाद सिंह उर्फ जीतू महतो भी कांग्रेस से निकाले जा सकते हैं.

अध्यक्ष का तीन कार्यकाल
दिलीप कुमार लंबे समय से जिला कांग्रेस के अध्यक्ष थे. तीन कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद पदमुक्त हो गये. प्रतिद्वंद्वियों के मुताबिक इसके बाद भी कांग्रेस संगठन पर बर्चस्व बनाये रखने का हरसंभव जतन करते रहे हैं. अब भी कर ही रहे हैं. जिला कांग्रेस कार्यालय पर ‘हल्ला बोल’ को उसी का हिस्सा माना जा रहा है. कहते हैं कि बर्चस्व बनाये रखने के उनके प्रयास के तहत ही तकरीबन साल भर पहले पूर्व विधायक रवि ज्योति कुमार (Ravi Jyoti Kumar) को जिला अध्यक्ष का पद मिला था . लेकिन, दिलीप कुमार का मंसूबा फलीभूत नहीं हो पाया. रवि ज्योति कुमार ने जिला अध्यक्ष (District president) का पद ठुकरा उन्हें धीरे से जोर का झटका दे दिया. हालांकि, इस रूप में दिलीप कुमार को थोड़ा सुकून अवश्य मिला कि रवि ज्योति कुमार के इनकार के बाद जिला कांग्रेस की कमान उनके ही खासमखास जितेन्द्र प्रसाद सिंह उर्फ जीतू महतो को मिल गया. पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर नहीं, कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में.
कुछ चल नहीं पाया
कहा जाता है कि दिलीप कुमार ने जितेन्द्र प्रसाद सिंह उर्फ जीतू महतो को पूर्णकालिक अध्यक्ष बनवाने के लिए खूब जोर लगाया. लेकिन, कुछ चल नहीं पाया. अध्यक्ष का पद नरेश प्रसाद अकेला को मिल गया. दिलीप कुमार को यह रास नहीं आया. विश्लेषकों की मानें तो इस झंझट के मूल में जिला कांग्रेस संगठन पर बर्चस्व बनाये रखना तो मुख्य मुद्दा है ही, कुर्मी जाति की दो बड़ी उपजातियों का अहं भी एक महत्वपूर्ण कारक है. क्षेत्रीय राजनीति की गहन जानकारी रखने वालों के मुताबिक नालंदा जिले में कोचैसा कुर्मियों की संख्या अधिक है. लेकिन, इस उपजाति से जिला कांग्रेस का अध्यक्ष कभी नहीं बनाया गया.
नहीं सुहा रहे उन्हें
आमतौर पर घमैला कुर्मी नेता ही उस पद पर काबिज होते रहे हैं. कोचैसा कुर्मी के लिए एकाध बार अवसर बना भी तो साजिशन वैसा होने नहीं दिया गया. पहली बार कोचैसा उपजाति के नरेश प्रसाद अकेला नालंदा जिला कांग्रेस का अध्यक्ष बने हैं. वह हिलसा प्रखंड क्षेत्र के चंदू बिगहा गांव के रहने वाले हैं. कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्त्ता रहे हैं. सामान्य समझ में कोचैसा होने के कारण घमैला कांग्रेस नेताओं को नहीं सुहा रहे हैं. राजेन्द्र आश्रम में ‘हल्ला बोल’ का यह भी बड़ा कारण था. हालांकि, ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम के आयोजक इसे बकवास बताते हैं.

