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हिन्दी में ली शपथ : बड़े परिजनों के छूए पांव

तापमान लाइव ब्यूरो
25 नवम्बर 2025

New Delhi : न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice) बन गये. 24 नवम्बर 2025 को राष्ट्रपति (President) द्रोपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने उन्हें पद और गोपनीयता (Position and privacy) की शपथ दिलायी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत (Justice Suryakant) ने न्यायमूर्ति बी आर गवई (Justice B R Gavai) के प्रधान न्यायाधीश पद से अवकाश ग्रहण के बाद यह पद संभाला है. उन्होंने हिन्दी (Hindi) में शपथ (Oath) ले देश के ऐसे प्रथम प्रधान न्यायाधीश (First Chief Justice) बनने का सौभाग्य प्राप्त किया.

उनकी मौजूदगी ने ध्यान खींचा

महत्वपूर्ण बात यह भी कि शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने परिवार के बड़े सदस्यों के पांव छूकर उनका आशीर्वाद लिया. इसे कहते हैं संस्कार! शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन (Vice President C P Radhakrishnan), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) और उनके कई सहयोगी मंत्री शामिल हुए. पहली बार कुछ देशों के प्रधान न्यायाधीशों की उपस्थिति ने लोगों का ध्यान खींचा. परन्तु, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) नजर नहीं आये. प्रधान न्यायाधीश के तौर पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत का कार्यकाल एक साल से थोड़ा ज्यादा का है. वह 09 फरवरी 2027 को अवकाश ग्रहण करेंगे. उन्हें 24 मई 2019 को सर्वाेच्च अदालत (Supreme Court) में न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. अपने कार्यकाल में वह कई अहम संवैधानिक फैसलों से जुड़े रहे हैं. उनमें अनुच्छेद 370 को हटाना, बिहार की मतदाता सूची (Voter List) में बदलाव और पेगासस स्पाइवेयर के मामले शामिल हैं.

तीन सौ से ज्यादा फैसले सुनाये

10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार (Hisar) के नरनौंद (Narnaund) क्षेत्र के पेटवार (Patwar) गांव में जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्कूली शिक्षा गांव में ही प्राप्त की थी. 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री हासिल की. उसी साल उन्होंने हिसार जिला न्यायालय (Hisar District Court) में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की. कुछ समय बाद वह चंडीगढ़ (Chandigarh) चले गये. वहां उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) में वकालत (Advocacy) की. तीन दशक बाद न्यायाधीश के तौर पर काम करते हुए उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (Kurukshetra University) से स्नातकोत्तर (Postgraduate) की डिग्री हासिल की. 48 साल की उम्र में वह सन् 2000 में हरियाणा के सबसे कम उम्र के महाधिवक्ता (Youngest Advocate General) बने. अगले साल उन्हें वरीय अधिवक्ता बनाया गया. 2004 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) के न्ययाधीश के पद पर नियुक्ति हुई. अक्तूबर 2018 से मई 2019 तक उन्होंने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (Himachal Pradesh High Court) के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला. सर्वाेच्च अदालत में न्यायाधीश रहते न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने तीन सौ से ज्यादा फैसले दिये हैं. उनमें कई हाई-प्रोफाइल संवैधानिक मामले भी शामिल हैं.

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