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बेचारे वर्मा जी! सेट कर दिया चौधरी, सिंह और झा ने…

विशेष प्रतिनिधि
25 नवम्बर 2025

Patna : राजनीति (Politics) में चलता है- सेट कर देना. इसके दो अर्थ निकलते हैं. एक- सकारात्मक. इसका अर्थ होता है कि किसी नेता ने अपने किसी चंपू को मनवांछित जगह पर बिठा दिया. दूसरा- नकारात्मक. इसका अर्थ होता है कि किसी नेता ने अपने दुश्मन के चंपू को बेदखल कर दिया. मतलब कि ठिकाने लगा दिया. साल भर तक वर्माजी के यहां खूब भीड़ लगी रही. सेट होने के लिए एक से एक चंपू पहुंचते रहे. वर्माजी सुबह-सुबह नहा धोकर आसन ग्रहण कर लेते थे. चंपू लोग अकेले या समूह में आते थे. यथा उम्र, कोई पैर धर लेता था. कोई हाथ मिलाता था. कोई गले मिल लेता था.

प्रशंसक मानते कहां थे…

वर्माजी का फोटोग्राफर बहुत ही सतर्क भाव से हर तरह के दृश्य को कैमरे में कैद करता था. उसे वर्माजी के फेसबुक (Facebook) पर टांग देता था. देखने वाले अपनी लिखित प्रतिक्रिया दर्ज करते थे. कोई-कोई उत्साह में लिख देता था-वर्माजी महान हैं. राज्य के भावी…हैं. हर किसी को अपनी प्रशंसा अच्छी लगती है. वर्माजी को भी लगती है. मीठी-मीठी बातें लिखने वाले प्रशंसक (Fan) को वह उतनी ही मीठी झिड़की भी देते थे-ये सब लिखना ठीक नहीं है. इससे मेरा नुकसान हो जायेगा. मेरा नुकसान होगा तो आपका भी नुकसान होगा. ऐसा मत कीजिये. लेकिन, प्रशंसक मानते कहां थे. देते रहते थे.

पेज छोटा पड़ने लगा

इसी तरह चुनाव (Election) का समय आ गया. उनके घर पर अचानक सेट होनेवालों की भीड़ लगने लगी. फेसबुक का पेज छोटा पड़ने लगा. सेट होने के इच्छुक हरेक सज्जन का बायोडाटा (Biodata) लिया जाने लगा. संबंधित क्षेत्रों का डाटा जुटाया जाने लगा. राय बनी कि इतने लोगों को सेट कर दिया जाये कि विधायक दल (Legislative Party) में अगर नेता चयन की नौबत आये तो वर्माजी टाप पर रहें. वह जो भाजपा (BJP) की सभाओं में मोदी-मोदी का नारा लगता है न. उसी तरह विधायक दल की बैठक में वर्मा-वर्मा का नारा लगने लगे. सब कुछ तय एजेंडा के हिसाब से चल रहा था.

मामला उलट गया

इसी बीच टिकट वितरण (Ticket Distribution) का मौसम आ गया. वर्माजी के पास हरेक विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवारों का नाम था. एक सीट के लिए तीन-तीन नाम. वर्माजी ने सूची सौंप दी. लेकिन, मामला उलट गया. उम्मीदवारों का नाम तय करने के लिए जो बैठक बुलायी गयी, उसमें वर्माजी को बुलाया ही नहीं गया. बैठक में शामिल नेताओं में से वर्माजी ने बातचीत की. सूची के बारे में पूछा. उल्टे पूछा गया कि किस सूची की बात कर रहे हैं. आपकी कोई सूची बैठक में नहीं रखी गयी. वर्माजी ने सकुुचाते हुए कहा कि उसी सूची में मेरा भी नाम था. क्या मेरे नाम की भी चर्चा नहीं हुई. उत्तर मिला-ना. वर्माजी समझ गये. चौधरी, सिंह और झा ने उन्हें सेट कर दिया. बुझे मन से बेचारे दूसरों के लिए वोट मांगने निकल गये.

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