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भाजपा और नितिन नवीन : इसलिए कहा जा रहा मास्टर स्ट्रोक

नितिन नवीन की तैनाती सिर्फ नये चेहरे की तलाश नहीं है. यह आगामी सियासी दंगलों की लामबंदी भी है. सामने पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव है. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व युद्धस्तरीय अभियान में जुटा है. सामाजिक समीकरणों का गहन विश्लेषण करते हुए उन जाति, धर्म और वर्गों को चिन्हित किया गया है, जो सरकार बनाने या नहीं बनने देने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

विभेष त्रिवेदी
30 दिसम्बर 2025

Patna : जहां देश में अधिकांश पार्टियों पर पुश्त-दर-पुश्त एक ही परिवार का कब्जा है, वहीं भाजपा (BJP) में नेतृत्व बदलता रहता है. साधारण पृष्ठभूमि का कार्यकर्ता अपनी काबिलियत और छवि की बदौलत प्रधानमंत्री (Prime Minister) और राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) की कुर्सी पर बैठ सकता है. नितिन नवीन इसके ताजा उदाहरण हैं. यह सच है कि दिवंगत विधायक नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का पुत्र होने की वजह से उन्हें विधानसभा के उपचुनाव में पहली बार भाजपा की उम्मीदवारी मिली थी, परन्तु उसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत, संगठन कौशल और शालीनता की बदौलत ऊंचाइयों को छुआ. उनकी पहली उम्मीदवारी का किस्सा भी कुछ अलग तरह का है. नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेता शोक संवेदना प्रकट करने उनके घर गये थे. भाजपा के कुछ नेता चाहते थे कि नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की विधवा को उपचुनाव में उम्मीदवार बना दिया जाये और धीरे-धीरे इस परिवार की दावेदारी समाप्त हो जाये.

मुड़कर पीछे नहीं देखा

उसी दौरान डा. सीपी ठाकुर (Dr. CP Thakur) के साथ राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) भी उनके आवास पर पहुंचे थे. डा. सीपी ठाकुर के नितिन नवीन को उम्मीदवार बनाने के सुझाव पर राजनाथ सिंह ने गौर किया. नितिन नवीन (Nitin Naveen) ने कहा उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई चल रही है. डा. सीपी ठाकुर ने पीठ पर हाथ रखते हुए कहा, सब हो जायेगा. पटना पश्चिम सीट पर 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन जीत गये. उसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा. इसमें किसी को संदेह नहीं है कि वह राष्ट्रीय फलक पर अपने संगठन कौशल, सूझ-बूझ और सक्रियता से पैर जमायेंगे और आने वाले समय में उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय है. यह सौभाग्य उन्हें 20 जनवरी 2026 के आसपास प्राप्त हो जाये, तो वह अचरज की कोई बात नहीं होगी.

लग जायेगा तब विराम

भाजपा में एक नये युग का सूत्रपात हो चुका है. आने वाले समय में जब यह ‘लिटिल ब्वॉय’ अहम बैठकों में पूरे आत्मविश्वास और शक्ति के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) और मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के बगल में बैठा दिखेगा, तो तमाम भ्रांतियों और अटकलबाजियों पर स्वतः विराम लग जायेगा. अब यह जानिये कि बंगाल के चुनाव में जातीय समीकरण साधने के उद्देश्य से कायस्थ समाज के नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा का मास्टर स्ट्रोक क्यों कहा जा रहा है? राजनीति में जातीय समीकरण को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है, परन्तु भाजपा बीच-बीच में यह साबित करती रहती है कि यह पार्टी किसी एक जाति की नहीं है. भाजपा वह टकसाल है, जिसमें नये चेहरे तलाशने-तराशने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है.

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सिर्फ नये चेहरे की तलाश नहीं

नितिन नवीन की तैनाती सिर्फ नये चेहरे की तलाश नहीं है. यह आगामी सियासी दंगलों की लामबंदी भी है. सामने पश्चिम बंगाल (West Bengal) का विधानसभा चुनाव है. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व युद्धस्तरीय अभियान में जुटा है. सामाजिक समीकरणों का गहन विश्लेषण करते हुए उन जाति, धर्म और वर्गों को चिन्हित किया गया है, जो सरकार बनाने या नहीं बनने देने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. किस-किस जाति-वर्ग की सामाजिक-राजनीतिक हैसियत है? आजादी के बाद के वर्षों में सरकार बनाने में किन जातियों की निर्णायक भूमिका रही है? भाजपा को बहुमत का आंकड़ा छूना है तो किस-किस जाति को ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) एवं वामपंथी दलों (Leftist Parties) से तोड़कर खुद से जोड़ना है? भाजपा का लक्ष्य 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में 148 के लक्ष्य तक पहुंचना है.

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नजर भद्रलोग पर

लक्ष्य आसान नहीं है, लेकिन संघ और भाजपा बंगाल फतह के लिए करो या मरो की रणनीति पर काम कर रही है. भाजपा मुसलमानों को छोड़कर 72 प्रतिशत हिन्दू समाज की प्रमुख जातियों का समर्थन जुटाने के लिए अलग-अलग ढंग से काम कर रही है. भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में 18 प्रतिशत वोट शेयर की बदौलत 77 सीटें हासिल की थी. ममता बनर्जी ने बंगाली स्मिता को हवा देकर 213 सीटों पर कब्जा जमाया. उसी बंगाली स्मिता को अपनी ओर मोड़ने के लिए भाजपा की नजर भद्रलोक पर है. हिमाचल (Himachal), सिक्किम (Sikkim) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चुनावों में माइक्रो मैनेजमेंट में दक्षता हासिल कर चुके नितिन नवीन जब पश्चिम बंगाल के मैदान में उतरेंगे तो सिर्फ भद्रलोक ही नहीं, सियासत में हस्तक्षेप रखने वाले हर हिन्दू समाज को मोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

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(विभेष त्रिवेदी बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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