Bihar Politics : ताकते रह गये… दिल व दिमाग दोनों है सही

कभी-कभी वह जरूर दूसरी अवस्था में चले जाते हैं. लेकिन, बाकी समय ठीक ही रहते हैं. हां, किसी कार्यक्रम के बीच में अगर झटका आ जाये तो कुछ बुरी हरकतें भी हो जाती हैं. जैसे-किसी महिला को माला पहना देना या हिजाब के बारे में पूछना कि ये क्या है?

विशेष प्रतिनिधि
30 दिसम्बर 2025
Patna : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के स्वास्थ्य (Health) के बारे में कई तरह की विरोधाभासी बातें बाहर आ रही हैं. सच क्या है, इसके बारे में मुश्किल से पांच-छह लोगों को जानकारी हो सकती है. क्योंकि सातवें-आठवें आदमी को उनके आसपास जाने नहीं दिया जाता है. करीब के लोग भी आत्मीयता से पूछने पर जो कुछ बता रहे हैं, उनमें आशा का कोई भाव नहीं रहता है. लेकिन, आश्चर्य यह देखकर होता है कि सरकार के निर्णयों में कोई विसंगति नजर नहीं आ रही है. विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में टिकट का बंटवारा हो या सरकार में विभागों का वितरण, इन्हें देखकर यही कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार का दिल और दिमाग-दोनों सही गति से काम कर रहा है.
अनायास नहीं हुआ यह
हाल की एक घटना ने इसे मजबूती से प्रमाणित किया कि नीतीश कुमार अपने अधिकार को लेकर अत्यधिक सतर्क हैं. राजगीर (Rajgir) में जो दीक्षांत समारोह (Convocation Eeremony) हुआ था, उसमें उनकी सतर्कता नजर आयी. इससे पहले के दीक्षांत समारोहों में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) जाते थे. पहली बार मुख्यमंत्री गये. परेड की सलामी ली और चले आये. न स्वयं कुछ बोले न किसी को बोलने दिया. पहले के समारोहों में स्वागत भाषण भी होता था. ऐसा क्यों हुआ? यह अनायास नहीं हुआ. जानकारों के अनुसार उपमुख्यमंत्री -सह-गृह मंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) को परेड की सलामी लेनी थी. तैयारी हो गयी थी.
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बर्दाश्त से बाहर की बात
यह जानकारी जब नीतीश कुमार को लगी तो वह जागृत हुए. नालंदा (Nalanda) और उसमें भी राजगीर (Rajgir) में सरकार का कोई दूसरा बंदा सलामी ले, यह बर्दाश्त से बाहर की बात थी. इसे रोका नहीं जा सकता था. रोकने पर उल्टा मैसेज जाता. इसलिए प्लान बना कि नीतीश कुमार परेड की सलामी लेंगे. गुह मंत्री (Interior Minister) का सारा प्लान धरा रह गया. उन्हें अच्छे बाबू की तरह साथ ले जाया गया. परेड वाली गाड़ी पर खड़ा होने का अवसर दिया गया. फिर उस गाड़ी को पैसेंजर गाड़ी बनाकर कई यात्रियों को सवार करा दिया गया. यह प्रोटोकाल (Protocol) के विरुद्ध था. लेकिन, नीतीश कुमार को रोकने वाला कोई माई का लाल अभी पैदा कहां हुआ है? सो वह नहीं रुके.
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धरा रह गया सपना
बेचारे गृह मंत्री सम्राट चौधरी का सपना धरा रह गया कि नीतीश कुमार के गृह जिले में परेड की सलामी (Parade Salute) लेकर वह राज्य की जनता को मैसेज देंगे कि देखो-यह किला भी हमने फतह कर लिया. अब सोचिये नीतीश कुमार विपक्ष के आरोप के अनुसार अचेत रहते तो यह संभव था क्या? करीबी लोग बताते हैं कि कभी-कभी वह जरूर दूसरी अवस्था में चले जाते हैं. लेकिन, बाकी समय ठीक ही रहते हैं. हां, किसी कार्यक्रम के बीच में अगर झटका आ जाये तो कुछ बुरी हरकतें भी हो जाती हैं. जैसे-किसी महिला को माला पहना देना या हिजाब (Hijab) के बारे में पूछना कि ये क्या है?
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