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छपरा जेल कांड : स्नातक सरगना… राज्य सत्ता का संरक्षण!

पुलिस गोली चालन में मारे गये सभी कैदी दुर्दांत थे. संजय राय 16, वकील राय 15, अक्षयवट सिंह 14, शशिभूषण सिंह 09 और अशोक उपाध्याय 08 आपराधिक मामलों में अभियुक्त था. सभी शातिर कैदी जेल के अंदर से भी गिरोह संचालित करते थे. वहां उनकी समानान्तर सत्ता थी. नककट्टा के नाम से चर्चित ‘स्नातक सरगना’ संजय राय का सारण और चंपारण के अपराध जगत में आतंक का सिक्का चलता था.

विष्णुकांत मिश्र
25 फरवरी 2026

Patna: उस वक्त बिहार (Bihar) में राबड़ी देवी के नेतृत्व में राजद (RJD) और कांग्रेस (Congress) की मिलीजुली सरकार थी. मामला विधानसभा में उठा. सरकार ने सदन को बताया कि पुलिस गोली चालन में मारे गये सभी कैदी दुर्दांत थे. संजय राय 16, वकील राय 15, अक्षयवट सिंह 14, शशिभूषण सिंह 09 और अशोक उपाध्याय 08 आपराधिक मामलों में अभियुक्त था. सभी शातिर कैदी जेल के अंदर से भी गिरोह संचालित करते थे. वहां उनकी समानान्तर सत्ता थी. नककट्टा के नाम से चर्चित ‘स्नातक सरगना’ संजय राय का सारण और चंपारण के अपराध जगत में आतंक का सिक्का चलता था. उस दौर में ऐसी चर्चा होती थी कि सारण के एक बहुचर्चित व वहुविवादित स्वजातीय पूर्व राजद सांसद का वह करीबी था और राज्य सत्ता से उसका सीधा संपर्क था.

जिला पार्षद बन गया

राबड़ी देवी (Rabdi Devi) की सरकार में शामिल दूसरे जिले के आपराधिक छवि के स्वजातीय मंत्री का भी उसे वरदहस्त प्राप्त था. तत्कालीन एक स्वजातीय राज्यमंत्री और विधायक का भी. कहा जाता है कि ऐसी ही राजनीतिक ताकतों के बल पर संजय राय 2001 में परसा (Parsa) क्षेत्र से सारण जिला परिषद (Saran District Board) का सदस्य निर्वाचित हुआ था. जानकार बताते हैं कि संजय राय की अपराध यात्रा की शुरुआत टुनाई सिंह की हत्या से हुई थी. ठेकेदारी के विवाद में उसने उसका काम तमाम कर दिया था. फिर तो अपराध की राह पर बेखौफ कदम बढ़ा सारण के पूर्वी क्षेत्र का आतंक बन गया. एक-दो दोहरे हत्याकांडों को भी अंजाम दिया.

मुठभेड़ में मार देने की थी योजना

1999 में सोन्हो बस पड़ाव (Bus Stop) के विवाद को लेकर भेल्दी पेट्रोल पंप पर एक साथ तीन भाइयों- श्यामबाबू राय, लालबाबू राय और बाबू राय को मौत की नींद सुला एकदम से बेलगाम हो गया. संजय राय के विरुद्ध सारण जिले के विभिन्न थानों में छोटे-बड़े दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे. पुलिस अधीक्षक (SP) कुन्दन कृष्णन (Kundan Krishnan) द्वारा गठित टास्क फोर्स ने 18 सितम्बर 2001 को नाटकीय ढंग से उसे गिरफ्तार कर लिया. इसमें भाजपा (BJP) के एक सांसद की भूमिका की भी खूब चर्चा हुई थी. कहते हैं कि गिरफ्तारी के बाद संजय राय को गांधी सेतु पर मुठभेड़ दिखा मार देने की योजना थी. कुछ दिन उसे और जीना था इसलिए तब बच गया था.

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