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क्रिकेट और भारत : युवा खिलाड़ियों में है दम… जीतेंगे फिर हम!

भारतीय क्रिकेट आज जिस मुकाम पर खड़ा है, वहां भविष्य को लेकर उम्मीदें पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल दिखाई देती है. युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास, भारतीय बेटियों का अद्भुत साहस और सीनियर पुरुष टीम की विजयी विरासत ये तीनों मिलकर एक ऐसे स्वर्णिम कल की तस्वीर बना रहे हैं, जिस पर हर भारतीय को गर्व हो सकता है.

शाश्वत सांकृत
23 फरवरी 2026

New Delhi : साल 2026 भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) के इतिहास में एक ऐसे अध्याय की तरह दर्ज हो रहा है, जहां जीत सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर पीढ़ी, हर वर्ग और हर मंच पर भारतीय परचम लहराता दिखाई दे रहा है. यह वह दौर है जब अनुभव, युवा जोश और नारी शक्ति, तीनों ने मिलकर भारत को क्रिकेट की विश्व महाशक्ति (Cricket’s world superpower) बना दिया है. अंडर-19 विश्व कप 2026 का फाइनल भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया और इस महामुकाबले में भारतीय टीम ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे वर्षों तक याद किया जायेगा. दोनों टीमें अपराजित रहते हुए फाइनल तक पहुंची थीं, इसलिए मुकाबले से पहले रोमांच चरम पर था. लेकिन, जब मैच खत्म हुआ, तो इतिहास के पन्नों पर फिर भारत का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जा चुका था. भारत छठी बार अंडर-19 विश्व कप विजेता बना. खिताबी मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही इरादे साफ कर दिया. टीम जीतने नहीं, बल्कि यादगार बनने उतरी थी.

एक बिहारी, सब पर भारी!

उस फाइनल मैच के सबसे चमकदार खिलाड़ी रहे वैभव सूर्यवंशी. उन्होंने ऐसी पारी खेली, जिसने न सिर्फ इंगलैंड के गेंदबाजों का आत्मविश्वास तोड़ा, बल्कि दुनिया को यह संदेश दे दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य पहले ही दस्तक दे चुका है. महज 80 गेंदों में 175 रन… 15 चौके, 15 छक्के और निडरता से भरी बल्लेबाजी. यह सिर्फ रन नहीं थे, यह आत्मविश्वास का प्रदर्शन था. मैदान पर उनका हर शॉट मानो कह रहा था…‘डर नाम की कोई चीज़ नहीं होती.’ जब एक किशोर खिलाड़ी विश्व कप फाइनल (World Cup Final) जैसे दबाव भरे मंच पर इतना परिपक्व खेल दिखाये, तो वह सिर्फ पारी नहीं रहती, वह घोषणा बन जाती है… अगला सुपरस्टार (Superstar) आ चुका है. दूसरे छोर से मिले अहम योगदानों ने भारत को विशाल स्कोर तक पहुंचाया और इंगलैंड (England) पर दबाव ऐसा बना कि वापसी की राह ही बंद हो गयी.

सम्मानित किया सरकार ने

भारतीय गेंदबाजों ने भी अनुशासन और रणनीति के साथ मुकाबले को अपने नियंत्रण में रखा. यह केवल ट्रॉफी की जीत नहीं थी… उस परंपरा की निरंतरता थी जिसने कभी विराट कोहली (Virat Kohli), रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और रवींद्र जडेजा (Ravendra Jadeja) जैसे सितारों को जन्म दिया था. आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) और आयुष म्हात्रे (Ayush Mhatre) जैसे नाम सामने हैं. वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी में युवराज सिंह (Yuvraj Singh) जैसी ताकत, क्रिस गेल (Chris Gayle) जैसी आक्रामकता और विराट कोहली जैसी टाइमिंग की झलक दिखाई दी. वह दिन अब दूर नहीं जब स्टेडियम उनके नाम से गूंजेंगे और लाखों युवा उन्हें अपना आदर्श मानेंगे. संभवतः इसी ख्याल से मुख्यमंत्री (CM) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने रविवार को पटना में वैभव सूर्यवंशी को 50 लाख रुपये का चेक और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया.

बेटियों की भी है बुलंद पहचान

युवा खिलाड़ियों ने भारत के भविष्य (Future of india) को रोशन किया है, तो भारतीय महिला टीम ने वर्तमान को गौरव से भर दिया है. हालिया महिला वनडे विश्व कप में भारत की बेटियों ने इतिहास रचते हुए दुनिया को दिखा दिया कि अब क्रिकेट के इस दौर में वे किसी से पीछे नहीं हैं. यह जीत केवल एक टूर्नामेंट की नहीं थी. यह वर्षों के संघर्ष, धैर्य और सपनों का प्रतिफल थी. जिन मंचों पर कभी पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ता था, आज वहीं भारतीय महिला खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ शिखर पर खड़ी हैं. सच तो यह है कि क्रिकेट की इस तेज रफ्तार यात्रा में भारत की बेटियां भी बराबरी से कदम मिला रही हैं, और भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में महिला क्रिकेट को पहले से कहीं अधिक सम्मान और बढ़ावा मिल रहा है. रविवार को स्टार स्पिनर राधा यादव (Radha Yadav) की अगुवाई में भारत ए ने महिला एशिया कप राइजिंग स्टार्स (Asia Cup Rising Stars) का खिताब जीत लिया. आज छोटी-छोटी लड़कियां बैट उठाते हुए सिर्फ खेल नहीं रहीं. सपनों की नयी परिभाषा लिख रही हैं.

इतिहास दोहरायेगा?

जब जूनियर और महिला टीमों ने विजय पताका फहरा दिया है, तो अब स्वाभाविक रूप से सबकी नजरें सीनियर पुरुष टीम पर टिक गयी हैं.2026 का टी-20 विश्व कप (T-20 World Cup) भारत की मेजबानी में खेला जा रहा है. टीम डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में मैदान पर है. 2024 में रोहित शर्मा और विराट कोहली ने जाते-जाते जो अमूल्य तोहफा देश को दिया था… टी-20 विश्व कप की ट्रॉफी, अब उसे बचाये रखने की जिम्मेदारी नयी पीढ़ी के कंधों पर है. कप्तान सूर्यकुमार यादव (Surya Kumar Yadav) की विस्फोटक बल्लेबाजी, हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) का हरफनमौला खेल, अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) और ईशान किशन (Ishaan Kishan) की आक्रामक शुरुआत… और गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah), अर्शदीप सिंह (Arshdeep Singh) और सिराज (Siraj) जैसी तेज धार !

थोड़ा डगमगा गयी है संभावना

कागज पर यह टीम किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए सबसे बड़ी चुनौती नजर आती है. वैसे, 2026 के टी-20 विश्वकप के सुपर-8 राउंड के अपने पहले मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका (South Africa) से हार जाने के बाद भारत की संभावना थोड़ा डगमगा अवश्य गयी है, पर चुनौती बनी हुई है. फिर भी एक सवाल हर क्रिकेट प्रेमी के मन में है- क्या विराट कोहली और रोहित शर्मा की कमी महसूस होगी? या फिर यही वह क्षण होगा जब भारतीय क्रिकेट एक नये युग में पूरी तरह प्रवेश करेगा?

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सुनहरे कल की दस्तक

भारतीय क्रिकेट आज जिस मुकाम पर खड़ा है, वहां भविष्य को लेकर उम्मीदें पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल दिखाई देती है. युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास, भारतीय बेटियों का अद्भुत साहस और सीनियर पुरुष टीम की विजयी विरासत ये तीनों मिलकर एक ऐसे स्वर्णिम कल की तस्वीर बना रहे हैं, जिस पर हर भारतीय को गर्व हो सकता है. पुरुष टीम सहित हमारे युवाओं और बेटियों ने जिस तरह मैदान पर कमाल किया है, उसने यह भरोसा और मजबूत कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट का सफर अभी और ऊंचाइयों की ओर बढ़ने वाला है. अब निगाहें टी-20 विश्व कप पर टिक चुकी हैं, और देश को उम्मीद ही नहीं, विश्वास है कि टीम इंडिया (Team India) चैंपियन (Champion) के रूप में उतरेगी और ट्रॉफी को सफलतापूर्वक डिफेंड करते हुए एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ेगी. शायद आने वाला समय यही कहे- भारतीय क्रिकेट का भविष्य सिर्फ उज्ज्वल नहीं, अजेय है.

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