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सवा साल बन गया काल- 4 : ‘सठिया’ गया गणपति… तब भी हो रही तलाश

इसे वैचारिक भटकाव कहें या फिर सैद्धांतिक बदलाव, ‘बंदूक को ही मुक्ति का मार्ग’ की जगह ‘केवल बंदूक से ही जनता की समस्याएं हल नहीं की जा सकतीं’ जैसी बातें संभवतः उसने ही कही थी. हथियार उठाने को सबसे बड़ी भूल मान जनता से माफी मांगने का सुझाव भी शायद उसी का था. उसकी उस पहल को संगठन में स्वीकृति मिलती, उससे पहले सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में उसकी मौत हो गयी.

महेश कुमार सिन्हा
14 मार्च 2026

New Delhi: भाकपा (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू (Nambala Keshavrao alias Basavaraju) की मौत के बाद सुरक्षा बलों ने ‘टॉप-टेन’ नक्सलियों (Naxalites) की सूची बनायी थी. उसमें पन्द्रह बड़े माओवादियों के नाम थे. अलग-अलग मुठभेड़ में आठ मारे गये. चार ने हथियार डाल दिये. एक जेल में बंद है तो एक अदृश्य है. ‘जनयुद्ध’ में सिर्फ एक सक्रिय है. इस तरह ‘टॉप-टेन’ सूची में अब सिर्फ दो माओवादी रह गये हैं. सुरक्षा बलों ने इन्हें भी निशाने पर ले रखा है. इस सूची में शीर्ष पर 01 करोड़ का इनामी भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य तथा केन्द्रीय समिति के सलाहकार 75 वर्षीय मुपल्ला लक्ष्मणराव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ गुडसा दादा है. तेलंगाना (Telangana) के करीमनगर जिले के वीरपुर जगतियाल के रहनेवाला मुपल्ला लक्ष्मणराव उर्फ गणपति (Mupalla Laxmanrao alias Ganapati) का जुड़ाव पीपुल्स वार ग्रुप से था. उस संगठन का वह महासचिव भी बना था.

सलाहकार में समेट दिया

21 सितम्बर 2004 को दो खूंख्वार नक्सली संगठन (Naxalite organization) पीपुल्स वार ग्रुप (People’s War Group) और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (MCC) के विलय से भाकपा (माओवादी) अस्तित्व में आया था. गणपति को ही नये संगठन का महासचिव बनाया गया था. लगातार 14 वर्षों तक महासचिव रहे गणपति की उम्र अधिक हो गयी, स्वास्थ्य जवाब देने लग गया तब नवम्बर 2018 में उसे सलाहकार की भूमिका में समेट उसकी जगह नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू को महासचिव का पद दे दिया गया. नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) के श्रीकाकुलम जिले के जियन्नापेटा गांव का रहने वाला था. वह भाकपा (माओवादी) के महासचिव के रूप में संगठन का सर्वोच्च नेता तो था ही, सेंट्रल मिलिट्री कमेटी के प्रमुख के रूप में गुरिल्ला दस्ते का भी नेतृत्वकर्ता था. बचे दो शीर्ष नेताओं में एक यही है. कहां छिपा है किसी को नहीं मालूम. ‘सठिया’ जाने के बाद भी सुरक्षा बलों को उसकी तलाश है.

पहल बसवराजू की

नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद संगठन में विघटन की स्थिति पैदा हो गयी. नक्सलवाद की खोखली हुई विचारधारा, उग्रवादियों के एक तबके के शोषण, अत्याचार और हिंसा से तंग आकर ‘हथियारी संघर्ष’ को त्याग समाज की मुख्य धारा में लौट जाने की पहल नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू ने ही की थी. इसे वैचारिक भटकाव कहें या फिर सैद्धांतिक बदलाव, ‘बंदूक को ही मुक्ति का मार्ग’ की जगह ‘केवल बंदूक से ही जनता की समस्याएं हल नहीं की जा सकतीं’ जैसी बातें संभवतः उसने ही कही थी. हथियार उठाने को सबसे बड़ी भूल मान जनता से माफी मांगने का सुझाव भी शायद उसी का था. उसकी उस पहल को संगठन में स्वीकृति मिलती, उससे पहले सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में उसकी मौत हो गयी.

किशनजी का है छोटा भाई

‘टॉप-टेन’ में दूसरे स्थान पर केन्द्रीय प्रवक्ता 70 वर्षीय मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय उर्फ भूपति (Mallojula Venugopal alias Abhay alias Bhupati) था. वह भी पोलित ब्यूरो और केन्द्रीय समिति का सदस्य था. सेंट्रल रिजनल ब्यूरो के सचिव की भी जिम्मेवारी मिली हुई थी. 14 अक्तूूबर 2025 को उसने महाराष्ट्र (Maharashtra) के गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया. तकरीबन 50 वर्षों तक भूमिगत रह नक्सली गतिविधियों (Naxalite Activities) को गति देने वाले तेलंगाना के करीमनगर जिले के पेद्दापल्ली शहर निवासी मल्लोजुला कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी (Mallojula Koteshwar Rao alias Kishanji) का वह छोटा भाई है. किशनजी 24 नवम्बर 2011 को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के पश्चिमी मिदनापुर में मुठभेड़ में मारा गया. किशनजी की पत्नी पोतुला पद्मावती उर्फ सुजाता उर्फ कल्पना उर्फ सुजातक्का उर्फ जानकी (Potula Padmavathi alias Sujatha alias Kalpana alias Sujathakka alias Janaki) और मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय की पत्नी विमला चन्द्र सिड़ाम उर्फ तारक्का (Vimala Chandra Sidam alias Tarakka) भी नक्सली थी. अलग-अलग समय में दोनों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. पोतुला पद्मावती उर्फ सुजाता उर्फ कल्पना ‘टॉप-टेन’ में 13वें स्थान पर थी.

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दरकिनार कर दिया गया

नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू की मौत के बाद मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय के संगठन का महासचिव बनने के कयास लगाये जा रहे थे. आधार वरीयता क्रम में शीर्ष पर रहना था. लेकिन, नंबाला केशवराव उर्फ बसवराजू की तरह सशस्त्र संघर्ष की राह छोड़ समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के उसके प्रयास के मद्देनजर सितम्बर 2025 के दूसरे सप्ताह में उसे दरकिनार कर अघोषित तौर पर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी को महासचिव बना दिया गया. दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (Dandakaranya Special Zonal Committee) के सचिव का पद दुर्दांत नक्सली माडवी हिड़मा को मिल गया. वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव का रहनेवाला था. (जारी)

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(महेश कुमार सिन्हा बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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