दरभंगा : महिला प्रौद्योगिकी संस्थान… गर्व है पूरे बिहार को

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विस्तारित परिसर में एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान संचालित है. यह इस विश्वविद्यालय की स्ववित्तपोषित इकाई है और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नयी दिल्ली से इसे मान्यता प्राप्त है. बिहार सरकार से भी स्वीकृति मिली हुई है. ऐसा माना जाता है कि उत्तर-पूर्व भारत में महिलाओं के लिए इस तरह का यह इकलौता संस्थान है.

शिक्षा प्रतिनिधि
16 मई 2026
Darbhanga: बिहार में महिला शिक्षा, विशेषकर तकनीकी (इंजीनियरिंग) क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा (LNMU, Darbhanga) के विस्तारित परिसर में एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान संचालित है. यह इस विश्वविद्यालय (University) की स्ववित्तपोषित इकाई है और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नयी दिल्ली (All India Council for Technical Education, New Delhi) से इसे मान्यता प्राप्त है. बिहार सरकार से भी स्वीकृति मिली हुई है. ऐसा माना जाता है कि उत्तर-पूर्व भारत में महिलाओं के लिए इस तरह का यह इकलौता संस्थान है. इसकी स्थापना 2004 में हुई थी. उसकी कहानी भी काफी महत्व रखती है. इस रूप में कि 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) की ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में गरिमामयी उपस्थिति हुई थी. उसी दरमियान उन्होंने छात्राओं की तकनीकी शिक्षा (Technical Education For Girls) के लिए महिला प्रौद्योगिकी संस्थान (Women’s Institute of Technology) खोलने की जरूरत बतायी थी.
2004 से हो रहा संचालन
डा. एपीजे अब्दुल कलाम के प्रति तब के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का काफी सम्मान भाव रहा है. राष्ट्रपति ने इच्छा व्यक्त की और नीतीश कुमार ने पहल शुरू कर दी. 2004 से ही ‘महिला प्रौद्योगिकी संस्थान’ के नाम से इसका संचालन होने लगा. औपचारिक उद्घाटन 30 दिसम्बर 2005 को डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने ही किया. उस वक्त भी वह राष्ट्रपति पद पर विराजमान थे. 17 दिसम्बर 2018 को महिला प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम बदलकर ‘डा. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान’ कर दिया गया. पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा (Padma Shri Manas Bihari Verma) इस संस्थान के प्रथम निदेशक बनाये गये थे. वह वैज्ञानिक थे और डा. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम कर चुके थे.
उत्कृष्ट संस्थान, है बड़ी पहचान
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 25 एकड़ भू-भाग में स्थित इस संस्थान में सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (CSE) तथा बायोइन्फोर्मेटिक्स (BI) विषयों में स्नातक स्तर का बी-टेक (B-Tech) पाठ्यक्रम और कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) के साथ ही स्नातकोत्तर स्तर का एमसीए (MCA) पाठ्यक्रम है. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की विज्ञान एवं भाषा प्रयोगशालाओं, संस्थान के अपने परस्पर जुड़े कंप्यूटर केन्द्रों, वाईफाई सुविधाओं, समृद्ध पुस्तकालय, छात्रावास की उपलब्धता और चिकित्सा की उत्तम व्यवस्था ने इसे एक उत्कृष्ट संस्थान की पहचान दे रखी है.
प्लेसमेंट का प्रतिशत अत्यंत संतोषप्रद
संस्थान की छात्राओं के रोजगार प्राप्ति (Placement) का प्रतिशत अत्यंत संतोषप्रद एवं सराहनीय है. यहां पढ़ीं अनेक छात्राएं देश-विदेश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (Multinational Companies) एवं कॉरपोरेट जगत (Corporate World) में उच्च पदों पर कार्यरत हैं. अन्य कई केन्द्र एवं राज्य सरकारों के अधीन भी महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं. प्रो. अजयनाथ झा एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक हैं. कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी (Prof. Sanjay Kumar Choudhary) के दूरदर्शिता भरे नेतृत्व में संस्थान नयी ऊंचाइयां छू रहा है. इसके सर्वांगीण विकास के तहत संस्थान में स्मार्ट क्लासेस, आधुनिक प्रयोगशालाओं, सुसज्जित सभागार एवं छात्रावासों का निर्माण कराया जा रहा है.
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जुड़े हैं विभिन्न ऐतिहासिक आयाम
कुलपति (Vice Chancellor) के निर्देशानुसार संस्थान में विभिन्न ऐतिहासिक आयामों को जोड़ा गया है. उनमें मुख्य रूप से छात्राओं के लिए उपयोगी ‘एनपीटीईएल/ स्वयं’ के लोकल चैप्टर की स्थापना एवं आईआईटी, बम्बई से संचालित कोर्स स्पोकन ट्यूटोरियल की उपलब्धता शामिल हैं. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि डा. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान सिर्फ एक शिक्षण संस्थान ही नहीं, नारी सशक्तीकरण (Women Empowerment), नवाचार (Innovation) और उत्कृष्टता (Excellence) का प्रतीक है. इस पर न सिर्फ मिथिला, बल्कि पूरे बिहार को गर्व है.
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