पुस्तक-परिचय : चिकन नेक के संरक्षक… गहरी चिंता और ठोस सुझाव

समीक्षक
24 मार्च 2026
सामरिक दृष्टि से भारत के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को लेकर फिर गंभीर विमर्श हो रहा है. इस महत्वपूर्ण भारतीय भू-भाग को राष्ट्र विरोधी तत्वों से सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर चिकन नेक (Chicken Neck) के संरक्षक कहे जाने वाले ताराचंद धानुका के जीवन पर संजय लूनिया जैन (Sanjay Lunia Jain) एवं नुपूर ढींगरा (Nupur Dhingra) द्वारा लिखी गयी पुस्तक ‘विकन नेक के संरक्षक’ में गहरी चिंता और ठोस सुझाव प्रस्तुत किये गये हैं. पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि चिकन नेक न केवल भौगोलिक दृष्टि से वल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक गतिविधियों और पूर्वाेत्तर भारत (Northeast India) की जीवनरेखा के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह संकरा गलियारा देश के पूर्वाेत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है. ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता या राष्ट्र विरोधी गतिविधि देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर चुनौती बन जा सकती है.
हमेशा बना रहता है खतरा
ताराचंद धानुका (Tarachand Dhanuka) की जीवनी के माध्यम से लेखक ने उनके दूरदर्शी विचारों, राष्ट्रभक्ति और चिकन नेक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर किये गये सतत प्रयासों को विस्तार से रखा है. पुस्तक में यह भी रेखांकित किया गया है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां घुसपैठ, तस्करी, अवैध गतिविधियों और राष्ट्र विरोधी ताकतों की सक्रियता का खतरा हमेशा बना रहता है. जीवनी में केंद्र एवं राज्य सरकारों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए आग्रह किया गया है कि चिकन नेक की सुरक्षा (Chicken Neck Protection) के लिए ठोस रणनीति, आधुनिक तकनीक, सशक्त खुफिया तंत्र और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाये. साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास कर वहां के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना भी आवश्यक बताया गया है. यह पुस्तक केवल एक व्यक्तित्व की कहानी नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े एक गंभीर मुद्दे पर चेतावनी और मार्गदर्शन का दस्तावेज है. लेखक का स्पष्ट संदेश है कि यदि समय रहते चिकन नेक की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता नहीं दी गयी, तो इसके दुष्परिणाम दूरगामी हो सकते हैं.
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