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मंत्रिमंडल-विस्तार : जदयू… इन सबका पत्ता साफ!

कुर्मी-कुशवाहा और धानुक समाज जदयू समर्थक सामाजिक समूह माने जाते हैं. नीतीश कुमार के मंत्रिमंडलों में इन सामाजिक समूहों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता रहा है. सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में भी वैसा ही महत्व मिलने की पूरी संभावना है.

तापमान लाइव ब्यूरो
05 मई 2026

Patna : सम्राट चौधरी के सत्ता में आने के 22वें दिन राज्य मंत्रिमंडल पूर्ण आकार ग्रहण करेगा. अभी मुख्यमंत्री के अलावा सिर्फ दो उपमुख्यमंत्री हैं, जो जदयू के हैं. 07 मई 2026 को गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi), केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah), जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar), भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Naveen) आदि गणमान्य लोगों की मौजूदगी में नये मंत्रियों को शपथ दिलायी जायेगी. सूत्रों के मुताबिक नये मंत्रियों में 15 भाजपा के, 14 जदयू के, 02 लोजपा (रामविलास) के और 01-01 ‘हम’ एवं रालोमो के होंगे. भाजपा के मंत्रियों में कुछ नये चेहरे हो सकते हैं. एकाध बदलाव के साथ जदयू पहले से जमे चेहरों पर ही भरोसा जतायेगा. कैसे और किस रूप में, यह जानिये.

इन्हें चाहते हैं नीतीश कुमार

विजय कुमार चौधरी (Vijay Kumar Choudhary) और विजेन्द्र प्रसाद यादव (Vijendra Prasad Yadav) उपमुख्यमंत्री के रूप में पहले से विराजमान हैं. धमदाहा (Dhamdaha) की विधायक लेसी सिंह की जगह भी पक्की मानी जा रही है. तब भी इन्हें मायूसी मिलती है तो वह बरौली (Baruli) के मंजीत कुमार सिंह की मुस्कान खिला दे सकती है. नये चेहरे के तौर पर ठाकुरगंज (Thakurganj) के विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल को अवसर मिल सकता है. कहते हैं कि किशनगंज (Kishanganj) जिले के इस इकलौते जदयू विधायक के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी गंभीर हैं. विजय कुमार चौधरी और विजेन्द्र प्रसाद यादव भी इनके पैरोकार बताये जाते हैं.

बनना लगभग तय

कुर्मी-कुशवाहा और धानुक समाज जदयू समर्थक सामाजिक समूह माने जाते हैं. नीतीश कुमार के मंत्रिमंडलों में इन सामाजिक समूहों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता रहा है. सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) के मंत्रिमंडल में भी वैसा ही महत्व मिलने की पूरी संभावना है. पहले कुर्मी समाज की बात. पूर्व में इस समाज के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा श्रवण कुमार (Sharvan Kumar) अनिवार्य रूप से मंत्रिमंडल में रहते थे. श्रवण कुमार अभी जदयू विधायक दल के नेता हैं. इस नाते भी उनका मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. इनके अलावा कुर्मी समाज से एक और मंत्री बनाया जा सकता है.

इनकी भी है संभावना

जदयू (JDU) में कुर्मी समाज के तकरीबन एक दर्जन विधायक (MLA) हैं. एक-दो विधान पार्षद (MLC) भी हैं. उनमें वरिष्ठता के आधार पर करगहर (Kargahar) के विधायक वशिष्ठ नारायण सिंह, वैशाली (Vaishali) के सिद्धार्थ पटेल और बेलदौर (Beldaur) के पन्नालाल पटेल में से किसी एक को अवसर उपलब्ध हो जाये तो वह चौंकने वाली बात नहीं होगी. युवा चेहरे को महत्व मिला तो कहलगांव (Kahalgaon) के सदानंद मुकेश या वारिसनगर (Varisnagar) के मांजरिक मृणाल की किस्मत खुल जा सकती है. वैसे संख्या सीमित है. बात श्रवण कुमार तक ही रह जा सकती है.

ललन सिंह के खासमखास

जदयू में कुशवाहा समाज के विधायकों में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं महनार (Mahanar) के विधायक उमेश सिंह कुशवाहा, संदेश (Sandes) के भगवान सिंह कुशवाहा, अमरपुर (Amarpur) के जयंत राज, हथुआ (गोपालगंज) के रामसेवक सिंह में से किसी एक या दो को मौका मिल सकता है. ज्यादा संभावना भगवान सिंह कुशवाहा और जयंत राज की बनती दिख रही है. धानुक समाज से झाझा (Jhaja) के दामोदर रावत और फुलपरास (Fulparas) की शीला मंडल की मजबूत दावेदारी है. शीला मंडल को नारी सशक्तीकरण (Women Empowerment) का लाभ मिल सकता है पर, सूर्यगढ़ा (Suryagarha) से पहली बार विधायक बने रामानंद मंडल को भी कमतर नहीं आंका जा सकता है. वह केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (Rajiv Ranjan Singh alias Lallan Singh) के खासमखास माने जाते हैं. इसलिए उनकी संभावना को एकबारगी खारिज नहीं किया जा सकता.

अचरज की बात नहीं

मंत्रिमंडल में जगह मामले में जदयू नेतृत्व अत्यंत पिछड़ा वर्ग को भी खूब महत्व देता है. वैसे तो धानुक समाज भी अत्यंत पिछड़ा वर्ग में ही आता है, इसके बावजूद इस वर्ग की दूसरी जातियों को भी वह मौका उपलब्ध कराता रहा है. सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में मदन सहनी (Madan Sahani) के अलावा गोपालपुर (Gopalpur) के गंगोत्री समाज के विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल (Shailesh Kumar alias Bulo Mandal) को जगह मिल जाये तो वह अचरज की बात नहीं होगी.

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रूठी रह जायेगी तब किस्मत

अनुसूचित जाति से जदयू में विधान पार्षद अशोक चौधरी (Ashok Choudhary), कल्याणपुर के विधायक महेश्वर हजारी (Maheshwar Hazari) और भोरे (गोपालंगज) के सुनील कुमार (Sunil Kumar) अगली कतार में हैं. इन तीनों को अवसर मिल गया तो फिर रत्नेश सदा (Ratnes Sada) की किस्मत रूठी रह जा सकती है. संयोगवश किसी एक का पत्ता साफ हुआ तो फिर रत्नेश सदा का सितारा बुलंद समझिये. चर्चा है कि अशोक चौधरी का पत्ता इस बार साफ होने वाला है. अल्पसंख्यक समुदाय से मोहम्मद जमा खान (Mohammad Jama Khan) के लिए कोई व्यवधान नहीं है. जदयू में इस समुदाय के एक-दो विधान पार्षद हैं भी तो उन्हें अवसर उपलब्ध होने की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिखती है.

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