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नहीं हुआ कहीं कभी ऐसा : जीत बंगाल में, जश्न बिहार में!

शपथ-ग्रहण समारोह 07 मई 2026 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित होगा. भव्यता लगभग वैसी ही रहेगी जैसी नीतीश कुमार के पिछले शपथ-ग्रहण समारोह में थी. राजनीति चकित है कि सिर्फ मंत्रियों के शपथ-ग्रहण के लिए ऐसा भव्य आयोजन भारत के संसदीय इतिहास का पहला मामला है. विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रियों के शपथ-ग्रहण के बहाने पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक जीत का जश्न भाजपा बिहार में मना रही है. इसका कुछ विशेष निहितार्थ भी है.

विभेष त्रिवेदी
06 मई 2026

Patna : पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत से हालात बदल जाये तो वह अलग बात होगी, बिहार (Bihar) की राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में सम्राट चौधरी को सरकार की बागडोर मिलने के बाद भी राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है या सत्ता हस्तांतरण, यह तय करना कठिन है. वैसे, जो भी हुआ है उसके आरंभिक लक्षण गड़बड़ दिख रहे हैं. नीतीश कुमार के सत्ता त्याग के बाद भाजपा ((BJP) और जदयू (JDU) के बीच ‘घात-प्रतिघात’ की जो अंदरूनी राजनीति (Internal Politics) हो रही है उससे देर-सवेर एनडीए (NDA) में बिखराव, सत्ता में फिर बदलाव, मध्यावधि चुनाव जैसी अनेक आशंकाएं आकार लेती दिख रही है. सम्राट चौधरी को निर्देशन-मार्गदर्शन व आशीर्वाद मिलने की बात भले कही जा रही हो, नीतीश कुमार सत्ता-वियोग से उबर पायेंगे, यह बहुत बड़ा गंभीर सवाल बना हुआ है. उक्त आशंकाओं का मूल तत्व भी यही है.

कर रहा जदयू बार-बार आगाह

जदयू की ओर से बार-बार याद दिलाना कि 2025 में एनडीए को जनादेश ‘2025 से 30 फिर से नीतीश’ के उद्घोष पर मिला था. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अपनी मर्जी से सत्ता भाजपा के सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) को सौंप दी है. लेकिन, नीतियां उनकी नहीं बदलनी चाहिए. जदयू के ऐसा कहने का तात्पर्य यह कि मुख्यमंत्री भले सम्राट चौधरी हों, सरकार नीतीश कुमार के मन मुताबिक चलेगी. क्या ऐसा हो पायेगा? शायद नहीं. आज न कल यही राजनीति में बदलाव का कारण बन जायेगा. जदयू की अकड़ अपनी जगह है, भाजपा के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं है. भाजपा के अब तक के इतिहास में कहीं किसी राज्य में उसके मुख्यमंत्री की ऐसी ‘सपाट ताजपोशी’ नहीं हुई होगी जैसी बिहार में सम्राट चौधरी की हुई. यह देख-सुन राजनीति हैरान रह गयी.

हैरान रह गये लोग

कई कारणों से सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनने के दौरान ऐसे दूल्हा दिखे जिनके मौड़ी-मुकुट धारण करने से भाजपाई सखियां खुश नहीं थीं. न कोई मंगल गीत, न बैंड बाजा और न आतिशबाजी! लोग समझ नहीं पाये कि छोटी-छोटी खुशियों पर भी थिरकने वाली भाजपाई महिलाओं के पांव बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री बनने पर ठिठक क्यों गये? देव-दुर्लभ कार्यकर्त्ता एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते-उड़ाते सड़क पर नगाड़ा बजाने क्यों नहीं निकले? मंत्रिमंडल-विस्तार (Cabinet Expansion) के तहत मंत्रियों के शपथ-ग्रहण समारोह (Oath Taking Ceremony) को भले बड़े जश्न का रूप दिया जा रहा हो. राजनीति के लिए यह हैरान करनेवाली बात रही कि सम्राट चौधरी की ताजपोशी में प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) और केन्द्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) नहीं आये. दूसरे राज्यों में ऐसे अवसर पर आमतौर पर उनकी मौजूदगी होती रही है. दोनों की नहीं, तो कम से कम एक की तो अवश्य ही.

कौन भरोसा करेगा इस सफाई पर

नवम्बर 2025 में नीतीश कुमार के दसवें शपथ-ग्रहण समारोह में दोनों शामिल हुए थे. हालांकि, इस बार भी उनके पटना आने का कार्यक्रम था. लेकिन, पहले भाजपा और फिर एनडीए विधायक दल के नेता के रूप में सम्राट चौधरी के चयन के बाद दोनों के कार्यक्रम रद्द हो गये. उनकी गैर मौजूदगी की इस सफाई पर कौन भरोसा करेगा कि दिन-रात चार्टर्ड प्लेन व हेलीकॉप्टर से घूम रहे नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के पश्चिम बंगाल (West Bengal) के चुनाव में व्यस्त रहने की वजह से पटना में पहली बार ‘अपने मुख्यमंत्री’ के शपथ-ग्रहण समारोह में शिरकत करने के लिए दो घंटे की फुर्सत नहीं मिल पायी! शपथ-ग्रहण समारोह (Oath Taking Ceremony) से परहेज का कारण जो रहा हो, इससे इस धारणा को मजबूती मिली कि बिहार में सम्राट चौधरी भाजपा के ‘अनचाहा सम्राट’ हैं.

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है कुछ विशेष निहितार्थ

अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रियों के शपथ-ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह आदि सभी आ रहे हैं. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे. शपथ-ग्रहण समारोह 07 मई 2026 को पटना के गांधी मैदान (Gandhi Maidan) में आयोजित होगा. भव्यता लगभग वैसी ही रहेगी जैसी नीतीश कुमार के पिछले शपथ-ग्रहण समारोह में थी. राजनीति चकित है कि सिर्फ मंत्रियों के शपथ-ग्रहण के लिए ऐसा भव्य आयोजन भारत के संसदीय इतिहास (Parliamentary History of India) का पहला मामला है. विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रियों के शपथ-ग्रहण के बहाने पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक जीत का जश्न (Celebration of Historic Victory) भाजपा बिहार में मना रही है. इसका कुछ विशेष निहितार्थ भी है.

(विभेष त्रिवेदी बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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