अब भी खड़ा है सवाल : क्या सच में नीतीश के हैं सम्राट?

हालांकि, विजय कुमार चौधरी और विजेन्द्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री एवं श्रवण कुमार को जदयू विधायक दल का नेता बना नीतीश कुमार ने पार्टी में एकजुटता बनाये रखने की पहल की है. सम्राट मंत्रिमंडल में पिछड़ों और अतिपिछड़ों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दे इस पहल को मजबूती भी दी है. इसके बाद भी जदयू में बिखराव होता है, तो वह सम्राट चौधरी के सत्ता से पांव उखड़ जाने का भी आधार बन जा सकता है.

तापमान लाइव ब्यूरो
09 मई 2026
Patna : लम्बे इंतजार के 22वें दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) के मंत्रिमंडल को पूर्ण आकार मिल गया. कारण जो रहा हो, यह इंतजार भी संसदीय इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय बन गया. इस रूप में कि इसके लिए पूर्व में किसी मुख्यमंत्री (Chief Minister) को इतना लम्बा इंतजार शायद ही कभी करना पड़ा होगा. करना पड़ा भी होगा तो उसके एक-दो से ज्यादा उदाहरण नहीं होंगे. खैर, इंतजार खत्म हुआ. गुरुवार को मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों से सज्जित मंत्रिमंडल ऐतिहासिकता समेटे 35 सदस्यीय हो गया. ऐतिहासिकता इस रूप में कि मंत्रियों का शपथ-ग्रहण राजभवन (Rajbhavan), जिसे अब लोकभवन (Lok Bhavan) कहा जाता है, से बाहर गांधी मैदान (Gandhi Maidan) में हुआ. गाहे-बगाहे मुख्यमंत्री और उनके साथ मंत्रियों के गांधी मैदान में शपथ-ग्रहण की परम्परा रही है. एकाध बार प्रधानमंत्री की मौजूदगी भी हुई है.
अपने कैसे हो गये उनके!
पर, सिर्फ मंत्रियों के शपथ-ग्रहण में प्रधानमंत्री (Prime Minister) की मौजूदगी का कोई उदाहरण नहीं है. लेकिन, ‘सम्राट सरकार’ के मंत्रियों के शपथ-ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ही नहीं, एनडीए (NDA) के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी रही. यही इसकी ऐतिहासिकता मानी जा रही है. बहरहाल, मंत्रिमंडल गठन की औपचारिकताएं पूरी हो गयीं. सता त्यागी नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की ‘कृपा’ से सता में आयी ‘सम्राट सरकार’ को अब अपनी कार्यदक्षता और सार्थकता सिद्ध करनी होगी. इस अनसुलझे अहम सवाल के बीच कि सम्राट चौधरी आखिर नीतीश कुमार के अपने कैसे हो गये? महीनों तक केसरिया पगड़ी बांध नीतीश कुमार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिये घूमते रहे सम्राट चौधरी सत्ता हस्तांतरण में उनकी विकल्प रहित पहली पसंद कैसे बन गये?
रास नहीं आ रही ‘दंडवत मुद्रा’
याद कीजिये, सम्राट चौधरी ने महागठबंधन (Mahagathbandhan) की पिछली सरकार के दौर में कहा था, ‘नीतीश कुमार जब तक मुख्यमंत्री पद से नहीं हटेंगे, तब तक हम पगड़ी नहीं खोलेंगे.’ हालांकि, कुछ समय बाद नीतीश कुमार उसी हैसियत में एनडीए में लौट गये. संकल्प तोड़ सम्राट चौधरी ने पगड़ी खोल दी और अयोध्या (Ayodhya) में मुंडन भी करा लिया. सम्राट चौधरी की ताजपोशी पर तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejawi Prasad Yadav) ने तंज भी कसा- ‘इलेक्टेड मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की प्रतिज्ञा पूरी करने और सेलेक्टेड मुख्यमंत्री बनने पर बधाई!’ ऐसे में नीतीश कुमार को महिमा मंडित करने वाली टोली सम्राट चौधरी को जदयू का अपना बता रही है तो भाजपा को और क्या चाहिये? भाजपा की अपनी सरकार और अपना मुख्यमंत्री, फिर भी नीतीश कुमार ‘मुग्ध’ हैं, तो उसके लिए इसमें बुरा क्या है? वैसे, भाजपा नेतृत्व को सम्राट चौधरी का नीतीश कुमार के प्रति ‘दंडवत मुद्रा’ रास नहीं आ रही है.
एक अध्याय ‘विधवा विलाप’ का भी
सवाल यह भी कि सम्राट चौधरी सचमुच नीतीश कुमार की पसंद हैं, तो फिर जदयू में सन्नाटा क्यों पसर गया? नीतीश कुमार की सत्ता से विदाई के वक्त जदयू के मंत्री और विधायक जार-जार रोते क्यों दिखे? वैसे, नीतीश कुमार के तकरीबन 21 वर्षीय शासनकाल के इतिहास का एक अध्याय ‘विधवा विलाप’ का भी है. इस रूप में कि सत्ता में बने रहने के लिए जब वह पलटी मारते थे तब आंसू कभी भाजपा के मंत्रियों-विधायकों के बहते थे तो कभी राजद के मंत्रियों-विधायकों के. पहली बार ऐसा दिखा कि जदयू के मंत्री-विधायक ‘विधवा विलाप’ करते नजर आये. ऐसा संभवतः इसलिए भी कि नीतीश कुमार के बाद जदयू में बड़ा शून्य पैदा हो गया है. इसकी भरपाई ललन सिंह (Lalan Singh), संजय झा (Sanjay Jha), विजय कुमार चौधरी (Vijay Kumar Choudhary) या श्रवण कुमार (Shravan Kumar) नहीं कर सकते. राजनीति में नये-नये कदम रखने वाले नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार (Nishant Kumar) में तो वैसी काबिलियत ही नहीं है.
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नहीं है दूसरा कोई चेहरा
इसका मतलब यह कि जदयू को लंबे समय तक एकजुट रखने वाला चेहरा नदारद है. इस हकीकत से नीतीश कुमार वाकिफ हैं. इससे भी कि उनके ढीला पड़ जाने पर जदयू बिखर जायेगा. इसलिए नेताओं-कार्यकर्त्ताओं का मनोबल बनाये रखने के लिए बार-बार दुहरा रहे हैं कि सत्ता छोड़ देने के बाद भी वह बिहार में ही रहेंगे, विकास के कार्यों पर नजर रखेंगे. यात्रा का सिलसिला बनाये रख संगठन को मजबूत बनायेंगे. हालांकि, विजय कुमार चौधरी और विजेन्द्र प्रसाद यादव (Vijendra Prasad Yadav) को उपमुख्यमंत्री एवं श्रवण कुमार को जदयू विधायक दल का नेता बना उन्होंने पार्टी में एकजुटता बनाये रखने की पहल की है. सम्राट मंत्रिमंडल (Samrat Cabinet) में पिछड़ों और अतिपिछड़ों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दे इस पहल को मजबूती भी दी है. इसके बाद भी जदयू में बिखराव होता है, तो वह सम्राट चौधरी के सत्ता से पांव उखड़ जाने का भी आधार बन जा सकता है.
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